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वोडाफोन आइडिया की बढ़ीं मुश्किलें, AGR पर और नहीं मिलेगी राहत; सरकार ने किया इनकार

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सरकार वोडाफोन आइडिया को एजीआर बकाया पर और राहत देने को तैयार नहीं है, जिससे कंपनी की वित्तीय स्थिति सुधारने की उम्मीदें अब कमजोर होती जा रही हैं।

Last Updated- July 06, 2025 | 11:25 PM IST
Vodafone idea
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

वोडाफोन आइडिया (वी) को सरकार से आगे और राहत मिलने की उम्मीद कम ही है। सरकार वित्त वर्ष 2026 से बकाया समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के लिए भुगतान अवधि बढ़ाने या शर्तों में ढील देने के मामले में और राहत देने की इच्छुक नहीं लग रही है। 

मामले के जानकार अधिकारियों ने कहा कि दूरसंचार ऑपरेटर के साथ बातचीत जारी है लेकिन आगे वित्तीय छूट मिलना कठिन होता जा रहा है क्योंकि सरकार बकाया राशि को इक्विटी में बदलने के लिए और अधिक इक्विटी लेने को तैयार नहीं है। सरकार कंपनी पर 84,000 करोड़ रुपये की बकाया एजीआर राशि को कम नहीं कर सकती है।

नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘सरकार कंपनी में पहले ही इक्विटी ले चुकी है। विचार यह था कि कंपनी को ऋण स्थगन अवधि के दौरान पटरी पर लौटने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। इसे 4 साल हो चुके हैं लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिला है।’

एक अन्य अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने शर्त पर कहा कि यदि भुगतान अवधि को बढ़ाया जाता है तो उसके लिए नीतिगत स्तर पर बदलाव करना होगा जिससे भारती एयरटेल सहित सभी के लिए विकल्प उपलब्ध हो जाएंगे। एयरटेल भी अपने कुछ बकाये को वोडा आइडिया की तरह इक्विटी में बदले की मांग कर रही है। 

एजीआर बकाया या भुगतान शर्तों पर वित्तीय राहत प्रदान करने के संबंध में सरकार ने कोई आश्वासन दिया है या नहीं, इस पर वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल को भेजे गए सवालों का खबर लिखने तक जवाब नहीं मिला था। दूरसंचार विभाग ने भी  जवाब नहीं दिया।

चर्चा थी कि सरकार वोडाफोन आइडिया के एजीआर मद में लगभग 84,000 करोड़ रुपये के बकाया पर राहत प्रदान करने के तरीकों पर विचार कर रही है। इसके तहत भुगतान अवधि को छह साल से बढ़ाकर 20 साल किया जा सकता है या सरकार द्वारा एजीआर मुद्दे पर व्यापक निर्णय लिए जाने तक आंशिक भुगतान करने को कहा जा सकता है। वोडाफोन आइडिया ने पिछले हफ्ते स्पष्ट किया था कि उसे आगे वित्तीय राहत पर सरकार से कोई जानकारी नहीं मिली है। 

25 जून को बंबई स्टॉक एक्सचेंज को दिए बयान में वोडाफोन आइडिया ने कहा था, ‘हमें उपरोक्त रिपोर्ट किए गए मामले के संबंध में सरकार से कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।’

वोडाफोन आइडिया के मुख्य कार्याधिकारी अक्षय मूंदड़ा ने 2 जून को कंपनी के नतीजों की घोषणा के समय कहा था कि मई में सर्वोच्च न्यायालय ने दूरसंचार कंपनियों के एजीआर बकाये के हिस्से को माफ करने की समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया था। उसके बाद कंपनी राहत के लिए सरकार के साथ बातचीत कर रही है। 

बीते महीने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि सरकार का दूरसंचार कंपनी में अपनी इक्विटी और बढ़ाने का इरादा नहीं है। उन्होंने यह नहीं बताया कि सरकार किसी अन्य प्रकार की राहत के बारे में सोच रही है या नहीं।

वोडाफोन आइडिया ने 2021 से पहले नीलामी में खरीदे गए स्पेक्ट्रम और  एजीआर बकाया पर अपने देय ब्याज को इक्विटी में बदलने का विकल्प चुना जिसकी कुल राशि 36,950 करोड़ रुपये थी। सरकार ने कुछ बकाये को इक्विटी में बदलने का निर्णय किया और कंपनी में 49 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी शेयरधारक बन गई।

शर्तों के अनुसार वोडाफोन आइडिया को मार्च 2026 से मार्च 2031 तक सालाना भुगतान करना  होगा और पहला भुगतान 18,000 करोड़ रुपये से अधिक होगा।

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First Published - July 6, 2025 | 10:45 PM IST

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