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फूड डिलिवरी में करना पड़ रहा ज्यादा घंटे काम, मगर कमाई कम: NCAER ने जारी की रिपोर्ट

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छोटी शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के काम के घंटे यथावत हैं, जबकि लंबी शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के काम के घंटे 19 प्रतिशत बढ़कर 10.9 घंटे प्रतिदिन हो गए हैं

Last Updated- August 28, 2023 | 10:21 PM IST
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फूड डिलिवरी प्लेटफार्म से जुड़े कर्मचारियों की औसत वास्तविक आमदनी में 2019 और 2022 के बीच कमी आई है। इसकी प्रमुख वजह बढ़ी महंगाई और ईंधन की लागत में बढ़ोतरी है। इससे कर्मचारियों की परिवार का खर्च चलाने की क्षमता कम हुई है। सोमवार को जारी नैशनल काउंसिल आफ अप्लायड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की ताजा रिपोर्ट में यह सामने आया है।

‘सोशियो-इकनॉमिक इंपैक्ट असेसमेंट आफ फूड डिलिवरी प्लेटफॉर्म वर्कर्स’ नाम से आई रिपोर्ट NCAER द्वारा 3 भाग में चलाए जा रहे शोध कार्यक्रम का पहला हिस्सा है। इसमें फूड डिलिवरी प्लेटफॉर्म के लिए काम करने वाले कर्मचारियों के रोजगार के तरीके, आमदनी, काम के माहौल पर अध्ययन किया गया है।

इसमें एक कंपनी के 924 फूड डिलिवरी प्लेटफॉर्म कर्मचारियों पर अध्ययन किया गया है, जो अलग अलग 28 शहरों में कार्यरत हैं। इसमें प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले और प्लेटफॉर्म छोड़ चुके कर्मचारियों की गतिविधियों, काम करने की अवधि (कितने समय तक प्लेटफॉर्म पर काम किया) और काम करने की अवधि ( 11 घंटे की लंबी शिफ्ट या 5 घंटे की छोटी शिफ्ट, साप्ताहिक अवकाश आदि) शामिल है।

लंबी शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों (11 घंटे तक काम करने वाले) की वास्तविक आमदनी 2019 के 13,470 रुपये प्रति माह से 11.1 प्रतिशत घटकर 2022 में 11,963 रुपये रह गई है। वहीं छोटी शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों (5 घंटे काम) की आमदनी इस अवधि के दौरान 7999 रुपये से 10.4 प्रतिशत घटकर 7,157 रुपये रह गई है।

छोटी शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के काम के घंटे यथावत हैं, जबकि लंबी शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के काम के घंटे 19 प्रतिशत बढ़कर 10.9 घंटे प्रतिदिन हो गए हैं, जो पहले 9.3 घंटे प्रतिदिन थे। प्लेटफॉर्म से जुड़े कर्मचारियों की वास्तविक आमदनी समय बीतने के साथ कम हुई है। इसकी प्राथमिक वजह बढ़ी महंगाई है।

लंबी शिफ्ट के कर्मचारियों को लक्ष्य हासिल करना कठिन हुआ है (जिससे आमदनी बढ़ती है), जिसकी वजह यातायात की बढ़ी भीड़ और बढ़ती प्रतिस्पर्धा है। सभी कर्मचारियों की औसत आमदनी कम घटी है।

इससे परिवार का मासिक खर्च उठाने की क्षमता कम हुई है, क्योंकि लंबी शिफ्ट में काम करने वालों की आमदनी भी घटी है। रिपोर्ट जारी करते हुए एनसीएईआर की प्रोफेसर बरनाली भंडारी ने कहा कि प्लेटफॉर्म के काम को अब औपचारिक रोजगार बनाए जाने की जरूरत है, जिससे दुर्घटना बीमा और लिखित कांट्रैक्ट के लाभ सभी कर्मचारियों को मिल सके।

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First Published - August 28, 2023 | 10:21 PM IST

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