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Budget 2026 से ग्रोथ को मिलेगी रफ्तार! रिपोर्ट में दावा: घरेलू मांग पर फोकस से अर्थव्यवस्था होगी मजबूत

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EY द्वारा जारी इकोनॉमी वॉच रिपोर्ट में 2026-27 के केंद्रीय बजट के जरिए घरेलू मांग को मजबूत कर अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाए जाने की संभावना जताई गई है

Last Updated- December 23, 2025 | 5:16 PM IST
Budget
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

आने वाले बजट को लेकर उम्मीदें तेज हो गई हैं। देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक एक ही दिशा में चलते दिख रहे हैं। EY की नई रिपोर्ट इशारा कर रही है कि घरेलू मांग पर फोकस करके ग्रोथ को नई ताकत मिल सकती है।

EY द्वारा जारी इस इकोनॉमी वॉच रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026-27 का केंद्रीय बजट घरेलू मांग को मजबूत बनाने के लिए खास तरह की सरकारी मदद देकर अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ा सकता है। यह कदम रिजर्व बैंक की उस नीति का साथ देगा जो बढ़ते विकास को प्राथमिकता दे रही है। यह रिपोर्ट मंगलवार को जारी हुई।

हालांकि, इस साल आयकर और GST में सुधार से सरकार की कमाई थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) में कुछ अतिरिक्त आमदनी और राजस्व खर्च में तय की गई रकम से थोड़ी कटौती से सरकार अपने घाटे और पूंजीगत खर्च के लक्ष्यों पर कायम रह सकेगी।

Also Read: बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर फिर से जोर, निजी भागीदारी को मिले बढ़ावा

तंबाकू और पान मसाला पर अब नए सेस

हाल ही में दो ऐसे कदम उठाए गए हैं जो सरकार की कमाई बढ़ाएंगे। इनमें तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य सेस शामिल हैं। संसद ने हाल में दो कानून पारित किए हैं जिनसे तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी और पान मसाला पर सेस लगेगा। ये कानून तय तारीख से लागू होंगे।

EY इंडिया के चीफ पॉलिसी एडवाइजर डी.के. श्रीवास्तव ने कहा कि आगे चलकर भारत को अपनी मजबूत घरेलू मांग पर ही भरोसा करना पड़ेगा ताकि विकास की गति बनी रहे। रिजर्व बैंक की विकास समर्थक नीति के साथ मिलकर 2026-27 का बजट भी इसी दिशा में एक बड़ा धक्का दे सकता है। बता दें कि बजट संसद में 1 फरवरी 2026 को पेश किया जाएगा।

दुनिया भर में चल रही मुश्किलों के बीच EY की रिपोर्ट मानती है कि निर्यात-आयात का GDP विकास में योगदान नकारात्मक बना रहेगा और शायद यह नुकसान और बढ़ सकता है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में नेट एक्सपोर्ट का नकारात्मक असर (-)2.1 प्रतिशत अंक था, जो पहली तिमाही के (-)1.4 प्रतिशत अंक से ज्यादा है। व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएं खत्म होने तक यह असर जारी रह सकता है।

श्रीवास्तव का मानना है कि भारत मध्यम अवधि में मजबूत विकास बनाए रखेगा, औसतन 6.5 प्रतिशत की दर से। अगर निजी निवेश भी तेज हुआ और वैश्विक सप्लाई चेन की दिक्कतें कम हुईं तो यह और बेहतर हो सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था ने जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत और सितंबर तिमाही में 8.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए GDP विकास का अनुमान 7.3 प्रतिशत रखा है, जो पिछले साल के 6.5 प्रतिशत से ज्यादा है।

(PTI के इनपुट के साथ)

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First Published - December 23, 2025 | 5:16 PM IST

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