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Steel Sector को लेकर आई बड़ी रिपोर्ट, बता दिया क्या होगा भविष्य

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जनवरी-अप्रैल 2025 में भारत का इस्पात आयात पिछले साल की तुलना में 21 प्रतिशत घटकर 28.5 लाख टन रह गया।

Last Updated- June 02, 2025 | 12:00 AM IST
Steel

हाल में आयात पर लगाए गए सुरक्षा शुल्क और इस्पात के बेहतर स्प्रेड (खरीद और बिक्री मूल्य का अंतर) की बदौलत भारतीय इस्पात निर्माता इस वित्त वर्ष में दमदार वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि चीन अब भी खेल की दिशा बदल सकता है। सरकार के अस्थायी सुरक्षा शुल्क लगाने से पहले ही इस्पात का आयात कम होने लगा था। यह कदम घरेलू उत्पादकों को सस्ते आयात की बाढ़ से बचाने के उद्देश्य से उठाया था।

मूल्य की सूचना और बाजार की जानकारी देने वाली कंपनी बिगमिंट के आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी-अप्रैल 2025 में भारत का इस्पात आयात पिछले साल की तुलना में 21 प्रतिशत घटकर 28.5 लाख टन रह गया। पिछले वर्ष की इसी अवधि में चीन से आयात 11.1 लाख टन था जो जनवरी-अप्रैल 2025 के दौरान घटकर 5 लाख टन रह गया।

इसका असर इस्पात की कीमतों पर भी दिखा। हॉट रोल्ड कॉइल (एचआरसी) का मासिक औसत दिसंबर में 46,878 रुपये प्रति टन से बढ़कर अप्रैल में 52,033 रुपये प्रति टन हो गया। मई 2025 में यह इसी स्तर पर था जबकि मई 2024 में औसत दाम प्रति टन 54,100 रुपये थे।  सुरक्षा उपायों के बाद इस्पात की कीमतों में उतनी वृद्धि नहीं हुई है, जितनी उम्मीद थी।

आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएम/एनएस इंडिया) के निदेशक और उपाध्यक्ष (बिक्री और विपणन) रंजन दर ने कहा, ‘चीनी इस्पात की कीमतों को लेकर चिंताएं हैं जिनमें गिरावट का रुख है। इसके अलावा वह दुनिया के बाकी हिस्सों में लगातार वॉल्यूम बढ़ा रहा है।’ अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ऐलान किया था कि वह इस्पात और एल्युमीनियम पर टैरिफ को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करेंगे।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने वित्त वर्ष 25 में अमेरिका को 4.56 अरब डॉलर मूल्य के लौह, इस्पात और एल्युमीनियम उत्पादों का निर्यात किया और मुख्य श्रेणियों – लौहे और इस्पात में 58.75 करोड़ डॉलर का निर्यात, लौहे और इस्पात की वस्तुओं में 3.1 अरब डॉलर का का निर्यात तथा एल्युमीनियम और संबंधित वस्तुओं का 86 करोड़ डॉलर का निर्यात शामिल है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इन निर्यातों पर अब तेजी से बढ़ते अमेरिकी शुल्क का खतरा मंडरा रहा है जिससे भारतीय उत्पादकों और निर्यातकों का लाभ खतरे में है।’ दर ने कहा कि भारतीय कार्बन इस्पात पर इसका सीधा कोई असर नहीं पड़ेगा जिस पर पहले से ही डंपिंग रोधी शुल्क (एडीडी), जवाबी शुल्क (सीवीडी) और सेक्शन 232 लागू है।’   

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First Published - June 1, 2025 | 10:57 PM IST

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