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यूपीआई से 3.55 अरब लेनदेन

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Last Updated- December 12, 2022 | 1:25 AM IST

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के अग्रणी भुगतान प्लेटफॉर्म यूनिफाइड पेमेंट्ïस इंटरफेस (यूपीआई) ने अगस्त महीने में 3 अरब से अधिक लेनदेन दर्ज किए। यूपीआई के जरिये होने वाले लेनदेन ने लगातार दूसरे महीने 3 अरब का आंकड़ा पार किया है जिससे महामारी के दौरान उपभोक्ताओं द्वारा डिजिटल भुगतान को तेजी से अपनाने के संकेत मिलते हैं।
अगस्त महीने में यूपीआई के माध्यम से 3.55 अरब लेनदेन किए गए जो कि इस प्लेटफॉर्म के शुरू होने के बाद से लेनदेन की संख्या के लिहाज से यह अब तक का सर्वकालिक उच्च स्तर है। मूल्य के लिहाज से अगस्त में इसके माध्यम से 6.39 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए। यह भी अपने आप में एक रिकॉर्ड है। महीने दर महीने के आधार पर अगस्त में यूपीआई से होने वाले लेनदेन की संख्या 9.5 फीसदी अधिक रही और लेनदेन का मूल्य 5.4 फीसदी अधिक रहा।       

जुलाई में यूपीआई के जरिये 3.24 अरब लेनदेन हुए थे जो कि जून में हुए 2.8 अरब लेनदेन के मुकाबले 15.7 फीसदी अधिक था। मूल्य के लिहाज से जुलाई में प्लेटफॉर्म के माध्यम से 6.06 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए जो जून के मुकाबले 10.76 फीसदी अधिक था।
यूपीआई को 2016 में लॉन्च किया गया था और अक्टूबर 2019 में पहली बार इसके जरिये होने वाले लेनदेन की संख्या 1 अरब के पार गई थी। उसके एक साल बाद अक्टूबर 2020 में इसके माध्यम से होने वाले लेनदेन की संख्या 2 अरब के पार हो गई। इस प्रकार 1 अरब से 2 अरब लेनदेन पर पहुंचने में यूपीआई को महज एक वर्ष का समय लगा। इसके बाद हर महीने 2 अरब लेनदेन से बढ़कर 3 अरब लेनदेन पर पहुंचने में महज 10 महीने का ही वक्त लगा जिससे उपभोक्ताओं के बीच खुदरा डिजिटल भुगतान के लिए यूपीआई को अविश्वसनीय लोकप्रियता हासिल होने के संकेत मिलते हैं।

इस भुगतान प्लेटफॉर्म पर अप्रैल और मई महीने में लेनदेन की संख्या में मामूली गिरावट आई थी जो कि कोविड महामारी की दूसरी लहर आने के कारण आर्थिक गतिविधि में आई कमी के अनुरूप था लेकिन जैसे ही अर्थव्यवस्था ने जोर पकड़ा इसमें सुधार हो गया।  
वित्त वर्ष 2021 में आरटीजीएस को छोड़कर समग्र खुदरा भुगतानों में यूपीआई की हिस्सेदारी 10 फीसदी रही थी। यूपीआई ने वित्त वर्ष 2017 से वित्त वर्ष 2021 के बीच 400 फीसदी की सालाना चक्रवृद्घि दर (सीएजीआर) से वृद्घि दर्ज की है। कुछ वर्ष पहले तक समग्र खुदरा भुगतान में यूपीआई की हिस्सेदारी केवल 2 फीसदी थी। यूपीआई की इस अप्रत्याशित वृद्घि के लिए इसके पारस्परिकता, ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म, उपयोग करने में आसानी और शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट जैसे गुणों को अहम माना जा रहा है।

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First Published - September 1, 2021 | 8:50 PM IST

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