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सैटेलाइट ऑपरेटरों पर नया 4% शुल्क, सरकार को मिलेगी बढ़ी हुई आय; TRAI की सिफारिश

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नियामक ने यह भी कहा है कि इन ऑपरेटरों के लिए स्पेक्ट्रम 5 साल के लिए आवंटित किया जाना चाहिए तथा इसे दो साल के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। 

Last Updated- May 09, 2025 | 11:02 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

उपग्रह (सैटेलाइट) संचार ऑपरेटरों को भारत में सेवाएं देने के लिए स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के तौर पर सरकार को अपने सालाना समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का 4 फीसदी भुगतान करना होगा। भारतीय दूरसंचार नियामक प्रा​धिकरण (ट्राई) ने इसकी सिफारिश की है। नियामक ने यह भी कहा है कि इन ऑपरेटरों के लिए स्पेक्ट्रम 5 साल के लिए आवंटित किया जाना चाहिए तथा इसे दो साल के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। 

गैर-भूस्थिर उपग्रह कक्षा (एनजीएसओ) और भूस्थिर उपग्रह कक्षा (जीएसओ) आधारित फिक्स्ड सैटेलाइट सेवा (एफएसएस) और मोबाइल सैटेलाइट सेवा (एमएसएस) दोनों के लिए ऑपरेटरों की खातिर मूल्य निर्धारण का फॉर्मूला एक जैसा रखा गया है। हालांकि नियामक ने कहा कि जीएसओ और एनजीएसओ दोनों के लिए न्यूनतम वार्षिक स्पेक्ट्रम शुल्क 3,500 रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज होगा। एनजीएसओ के लिए ट्राई ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले सेवा प्रदाताओं को प्रति ग्राहक 500 रुपये अतिरिक्त शुल्क देना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं के लिए इन कंपनियों को अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।  

ट्राई के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के अलावा ऑपरेटरों से 8 फीसदी लाइसेंस शुल्क भी वसूला जाएगा। ट्राई ने सिफारिश की है कि ऑपरेटरों से सैटेलाइट स्पेक्ट्रम तक पहुंच के लिए अलग से कोई शुल्क न लिया जाए, जैसा कि स्थलीय स्पेक्ट्रम के लिए नीलामी आयोजित करने का नियम है। लाहोटी ने इसका बचाव करते हुए तर्क दिया कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम एक संयुक्त संसाधन है और वैश्विक स्तर पर इस तरह के स्पेक्ट्रम की कीमत इसी प्रकार तय की जाती है।

एनजीएसओ का मतलब निम्न-पृथ्वी कक्षा (एलईओ) या मध्यम-पृथ्वी कक्षा (एमईओ) में स्थित उपग्रह होते हैं। भूस्थिर जीएसओ उपग्रहों के विपरीत एलईओ और एमईओ उपग्रह स्थिर स्थिति में नहीं रहते हैं बल्कि पृथ्वी के सापेक्ष गति करते हैं।

समायोजित सकल राजस्व का उपयोग आय की गणना करने के लिए किया जाता है जिसे दूरसंचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क और लाइसेंस शुल्क के रूप में सरकार के साथ साझा करना होता है। 

सिफारिशों में कहा गया है कि सरलीकरण और व्यापार करने में आसानी के लिए स्पेक्ट्रम शुल्क एजीआर के प्रतिशत के रूप में लगाया जाना चाहिए।ट्राई ने अपनी सिफारिशों में कहा है, ‘समग्र स्पेक्ट्रम शुल्क, स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिए आवश्यक प्रशासनिक लागत से अधिक नहीं होना चाहिए। इससे निवेश और नवोन्मेष को भी बढ़ावा मिलेगा।’

सिफारिशों में इस बात पर जोर दिया गया है कि प्रत्येक अधिकृत इकाई को सद्भावनापूर्वक आपस में समन्वय करना चाहिए। ट्राई की सिफारिशों ने भारत में सैटकॉम सेवाओं के लिए एक और बाधा को दूर कर दिया है। एयरटेल की सहयोगी यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशन को पहले ही भारत में सैटकॉम सेवाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (जीएमपीसीएस) सेवा लाइसेंस मिल चुका है जबकि ईलॉन मस्क के नेतृत्व वाली स्टारलिंक को इस सप्ताह की शुरुआत में दूरसंचार विभाग से मंजूरी मिली है।

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First Published - May 9, 2025 | 10:44 PM IST

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