facebookmetapixel
छत्तीसगढ़ के हर जिले में निवेश बढ़ा, रायपुर से परे औद्योगिक विकास का नया चेहरा: सायWEF में भारत को सराहा गया, टेक महिंद्रा सहित भारतीय कंपनियों का AI में वैश्विक स्तर पर जोरदार प्रदर्शनIndia Manufacturing Index 2026: भारत छठे पायदान पर, बुनियादी ढांचे और कर नीति में सुधार की जरूरतभारत-यूएई रिश्तों में नई छलांग, दोनों देशों ने 2032 तक 200 अरब डॉलर व्यापार का रखा लक्ष्यचांदी ने तोड़ा सारे रिकॉर्ड: MCX पर 5% उछाल के साथ ₹3 लाख प्रति किलो के पार, आगे और तेजी के संकेतदिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का तीसरा रनवे 16 फरवरी से पांच महीने बंद रहेगाQ3 नतीजों में सुस्ती: मुनाफा वृद्धि 17 तिमाहियों के निचले स्तर पर, आईटी और बैंकिंग सेक्टर दबाव में‘महंगे सौदों से दूरी, वैल्यू पर फोकस’, ITC के कार्यकारी निदेशक ने FMCG रणनीति पर खोले अपने पत्तेसबसे कम उम्र में BJP अध्यक्ष का पद संभालेंगे नितिन नवीन, पार्टी के शीर्ष पद के लिए एकमात्र उम्मीदवारJIO का IPO आने के बाद महंगे होंगे रिचार्ज, जुलाई से टेलीकॉम यूजर्स पर बढ़ने वाला है बोझ

बिहार सरकार ने अपने विभागों को घरेलू उत्पादों को प्राथमिकता देने को कहा

इस सरकारी कदम का स्वागत करते हुए बिहार वाणिज्य एवं उद्योग मंडल के अध्यक्ष पी के अग्रवाल ने सुझाव दिया कि नियमों एवं नीतियों का उचित क्रियान्यवन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी निकाय बनाया जाना चाहिए

Last Updated- March 11, 2023 | 2:34 PM IST
Nitish Kumar

घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयास के तहत बिहार सरकार ने अपने विभागों और निकायों को स्थानीय औद्योगिक इकाइयों द्वारा विनिर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।

सभी निगमों एवं स्वायत्त निकायों को भेजे परिपत्र में उद्योग विभाग ने उनसे सरकारी खरीदारी के दौरान राज्य की ‘खरीद वरीयता नीति-2002’ तथा ‘बिहार वित्त (संशोधन) नियमावली, 2005’ का कड़ाई से पालन करने को कहा है।

राज्य सरकार के सभी विभागों को अगले वित्त वर्ष से इन निर्देशों का पालन करना होगा।

राज्य के उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ ने ‘पीटीआई-भाषा’ कहा, ‘‘इस अधिसूचना से निश्चित ही घरेलू विनिर्माताओं एवं आपूर्तिकर्ताओं को बल मिलेगा। इससे रोजगार के अवसर एवं आय भी बढ़ेगी।’’

उन्होंने कहा कि बिहार में पंजीकृत बड़े एवं मझोले उद्योगों द्वारा विनिर्मित उत्पादों को राज्य के बाहर विनिर्मित उत्पादों की तुलना में दो प्रतिशत मूल्य वरीयता जाएगी।

उन्होंने कहा कि जहां तक छोटे उद्योगों की बात है तो मूल्य वरीयता सात प्रतिशत तक जा सकती है।

महासेठ ने कहा, ‘‘बिहार वित्त (संशोधन) नियमावली, 2005 के प्रावधानों के अनुसार गुणवत्ता एवं विशिष्ट मापदंडों के संदर्भ में कोई छूट नहीं दी जाएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल बिहार के बाहर से खरीदी गयी वस्तुओं की मात्रा, गुणवत्ता एवं मूल्य समेत उनके सारे ब्योरे सरकार को सौंपे जाए, ताकि राज्य में उनके उत्पादन का प्रयास किया जा सके।’’

इस सरकारी कदम का स्वागत करते हुए बिहार वाणिज्य एवं उद्योग मंडल के अध्यक्ष पी के अग्रवाल ने सुझाव दिया कि नियमों एवं नीतियों का उचित क्रियान्यवन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी निकाय बनाया जाना चाहिए।

 

First Published - March 11, 2023 | 2:34 PM IST

संबंधित पोस्ट