facebookmetapixel
Gold and Silver Price Today: सोना-चांदी में टूटे सारे रिकॉर्ड, सोने के भाव ₹1.59 लाख के पारSilver के बाद अब Copper की बारी? कमोडिटी मार्केट की अगली बड़ी कहानीAI विश्व शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे स्पेन के 80 विश्वविद्यालयों के रेक्टरभारत–कनाडा सहयोग को नई रफ्तार, शिक्षा और व्यापार पर बढ़ा फोकसIndia-EU trade deal: सीमित समझौते से नहीं मिल सकता पूरा लाभनागर विमानन मंत्री नायडू बोले: भारत अब उभरती नहीं, वैश्विक आर्थिक शक्ति हैजल्द लागू होगा DPDP ऐक्ट, बड़ी कंपनियों के लिए समय-सीमा घटाने की तैयारीनिर्यातकों की बजट में शुल्क ढांचे को ठीक करने की मांगबजट में सीमा शुल्क एसवीबी खत्म करने की मांगऑटो, ग्रीन एनर्जी से लॉजिस्टिक्स तक, दावोस में CM मोहन यादव ने बताया एमपी का पूरा प्लान

2022-23 में इकोनॉमी सात फीसदी से अधिक की दर से बढ़ेगी : पनगढ़िया

पनगढ़िया ने कहा कि मंदी की आशंका कुछ समय से बनी हुई है, लेकिन अभी तक कोई देश इसकी ‘चपेट’ में नहीं।

Last Updated- December 21, 2022 | 8:04 PM IST
arvind panagariya

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया का मानना है कि 2022-23 में भारतीय इकोनॉमी सात फीसदी से अधिक की दर से बढ़ेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यदि आगामी बजट में कुछ हैरान करने वाले ‘प्रतिकूल’ कदम नहीं उठाए जाते हैं, तो अगले वित्त वर्ष में भी यह वृद्धि दर बनी रहेगी।

पनगढ़िया ने बुधवार को पीटीआई-भाषा से कहा कि मंदी की आशंका कुछ समय से बनी हुई है, लेकिन अभी तक न तो अमेरिका और न ही यूरोपीय संघ मंदी की ‘चपेट’ में आए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘विदेशों में बन रही परिस्थितियों को भारत के नजरिये से देखा जाए, हम कह सकते हैं कि बुरा दौर पीछे छूट चुका है।’’ इस महीने की शुरुआत में रिजर्व बैंक ने 2022-23 के लिए भारत के वृद्धि दर के अनुमान को सात से घटाकर 6.8 फीसदी कर दिया था। वहीं विश्व बैंक ने अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि के अनुमान को संशोधित कर 6.9 फीसदी कर दिया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय इकोनॉमी वैश्विक झटकों के बीच ऊंची जुझारू क्षमता का प्रदर्शन कर रही है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ने कहा, ‘‘कुल मिलाकर मैं अब भी उम्मीद करता हूं कि हम चालू वित्त वर्ष में सात फीसदी से अधिक की वृद्धि दर हासिल करेंगे। यदि आगामी बजट में हैरान करने वाला कोई नकारात्मक पहलू नहीं रहता है, तो अगले वित्त वर्ष में भी यह वृद्धि दर बनी रहेगी।’’

पनगढ़िया ने कहा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत दर में की गई वृद्धि से पूंजी निकासी हुई है, जिससे रुपये पर काफी दबाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि नवंबर में शुद्ध सकारात्मक प्रवाह के साथ यह रुख पलट गया है। इसके साथ ही पनगढ़िया ने कहा कि कि यूरो और येन जैसी मुद्राओं के मुकाबले रुपये में मजबूती आई है, जो आने वाले वर्ष में निर्यात में कमजोरी का कारण बन सकता है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकरण से पहले भी रुपये का मूल्य अधिक था। वर्तमान में कोलंबिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर पनगढ़िया ने कहा, ‘‘इसलिए, मैं डॉलर के मुकाबले रुपये में और गिरावट के पक्ष में हूं।’’ बेरोजगारी पर एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि आवधिक श्रमबल सर्वे (PLFS) को देखते हुए उन्हें नहीं लगता कि बेरोजगारी दर अधिक है। यह परिवारों पर उपलब्ध सबसे विश्वसनीय सर्वे माना जाता है।

First Published - December 21, 2022 | 8:04 PM IST

संबंधित पोस्ट