facebookmetapixel
पूर्व सेना प्रमुख नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों पर हंगामा, लोकसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगितबैंकिंग सुधार समिति की रूपरेखा जल्द, बीमा में 100% FDI को वैश्विक दिलचस्पी: एम नागराजूविनिवेश की रफ्तार से बनेगा राजस्व का रास्ता, बजट के बाद बोलीं निर्मला सीतारमणAir India के बोइंग 787 में ईंधन नियंत्रण स्विच में खामी, लंदन-बेंगलूरु उड़ान रोकी गईEditorial: संघीय संतुलन, राज्यों की हिस्सेदारी और राजकोषीय अनुशासन की कठिन कसौटीबजट 2026-27: कर प्रोत्साहन और सख्त राजकोषीय गणित ने विकास अनुमानों की परीक्षा लीबजट 2026-27: राजकोषीय मजबूती के आंकड़ों के पीछे की कहानी और बाकी बड़े सवालबजट में बढ़ी बाजार उधारी से बॉन्ड यील्ड ऊपर, डेट म्युचुअल फंड निवेशकों को रणनीति बदलने की जरूरतSTT बढ़ाकर ₹73,700 करोड़ जुटाने का लक्ष्य, लेकिन F&O वॉल्यूम घटने से अनुमान पर उठे सवालF&O पर बढ़ा STT: आर्बिट्राज फंडों के रिटर्न पर 30-50 आधार अंक का दबाव

GST कलेक्शन पर गर्मी का असर, जून में वृद्धि सिर्फ 7.7 फीसदी

विश्लेषकों ने कहा, यह हालांकि मंदी नहीं है लेकिन यह उपभोग में नरमी का संकेत देता है, जिस पर संभवत: लू के हालात का असर पड़ा, जो देश भर में मई के दौरान देखा गया था।

Last Updated- July 02, 2024 | 11:02 PM IST
GST

मई में उपभोग पर पड़े लू के असर से जून में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में एक अंक में यानी 7.7 फीसदी की वृद्धि हुई, साथ ही इस पर आधार वर्ष का भी प्रभाव पड़ा। विश्लेषकों का ऐसा मानना है।

जून में जीएसटी संग्रह (जो मई में हुए लेनदेन को प्रतिबिंबित करता है) 1.74 लाख करोड़ रुपये रहा और बिजनेस स्टैंडर्ड ने सोमवार को यह खबर दी थी। सालाना आधार पर यह वृद्धि कम रही क्योंकि अप्रैल व मई में इसमें क्रमश: 12.4 फीसदी व 10 फीसदी की वृद्धि हुई थी।

विश्लेषकों ने कहा, यह हालांकि मंदी नहीं है लेकिन यह उपभोग में नरमी का संकेत देता है, जिस पर संभवत: लू के हालात का असर पड़ा, जो देश भर में मई के दौरान देखा गया था।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, जीएसटी वृद्धि में नरमी की संभावित वजहों में से एक गर्मी का अस्थायी असर था और कुछ क्षेत्रों की गतिविधियां चुनाव के चलते प्रभावित हुई। इसके अतिरिक्त आधारभूत प्रभाव का भी जीएसटी संग्रह में नरमी में योगदान रहा होगा।

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर (उपभोक्ता उत्पाद) और लीडर (रिटेल सेक्टर) आनंद रामनाथन ने कहा, यह वैसे समय का संकेत दे रहा है जहां 7.7 फीसदी की वृद्धि को मंदी के तौर पर देखा जा रहा है। गर्मी के महीने में मौसम के कुछ अप्रत्याशित हालात थे, जहां गर्मी थोड़ी ज्यादा रही। इससे काफी हद तक उपभोग पर असर पड़ा क्योंकि लोग घरों से बाहर नहीं निकले।

एफएमसीजी कंपनियां जून की तिमाही में सुस्ती की खबरें दे सकती हैं, जिसकी वजह लू के हालात और उच्च खाद्य महंगाई के प्रभाव का बना रहना है।

(साथ में श्रीमी चौधरी)

First Published - July 2, 2024 | 11:02 PM IST

संबंधित पोस्ट