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राज्यों की कर्ज गारंटी FY17 से FY23 तक तीन गुना होकर 9.4 लाख करोड़ रुपये हुई

रिपोर्ट में गोवा के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्य और अन्य पहाड़ी राज्य को शामिल नहीं किया गया।

Last Updated- January 21, 2024 | 3:31 PM IST
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देश के 17 प्रमुख राज्यों द्वारा अपनी इकाइयों को दी गई कुल ऋण गारंटी वित्त वर्ष 2022-23 तक तीन गुना से अधिक होकर 9.4 लाख करोड़ रुपये हो गई है। यह वित्त वर्ष 2016-17 में तीन लाख करोड़ रुपये थी।

हालांकि, गारंटियां आकस्मिक देनदारियां हैं। ये राज्यों के राजकोषीय तंत्र के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकती हैं। ऐसे में राज्यों को एक मजबूत गारंटी निगरानी की जरूरत होती है, ताकि उनकी वित्तीय प्रणाली कुल मिलाकर जुझारू बनी रहे।

राज्य अक्सर अपने विभिन्न उद्यमों, सहकारी संस्थानों और शहरी स्थानीय निकायों की ओर से अपने ऋणदाताओं के पक्ष में गारंटी देते हैं और जारी करते हैं जो आमतौर पर बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान होते हैं।

17 प्रमुख राज्यों की कुल ऋण गारंटी बढ़ी

इक्रा रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने रिपोर्ट में कहा कि देश के 17 प्रमुख राज्यों द्वारा अपनी इकाइयों को दी गई कुल ऋण गारंटी 2016-17 में तीन लाख करोड़ रुपये से तीन गुना होकर 9.4 लाख करोड़ रुपये हो गई है। वास्तव में, ऐसी गारंटी पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2016-17 में तीन लाख करोड़ रुपये से वित्त वर्ष 2020-21 में 7.7 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2021-22 में यह नौ लाख करोड़ रुपये हो गई।

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गोवा, पूर्वोत्तर राज्य और अन्य पहाड़ी राज्य को रिपोर्ट में नहीं किया गया शामिल

रिपोर्ट में गोवा के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्य और अन्य पहाड़ी राज्य को शामिल नहीं किया गया। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों में किसी राज्य द्वारा गारंटी सीमा सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम शामिल हैं, जो वर्तमान में अधिकतर राज्यों द्वारा लागू किए जा रहे हैं। इसमें बढ़ी हुई निगरानी के अलावा गारंटी के लिए जोखिम भार निर्दिष्ट करना भी शामिल है।

First Published - January 21, 2024 | 3:31 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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