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सौर उपकरणों के आयात पर सुरक्षा शुल्क का समाप्त

Last Updated- December 12, 2022 | 2:01 AM IST

भारतीय सौर सेल और मॉड्ïयूल विनिर्माताओं के लिए आगे का समय मुश्किल भरा हो सकता है क्योंकि अगले वर्ष अप्रैल तक के लिए आयात से उन्हें कोई सुरक्षा नहीं मिलने जा रही है। पिछले दो वर्षों से सोलर सेल और मॉड्ïयूलों के आयात पर लगने वाले सुरक्षा शुल्क (सेफगार्ड ड्यूटी) की अवधि पिछले महीने समाप्त हो गई। केंद्र द्वारा घोषित बुनियादी सीमा शुल्क (बीसीडी) नौ महीने बाद प्रभावी होगा। 
सौर क्षेत्र के कार्यकारियों का कहना कि इस शुल्क के समाप्त होने से सौर सेलों और मॉड्ïयूलों के देसी विनिर्माताओं की मुश्किलें और तेजी से बढऩे वाली है। लेकिन सौर परियोजना डेवलपरों के लिए यह मौका वरदान साबित होगा क्योंकि वे बीसीडी के प्रभावी होने तक आयात करने में सक्षम होंगे।      

अर्थ एनर्जी सोर्सेज में प्रबंध पार्टनर अनिमेश दमानी ने कहा, ‘नौ महीने की शुल्क मुक्त अवधि वह भी बिना किसी नियंत्रण के भारतीय सौर डेवलपरों के लिए बहुत अधिक राहत की बात है। हम सौर मॉड्ïयूलों और उपकरण के आयातों में भारी उछाल की उम्मीद कर सकते हैं।’ 
उन्होंने कहा कि इस सौर कारोबार में और अधिक परियोजनाएं आने और नई कंपनियों के प्रवेश से सौर शुल्क में करीब 15 फीसदी की कटौती की उम्मीद की जा सकती है। हाल की निविदाओं में परियोजना डेवलपरों ने शुल्क मुक्त अवधि का लाभ उठाते हुए कम लागत वाले सामानों के आयात का अनुमान लगाकर प्रतिस्पर्धी टैरिफ की बोली देनी शुरू कर दी है।

चीनी सौर सेल और मॉड्ïयूल भारतीय के मुकाबले 10 से 20 फीसदी तक सस्ते पड़ते हैं। भारत अपने सौर सेलों और मॉड्ïयूलों का करीब 90 फीसदी आयात करता है और इनमें से करीब 80 फीसदी का आयात चीन से किया जाता है।
उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक भारत के पास 3,100 मेगावॉट की सेल विनिर्माण और 9,000 मेगावॉट की मॉड्ïयूल विनिर्माण क्षमता है। भारत की सौर बिजली की स्थापित क्षमता 39.08 गीगावॉट है जिसमें जमीन पर स्थापित और रूफटॉप दोनों शामिल हैं। 

देश का लक्ष्य अगले वर्ष तक 100 गीगावॉट सौर बिजली क्षमता हासिल करने का है।  
विगत तीन वर्षों में भारत में आयातित सौर सेलों और मॉड्यूलों पर शुल्क व्यवस्था में कई प्रकार के बदलाव देखे गए हैं। आयात पर निर्भर रहने वाले इस क्षेत्र के लिए परियोजनाओं के लिए बोली लगाने या उपयुक्त टैरिफ के आकलन में यह एक बड़ी बाधा रही है।

बीसीडी के अलावा केंद्र ने चीन, वियतनाम और ताइवान से सौर आयात के डंपिंग की शिकायत के खिलाफ जांच भी शुरू की है। ये शिकायतें अदाणी एंटरप्राइजेज की सौर विनिर्माण इकाई मुंद्रा सोलर पीवी और जुपिटर सोलर पावर ने वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत व्यापार उपचार महानिदेशालय में की है। 
विगत एक दशक में आयातों विशेष तौर पर चीन से आयात से छुटकारा पाने के लिए भारतीय सौर विनिर्माता उद्योग की ओर से यह इस प्रकार का तीसरा प्रयास है।

एक अग्रणी विनिर्माण कंपनी के वरिष्ठï कार्यकारी ने कहा कि डंपिंग रोधी कार्रवाई से देसी मॉड्ïयूल विनिर्माताओं के लिए एक समान अवसर का सृजन होगा।  उन्होंने कहा, ‘इससे इन देशों से सस्ते आयात का दबाव झेल रहे देसी क्षेत्र को होने वाले भौतिक जोखिम से अत्यंत जरूरी राहत मिलेगी और 3,00,000 लाख से अधिक नौकरियों को सुरक्षित करने में भी मदद मिलेगी।’ 

First Published - August 9, 2021 | 1:42 AM IST

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