वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बजट के बाद श्रेया नंदी के साथ बातचीत में कहा कि सरकार ने एसईजेड इकाइयों के लिए राहत की घोषणा की है। इसके तहत उनको अपनी अतिरिक्त क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए सीमित घरेलू बिक्री की इजाजत दी जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि घरेलू उद्योग क्षेत्र की इकाइयां सुरक्षित रहें। बातचीत के अंश
सीमा शुल्क में बदलाव की क्या वजह है?
यह एक ऐसा बजट है जो भविष्य के लिए तैयार भारत की छवि पेश करता है। यह उन सुधारों को आगे बढ़ाता है जिन्हें प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को शुरू किया था। लगभग 350 सुधार संबंधित उपाय पहले ही किए जा चुके हैं। इस बजट की विभिन्न पहलों के माध्यम से सुधारों को आगे बढ़ाया गया है। पहली बार, इसमें इतने सारे क्षेत्रों को शामिल किया गया है और छोटे-छोटे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया गया है। यह बजट विनिर्माण को बढ़ावा देता है। तीन केमिकल जोन, परमानेंट मैग्नेट और महत्त्वपूर्ण खनिजों की स्थापना से इसे बढ़ावा दिया गया है।
क्या आप हमें एसईजेड के लिए किए गए उपाय के बारे में बता सकते हैं?
एसईजेड में मौजूदा इकाइयों को अपने उत्पादन का एक खास हिस्सा बेचने की इजाजत दी जाएगी। डोमेस्टिक टैरिफ एरिया (डीटीए) में निर्यात को ही प्राथमिकता मिलती रहेगी। साथ ही उस ड्यूटी पर भी छूट भी मिलेगी जो उन्हें चुकानी होगी ताकि यह विदेश से आने वाले कुछ आयात की जगह ले सके और भारत में ज्यादा क्षमता को घरेलू बाजार में पहुंचने का मौका मिल सके। हम यह ध्यान रखेंगे कि घरेलू निर्माताओं को नुकसान न हो।
पात्रता क्या है?
मोटे तौर पर ये मौजूदा इकाइयां होंगी। लेकिन हम कुछ क्षेत्रों को इससे बाहर रख सकते हैं। उदाहरण के लिए तेल, पेट्रोल और डीजल, या रिफाइनरियों को घरेलू बिक्री के लिए इसमें शामिल नहीं किया जा सकता है।
क्या हमें कानून में किसी बदलाव की जरूरत है या इसे लागू करने के लिए नोटिफिकेशन ही काफी होगा?
जो भी जरूरी होगा, हम वही तरीका अपनाएंगे। कुछ काम नियम बनाकर किया जा सकता है। कुछ काम कानूनी बदलावों के जरिये हो सकता है।
क्या हम इस कदम को एसईजेड संशोधन विधेयक के लिए बढ़ावा मान सकते हैं?
अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। आज हम एक बेहतरीन बजट का जश्न मना रहे हैं।
क्या आपको लगता है कि बजट समुद्री उत्पाद, टेक्सटाइल और लेदर जैसे ज्यादा श्रम बहुल क्षेत्रों को इस समय मुश्किल वैश्विक व्यापार माहौल से निकलने में मदद कर सकता है?
हां, वैश्विक व्यापार में मुश्किलों के बावजूद भारत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। इससे हमें और भी बेहतर करने में मदद मिलेगी। यह बजट ज्यादा श्रम वाले इन उद्योगों के साथ-साथ सेवा और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भी वृद्धि के बड़े मौके देता है। हमारे युवाओं को कल के लिए, कल की टेक्नॉलजी के लिए तैयार करने के लिए रीस्किलिंग पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। खेल और शिक्षा को भी नजरअंदाज नहीं किया गया है और रक्षा क्षेत्र पर जोर दिया गया है। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ने से भारत की ग्रोथ स्टोरी को बढ़ावा मिलेगा।
क्या आप इन श्रम प्रधान क्षेत्रों के लिए बढ़ावा देने के बारे में बताना चाहेंगे?
बढ़ावा तब मिलेगा जब लोग अवसर का फायदा उठाएंगे, लेकिन मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारा बिजनेस और इंडस्ट्री तैयार है। हमारे बिजनेस और इंडस्ट्री उन सभी एफटीए से भी बहुत उत्साहित हैं जो हम कर चुके है, क्योंकि ये विकसित दुनिया में अवसरों का खजाना खोलेंगे। मुझे लगता है कि हम तेजी से 2 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। बेशक, हमने कोविड के दो, ढाई साल खो दिए, इसलिए शायद 2032-33 तक हम एक ट्रिलियन डॉलर के मर्चेंडाइज और एक ट्रिलियन डॉलर के सेवा निर्यात की आकांक्षा कर सकते हैं।
बजट में कस्टम ड्यूटी में कमी की घोषणा की गई है, तो क्या हमें यह सुनिश्चित करने के लिए कोई एंटी-डंपिंग ड्यूटी उपाय करने होंगे कि कस्टम ड्यूटी में कमी लागू होने के बाद घरेलू बाजार पर कोई असर न पड़े?
यह अलग अलग मामले पर निर्भर करेगा। अगर डंपिंग होती है या लागत से कम कीमतों पर इंपोर्ट में तेजी आती है, तो एंटी-डम्पिंग ड्यूटी के लिए आवेदन पर विचार किया जा सकता है। यह एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया से गुजरता है। अगर यह सही पाया जाता है, तो हम उचित कदम उठाएंगे। कस्टम ड्यूटी कम करने का हमारा मकसद घरेलू उपभोक्ताओं को फायदा पहुंचाने और तैयार उत्पादों के हमारे निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कच्चे माल की किफायती कीमतों पर उपलब्धता को बढ़ावा देना है।