facebookmetapixel
Advertisement
मई में EV बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड, 45% उछाल से पहली बार 11% के पार पहुंची बाजार हिस्सेदारीTCS चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का बड़ा बयान: 3 साल में कर्मचारियों के बराबर होंगे AI एजेंटवाहन निर्माताओं का नीति आयोग को जवाब- पुराने वाहन कहां हैं, पता नहींEditorial: हादसों के पीछे छिपे भ्रष्टाचार और लापरवाह शहरी शासन की कहानीशास्त्री भवन को अलविदा: सत्ता के गलियारों की अनगिनत गाथाएं समेटे, खुले और जनसुलभ शासन की पहचानक्या तेल संकट के दौर में भारत की महंगाई नियंत्रण नीति जरूरत से ज्यादा सख्त है?रुपये की जोरदार वापसी, कच्चे तेल में गिरावट और RBI के कदमों से मिला सहाराखुदरा निवेशकों का उत्साह पड़ा फीका, लगातार तीसरे महीने धीमी रही नए डीमैट खाते खुलने की रफ्तारAI जुनून का चरम है स्पेसएक्स का आईपीओ, जेफरीज के क्रिस्टोफर वुड ने जताई बड़ी आशंकापैसिव फंड्स पर सेबी की सख्ती! ETF और इंडेक्स फंड्स के लिए भी आ सकता है 50% ओवरलैप नियम

फॉक्सकॉन कर्मियों को भारत से बुलाना है संकेत : मेमानी

Advertisement

भले ही भू-राजनीतिक अनिश्चितता से जोखिम कम हो जाए लेकिन मजबूत घरेलू मांग के कारण चालू वित्त वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में 6.4 से 6.7 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है।

Last Updated- July 03, 2025 | 10:42 PM IST
Foxconn
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के नव नियुक्त अध्यक्ष राजीव मेमानी ने चीन के फॉक्सकॉन से अपने देश के कर्मचारियों को वापस बुलाने और दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति रोकने के मामले में गुरुवार को कहा कि यह देशों के लिए अपनी विनिर्माण व आपूर्ति श्रृंखला कुछ देशों तक सीमित नहीं करने के लिए संकेत है।

मेमानी ने नई दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘मुझे लगता है कि इन घटनाओं के कई कारक हैं। हमारे लिए असलियत में यह पता लगाना बेहद मुश्किल है कि किस कारक ने तूल दिया। यह होम्योपैथिक दवा की तरह है – आपको नहीं पता कि किस कारक ने घटना को बढ़ाया है और समस्या (दर्द) कहां है। आपको मूल कारण को खंगालना होगा। यदि आप इन सभी के इतिहास को देखें तो जब भी क्वाड (चार देशों के समूह भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका) की बैठक होनी होती है, कुछ कार्रवाई होती है। ये एक तरह से संदेश हैं। यह भारत और अन्य सभी देशों के लिए संकेत है कि यदि आपके विनिर्माण और संसाधन कुछ देशों में बहुत केंद्रित हैं तो आप यह जोखिम उठाते हैं।’

मेमानी के अनुसार भले ही भू-राजनीतिक अनिश्चितता से जोखिम कम हो जाए लेकिन मजबूत घरेलू मांग के कारण चालू वित्त वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में 6.4 से 6.7 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है। उनका मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि को समर्थन देने वाले कारक अच्छे मॉनसून का पूर्वानुमान और रिजर्व बैंक के सीआरआर (नकद आरक्षित अनुपात) में कटौती से निकलने वाली बढ़ी हुई नकदी और ब्याज दर में कमी आदि है। केंद्रीय बैंक ने पिछले महीने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 100 आधार अंकों की कटौती की घोषणा की। इससे अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों को उधार देने के लिए बैंकिंग प्रणाली में 2.5 लाख करोड़ रुपये की नकदी आ जाएगी। बेंचमार्क ब्याज दर में 50 आधार अंकों की कटौती कर 5.5 प्रतिशत कर दी गई थी।  मेमानी ने 2025-26 के दौरान भारत के लिए सीआईआई के सकल घरेलू विकास (जीडीपी) के पूर्वानुमान पर एक सवाल के जवाब में कहा, ‘हम (आर्थिक वृद्धि) 6.4 से 6.7 प्रतिशत की सीमा में होने की उम्मीद करते हैं।’

उन्होंने कुछ जोखिम स्पष्ट होने के मामले में कहा, ‘इनमें से बहुत से बाह्य व्यापार जोखिम से संबंधित हैं। मुझे लगता है कि इनमें से बहुत से कारकों को शामिल किया गया है और कुछ सकारात्मक पहलू भी हैं। इसलिए उम्मीद है कि वे संतुलित हो जाएंगे। सीआईआई के दृष्टिकोण से हम 6.4 से 6.7 प्रतिशत की वृद्धि देख रहे हैं।’

Advertisement
First Published - July 3, 2025 | 10:30 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement