facebookmetapixel
Advertisement
शेयर बाजार की तरह फिल्मों में लगेगा पैसा! ₹22,000 करोड़ के सिनेमा बिजनेस में नए फंड्स की होगी एंट्रीदवाओं का आयात होगा आसान! सरकार बदलेगी 1945 का पुराना नियम, टेस्टिंग नियमों में ढील देने की तैयारीभारत में ‘मक्का क्रांति’ बहुत फायदेमंद, धान की जगह मक्के की खेती से पर्यावरण भी बचेगा व मुनाफा भी बढ़ेगाबॉन्ड मार्केट में फंड मैनेजर्स के अलग-अलग दांव: गिल्ट और डायनेमिक फंड्स में ड्यूरेशन को लेकर छिड़ी जंगरिकॉर्ड FII निकासी और ईरान संकट ने बढ़ाई टेंशन, चालू खाते का घाटा बढ़ने से रुपये पर भारी दबावEditorial: मॉनसून की सुस्त चाल ने बढ़ाई टेंशन, खेती और अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतराअयोध्या राम मंदिर दान घोटाला: चंपत राय-अनिल मिश्रा का इस्तीफा, UP पुलिस ने 8 लोगों को किया गिरफ्तारAI पर दुनिया का महा-समझौता: भारत समेत 35 देशों ने मिलाया हाथ, अमेरिका की बड़ी पहल को मिला साथ‘विकसित भारत 2047 के लिए जिम्मेदारी से AI अपनाना जरूरी’, ICAI के मंच से PM मोदी का संदेशबंगाल सरकार का बड़ा फैसला: खत्म होगा शहरी भूमि सीमा अधिनियम, बड़े निवेश का रास्ता साफ

Fitch का अनुमान, भारत में 2023-24 के दौरान 7% बढ़ जायेगी बिजली की मांग

Advertisement

फिच रेटिंग्स को उम्मीद है कि मजबूत औद्योगिक गतिविधियों के कारण वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की बिजली मांग लगभग सात प्रतिशत बढ़ जाएगी।

Last Updated- November 17, 2023 | 5:05 PM IST
Power consumption grows nearly 8% to 1,221.15 bn units in Apr-Dec, अप्रैल-दिसंबर में बिजली की मांग 8 प्रतिशत बढ़कर 1,221.15 अरब यूनिट पर पहुंची

घरेलू स्तर पर बिजली की मांग (Power Demand) चालू वित्त वर्ष में सालाना आधार पर सात प्रतिशत बढ़ेगी। रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने यह अनुमान लगाया है। एजेंसी ने एक रिपोर्ट में कहा कि इसकी भी उम्मीद है कि जल्द ही भुगतान चक्र और भी कम हो जाएंगे।

रिपोर्ट में कहा गया, “फिच रेटिंग्स को उम्मीद है कि मजबूत औद्योगिक गतिविधियों के कारण वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की बिजली मांग लगभग सात प्रतिशत बढ़ जाएगी। जबकि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में बिजली मांग में 7.1 प्रतिशत वृद्धि हुई है।”

एजेंसी ने कहा, “वित्त वर्ष 2022-23 में बिजली मांग में 9.5 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। मजबूत बिजली मांग के कारण ताप बिजली संयंत्रों का औसत क्षमता इस्तेमाल (पीएलएफ) 60 प्रतिशत से ऊपर रहना चाहिए।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि केंद्र सरकार के विलंबित भुगतान अधिभार (एलपीएस) नियमों के तहत नियमित भुगतान से बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) से बिजली उत्पादन कंपनियों (Genco) का कुल बकाया कम होकर लगभग 70,000 करोड़ रुपये रह गया है, जो जून, 2022 में एलपीएस लाने के समय 1.3 लाख करोड़ रुपये था।

Advertisement
First Published - November 17, 2023 | 5:05 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement