facebookmetapixel
Advertisement
ऑल टाइम हाई के करीब Oil Stock पर ब्रोकरेज सुपर बुलिश, कहा- खरीद लें, 65% और चढ़ने का रखता है दमBharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेज

GST 2.0: किसानों के लिए खेती की लागत में आएगी कमी

Advertisement

चीनी क्षेत्र को भी लगता है कि कन्फेक्शनरी और बेकरी पर कर 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने से चीनी की मांग बढ़ेगी

Last Updated- September 05, 2025 | 8:45 AM IST
MSP
Representational Image

कृषि कार्य में इस्तेमाल होने वाले सामान और जैव कीटनाशकों व उर्वरकों पर जीएसटी दर कम किए जाने से किसानों की खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। हाल के वर्षों में कृषि मशीनरी और की कीमतों में सबसे तेज वृद्धि होने से किसानी की लागत बढ़ी है। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मई 2023 से नवंबर 2024 के बीच थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) में 2.1 प्रतिशत वृद्धि हुई है जबकि कृषि इनपुट का कुल मिलाकर सूचकाक 2.8 प्रतिशत गिरा है। इसके पहले अक्टूबर 2022 से अप्रैल 2023 के दौरान कृषि इनपुट्स का डब्ल्यूपीआई 3.4 प्रतिशत बढ़ा, जबकि कुल मिलाकर सूचकांक में 2.6 प्रतिशत की गिरावट आई है।

महिंद्रा ऐंड महिंद्रा जैसे बड़े ट्रैक्टर विनिर्माताओं ने जीएसटी दर में कटौती के कारण कीमतों में 50,000 से 60,000 रुपये कमी आने की घोषणा की है।
पशुधन मंत्रालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक फिश ऑयल, फिश एक्सट्रैक्ट्स और प्रिजर्व्ड मछली और झींगा उत्पादों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने से मूल्यवर्धित सी-फूड घरेलू ग्राहकों के लिए सस्ता होगा और इससे भारत के सी-फूड निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी। साथ ही मछली पकड़ने के जाल, समुद्री खाद्य उत्पाद और जलीय कृषि इनपुट पर अब 5 प्रतिशत कर लगेगा, जिन पर पहले 12 से 18 प्रतिशत की दर से कर लगता था।

चीनी की मांग बढ़ेगी

चीनी क्षेत्र को भी लगता है कि कन्फेक्शनरी और बेकरी पर कर 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने से चीनी की मांग बढ़ेगी।
फ्लोर मिलर्स का कहना है पैकेज्ड रोटी और परांठे पर शून्य शुल्क किए जाने से आटा, मैदा और सूजी के 25 किलो वाले पैकेटों की कीमत पर कोई उल्लेखनीय असर नहीं पड़ेगा, जिन पर पहले की तरह 5 प्रतिशत जीएसटी जारी है। रोलर्स फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के नवनीत चितलंगिया ने कहा, ‘कर घटाए जाने के बाद भी घरों में रोटी बनाने वाले परिवारों को आटा, मैदा और सूजी, बेसन जैसी प्रमुख सामग्रियों के 25 किलो के पैकेट पर 5 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान करना ही पड़ेगा। इससे गृहिणियों के लिए असमानता पैदा होती है, क्योंकि जीएसटी छूट उन लोगों तक नहीं पहुंच रही है, जो घर पर रोटी तैयार करते हैं। भारत में अधिकांश रोटियां अभी भी घरों में पकाई जाती हैं।’

कृषि उपकरणों पर नहीं घटी जीएसटी

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि प्रमुख कृषि उपकरणों पर जीएसटी में कटौती नहीं की गई। किसान क्राफ्ट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अंकित चितालिया ने कहा, ‘भारत में कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए कृषि के लिए आवश्यक सभी उपकरणों पर कर की दर को 5 प्रतिशत किया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद को इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर और स्पष्टता लानी चाहिए, जिससे ज्यादा जीएटी दरों का समायोजन हो सके, जिसकी वजह से नकदी फंसी रहती है और उद्योग पर वित्त की लागत का बोझ बढ़ता है। सॉल्यूबल फर्टिलाइजर इंडस्ट्री एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव चक्रवर्ती ने कहा कि उर्वरक पर उलटे शुल्क के ढांचे में सुधार से कार्यशील पूंजी का पूरा इस्तेमाल हो सकेगा।

Advertisement
First Published - September 5, 2025 | 8:45 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement