वित्त वर्ष 2022-23 (एफवाई 23) की पहली तिमाही में केंद्र का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 5.2 फीसदी रहा, जबकि पूरे वर्ष के बजट अनुमान (बीई) 6.4 फीसदी है। इसके अलावा, जुलाई में राजकोषीय अधिशेष 11,000 करोड़ रुपये के करीब रहा। इसका मतलब यह है कि चालू वित्त वर्ष में केंद्र का राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.2 फीसदी कम रहा।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मतलब यह कतई नहीं है कि केंद्र यह मानने के लिए तैयार है कि चालू वित्त वर्ष में बजट अनुमान के 6.4 फीसदी से राजकोषीय घाटा कम है, बावजूद इसके कि खाद्य पर उर्वरक सब्सिडी खर्च में वृद्धि और कम गैर कर प्राप्तियां हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरी छमाही में पूंजीगत व्यय भी बढ़ेगा। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि पूंजीगत व्यय में दूसरी छमाही में इजाफा हो सकता है जिससे राजकोषीय घाटा में भी वृद्धि होगी।