facebookmetapixel
Advertisement
ऑटो सेक्टर को PLI स्कीम के तहत FY27 में ₹4,700 करोड़ देगी सरकार, निवेश बढ़ाने की तैयारी तेजटाटा कैपिटल का रिवॉल्विंग क्रेडिट एक्सपोजर 5% से कम, RBI के नए प्रस्ताव से कंपनी पर पड़ेगा सीमित असररूस से तेल खरीद पर 100% अमेरिकी टैरिफ की धमकी, भारत-अमेरिका वार्ता में बढ़ सकता है दबाव‘ग्रामीण भारत तक पहुंचे बैंकिंग AI, तभी असली सफलता होगी हासिल’, SBI चेयरमैन सीएस शेट्टी की सलाहपांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट तेज, भाजपा-सपा-कांग्रेस-बसपा समेत दलों ने कसी कमरBrand Canvas 2026: VIT की ‘पावर रेंजर्स’ ने जीता बीस्मार्ट की पहली विज्ञापन प्रतियोगिता का खिताबY2K से AI के दौर तक: 1991 के आर्थिक सुधारों ने कैसे बदल डाली भारतीय IT इंडस्ट्री की पूरी तस्वीरअमेरिका में क्रिप्टो बिल से भारत पर बढ़ा दबाव, ससंदीय समिति ने VDA कानून बनाने की मांग कीनई मर्सिडीज-BMW हुई मंहगी तो पुरानी लक्जरी कारों की बिक्री में आया उछाल, युवा खरीदारों की बनी पसंद‘जिम्मेदारी से करें AI का इस्तेमाल, हर फैसले के लिए आप होंगे जवाबदेह’, RBI गवर्नर ने दी बैंकों को हिदायत

फ्रैंकलिन पर बढ़ी जांच की आंच

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 7:32 AM IST

पिछले साल अप्रैल में छह योजनाएं बंद करने वाली फ्रैंकलिन टेंपलटन म्युचुअल फंड भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जांच दायरे में आ गई है।
सूत्रों ने कहा कि बाजार नियामक ने फंड हाउस और योजनाएं बंद करने से कुछ दिन या हफ्ते पहले अपना निवेश निकालने वाले इसके प्रमुख अधिकारियों  को कारण बताओ नोटिस और समन जारी किया है। इस बीच ईडी ने फंड हाउस और आठ अन्य के खिलाफ धनशोधन का मामला दर्ज किया है।
सूत्रों ने कहा, ‘फंड हाउस के खातों की जांच में कंपनी से जुड़े कई लोगों द्वारा अपना निवेश भुनाए जाने (करीब 50 करोड़ रुपये) का पता चलने के बाद सेबी ने धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार नियमन के कथित उल्लंघन को लेकर न्यायिक कार्रवाई शुरू की है। अगले कुछ हफ्तों में इसके कुछ अधिकारी सेबी के समक्ष पेश होंगे।’
इस बारे में जानकारी के लिए सेबी को ईमेल भेजा गया लेकिन कोई जवाब नहीं आया। फ्रैंकलिन टेंपलटन के प्रवक्ता ने कहा, ‘बंद होने वाली योजनाओं में फ्रैंकलिन टेंपलटन के कर्मचारियों और प्रबंधन का अभी भी काफी निवेश है। यूनिट धारकों द्वारा निवेश भुनाए जाने के लिए 23 अप्रैल, 2020 तक जमा कराए गए सभी आवेदनों को सामान्य प्रक्रिया के तहत निपटाया गया था। योजनाओं को बंद करने के सैद्घांतिक निर्णय लिए जाने के बाद किसी भी विशेष व्यक्ति के यूनिट को नहीं भुनाया गया था। हमने सेबी के कारण बताओ नोटिस पर विस्तार से जवाब भेजा है।’
इस बीच ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘कई ऐसे मामले देखे गए हैं जहां संवदेनशील जानकारी रखने वाले प्रबंधन स्तर के अधिकारियों ने अपना निवेश भुनाया है। हम इससे जुड़ी और जानकारी जुटा रहे हैं ताकि पैसे के हेरफेर का पता लगाया जा सके।’
ईडी की जांच रिपोर्ट में शीर्ष प्रबंधन के कुछ अधिकारियों के नाम हैं। इनमें फ्रैंकलिन के अध्यक्ष संजय सप्रे, मुख्य कार्याधिकारी जयराम अय्यर और एपीएसी वितरण के प्रमुख विवेक कुड़वा के नाम शामिल हैं। धनशोधन निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत नामजद अधिकारियों में राधाकृष्णन वेंकट, प्रदीप पन्नालाल शाह, तब्बसुम अब्दुल्ला और संतोष दास कामत शामिल हैं। फंड हाउस ने जिन छह योजनाओं को बंद किया था उसमें करीब तीन लाख निवेशकों के करीब 25,000 करोड़ रुपये लगे थे।
फ्रैंकलिन के प्रवक्ता ने आगे कहा, ‘हमारा ध्यान जल्द से जल्द निवेशकों का पैसा लौटाने की है और इसके लिए एसबीआई फंड मैनेजमेंट के साथ सहयोग किया जा रहा है। 9,122 करोड़ रुपये निवेशकों को वितरित किए जा चुके हैं और 26 फरवरी, 2021 को 1,180 करोड़ रुपये और मिल जाएंगे।’
ईडी और सेबी के सूत्रों ने कहा कि इस बात की जांच की जा रही है कि फंड हाउस किस वजह से संकट में फंसा। ईडी की शुरुआती जांच में पता चला कि फंड हाउस में पुट ऑप्शन का उपयोग नहीं किया गया। हालांकि पहले भी कई कंपनियों द्वारा पुट ऑप्शन का उपयोग नहीं करने के उदाहरण मौजूद हैं।

Advertisement
First Published - March 3, 2021 | 11:34 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement