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टिकाऊ नकदी डालने की जरूरत

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Last Updated- December 27, 2022 | 4:48 PM IST
BS

भारतीय रिजर्व बैंक के कम अवधि के नकदी प्रबंधन से बड़े बाहरी झटकों से निपटने में कठिनाई सामने आ रही है। मौद्रिक नीति समिति की सदस्य आशिमा गोयल ने भास्कर दत्ता से बातचीत में कहा कि ऋण में वृद्धि के लिए कुछ टिकाऊ नकदी डाले जाने की जरूरत पड़ सकती है। प्रमुख अंश…

आपने कहा कि मौजूदा रीपो रेट संतोषजनक है। क्या आपको महंगाई दर में स्थिर गिरावट का भरोसा है, जबकि एमपीसी ने अगले साल की दूसरी तिमाही में महंगाई दर बढ़ने का अनुमान लगाया है?

महंगाई दर के अनुमानों में बड़े स्तर की अनिश्चितता है। एमपीसी के महंगाई दर के अनुमान में इसके नीचे जाने की संभावना ज्यादा है।

आपूर्ति संबंधी कई झटकों का उल्लेख किया गया है, जिसकी वजह से प्रमुख महंगाई दर मौजूद है। यह कब 4 प्रतिशत तक पहुंच सकता है?

गवर्नर ने 2 साल की अवधि में वैश्विक आपूर्ति के झटके खत्म होने के संकेत दिए हैं। इसकी प्रक्रिया पहले ही शुरू हो गई है और इसके पहले भी ऐसा हो सकता है, अगर वैश्विक वृद्धि की स्थिति गंभीर रहती है।

आपने ब्याज दर में ज्यादा स्प्रेड्स का उल्लेख किया है। क्या यह उचित वक्त है जब रिजर्व बैंक को सरकारी बॉन्ड खुले बाजार से खरीदना शुरू करना चाहिए?

यह ध्यान रखने की जरूरत है कि नकदी का मौजूदा स्तर क्या है। नकदी का मौजूदा टिकाऊ स्तर बनाए रखकर नकदी के झटकों से बचा जा सकता है, इसके लिए कम अवधि की नकदी के बेहतर प्रबंधन की जरूरत है। सरकार ने खर्च करना शुरू किया है, नकदी का संतुलन बन रहा है और विदेशी निवेश आना शुरू होने के साथ भंडार बढ़ने, अग्रिम कर भुगतान होने से टिकाऊ नकदी का स्तर ज्यादा बेहतर हो सकेगा।

क्या आप विस्तार से बता सकती हैं कि उच्च रीपो रेट को देखते हुए एमपीसी किस तरीके से ऋण को समर्थन करेगी? क्या यह सख्ती के चक्र के असर को कम कर सकता है?

विकसित अर्थव्यवस्थाओं की परिचालन व्यवस्था में टिकाऊ नकदी को घाटे में रखा जाता है, जरूरत पड़ने पर व्यवस्था में कम अवधि की नकदी डाली जाती है। भारत में महंगाई को लक्षित करने के दौर में इस व्यवस्था का पालन हो रहा है, टिकाऊ नकदी को घाटे में रखा जा रहा है और कॉल रेट को रीपो रेट के बराबर रखा जा रहा है। भारत में कम अवधि की नकदी प्रबंधन की व्यवस्था अभी बड़े बाहरी झटकों से निपटने में सक्षम नहीं है, ऐसे में कुछ टिकाऊ नकदी डाले जाने की जरूरत पड़ सकती है।

अमेरिकी डॉलर में मजबूती के एक और दौर से रुपया किस तरह से निपटेगा?

बाजार के आकलन से ऐसा लगता है कि बहुत ज्यादा बढ़ने के बाद अब डॉलर कमजोर होगा। तमाम विकसित देश अब नीतिगत दरें बढ़ा रहे हैं। व्यापक रूप से राय यह है कि भारत इस उतार-चढ़ाव से अच्छी तरह निपटने में कामयाब रहा है।

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First Published - December 27, 2022 | 4:42 PM IST

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