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भारतीय उद्योग जगत का कर्ज बढ़ा

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Last Updated- December 15, 2022 | 4:53 AM IST

वित्तीय जरूरतें पूरी करने के लिए ऋण पर भारतीय उद्योग की निर्भरता वित्त वर्ष 2019-20 में भी बरकरार रही। बीएसई-500 में शामिल कंपनियों (बैंकिंग और वित्तीय सेवा कंपनियों को छोड़कर) ने अपने ऋणों में सालाना आधार पर 3.7 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया। शेष 307 बीएसई-500 कंपनियों की संयुक्त उधारी इस साल मार्च के अंत में 23.35 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो सितंबर 2019 में 22.7 लाख करोड़ रुपये और मार्च 2019 में 22.5 लाख करोड़ रुपये थी।

बुधवार को जाने-माने बैंकर के वी कामत ने कहा कि प्रमुख भारतीय कंपनियों ने कर्ज घटाने में जितनी दिलचस्पी मौजूदा समय में दिखाई है, उतनी पहले कभी नहीं दिखाई थी। हालांकि आंकड़ों से पता चलता है कि यह दिलचस्पी कुछ ही कंपनियों के लिए सीमित है, जबकि बड़ी तादाद में कंपनियां अभी भी कर्ज के जाल में फंसी हुई हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जियो प्लेटफॉम्र्स और दूरसंचार एवं फाइबर परिसंपत्ति इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्टों में हिस्सेदारी बेचकर पूंजी जुटाई है और इसे देश में कर्ज घटाने की सबसे बड़ी कोशिश माना गया है। कंपनी इस रकम का इस्तेमाल चालू वित्त वर्ष में बैंकों को भुगतान में करेगी।

नकदी और बैंक बैलेंस के समायोजन के साथ कुल कर्ज मार्च 2020 के अंत में बढ़कर 19.1 लाख करोड़ रुपये हो गया जो एक साल पहले 18.73 लाख करोड़ रुपये और सितंबर 2019 के अंत में 18.65 लाख करोड़ रुपये था।

ऊंची उधारियों पर कंपनियों के सकल-ऋण-पूंजी अनुपात में भी तेजी दर्ज की गई थी, जबकि  पिछले वित्त वर्ष में कई कंपनियों के लिए मुनाफे में गिरावट आई थी।

संयुक्त शुद्घ लाभ सालाना आधार पर 41.6 प्रतिशत घटकर 1.09 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि शुद्घ बिक्री 8.4 प्रतिशत घटकर वित्त वर्ष 2020 में 29 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई।

यह विश्लेषण गैर-लेखा छमाही बैलेंस शीट और पिछली 13 तिमाहियों (मार्च 2014 से) के लिए बीएसई-500 सूचकांक कंपनियों के लाभ-नुकसान खाते पर आधारित है। विश्लेषण के नमूने में बैंकों, गैर-बैंकिंग ऋणदाताओं, बीमा कंपनियों और स्टॉक ब्रोकरों को शामिल नहीं किया गया है।

इक्विनोमिक्स रिसर्च ऐंड एडवायजरी सर्विसेज के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि कॉरपोरेट डीलेवरेजिंग यानी कर्ज घटाने में बड़े स्तर पर सफलता मिली है। बैंक ऋण और कंपनियों द्वारा बाह्य वाणिज्यिक उधारी लगातार बढ़ी है।’ हालांकि उनका कहना है कि कुछ खास कंपनियां या क्षेत्र हैं जिन्होंने हाल के वर्षों में अपनी बैलेंस शीट को कर्ज मुक्त बनाने में काफी हद तक सफलता हासिल की है।

हालांकि अन्य विश्लेषकों का कहना है कि कॉरपोरेट भारत में कुल रुझान यह संकेत देता है कि कर्ज घटाने के प्रयास बरकरार हैं, लेकिन पिछली कुछ तिमाहियों में मुनाफे में कमजोरी की वजह से इसकी प्रक्रिया धीमी है।

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First Published - July 14, 2020 | 10:54 PM IST

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