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दूरसंचार कंपनियां 6G बैंड के प्रशासनिक आवंटन के खिलाफ

Last Updated- January 08, 2023 | 11:19 PM IST
Telecom

दूरसंचार सेवा प्रदाता (टीएसपी) सरकार द्वारा 6G को उपयोग के लिए खोले जाने पर किसी भी 6G बैंड के प्रशासनिक आवंटन के लिए विरोध जता रहे हैं। मीडिया की हालिया रिपोर्टों में कहा गया है कि दूरसंचार विभाग 95 गीगाहर्ट्ज से लेकर तीन टेराहर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी रेंज में मुक्त आवंटन के लिए स्पेक्ट्रम खोले जाने के संबंध में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के विचार जानने का इच्छुक है। इससे 6G संचालित उत्पादों और समाधानों जैसी नई प्रौद्योगिकी विकसित करने में मदद मिलेगी।

लेकिन दूरसंचार सेवा प्रदाताओं का मानना है कि यह और अन्य प्रमुख 6G बैंड की नीलामी की जानी चाहिए, जैसा कि पहले किया गया था। उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि निकट भविष्य में यह उनकी अपनी 6G अपग्रेडेशन योजनाओं के विकास का अभिन्न अंग होगा।

उद्योग के एक अधिकारी ने कहा कि हालांकि 6G प्रौद्योगिकी 5G वाले बुनियादी ढांचे पर ही आधारित होने की उम्मीद है, लेकिन इसके बावजूद यह अत्यधिक तीव्र रफ्तार की इंटरनेट कनेक्टिविटी में और बड़ी उछाल प्रदान करेगा। 6G के संबंध में उपयोग वाले मामले 5G के समान ही होंगे। वे स्वास्थ्य देखभाल, लॉजिस्टिक्स या प्रक्रिया स्वचालन अथवा विनिर्माण में सहयोगी रोबोटिक्स होंगे।

उन्होंने कहा कि हालांकि व्यापक रूप से यह माना जाता है कि 5G की तुलना में 6G अपनाने की गति कहीं अधिक तेज रहेगी क्योंकि उपयोगकर्ता प्रौद्योगिकी के साथ ज्यादा सहज होंगे। दूरसंचार कंपनियां इस प्रक्रिया से बाहर नहीं निकलना चाहतीं हैं।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि सभी दूरसंचार कंपनियां जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी 6G बैंड तक पहुंच हासिल करना पसंद करेंगी ताकि शुरुआती प्रयोग आरंभ हो सके। 5G कवरेज के बेहतरीन स्तर तक पहुंचने से पहले ही कंपनियों को 6G परीक्षणों की तैयारी शुरू करने और उन्हें लागू करने की स्थिति में होना चाहिए। लेकिन कोई सामान्य प्रशासनिक आवंटन उचित नहीं होगा।

रिपोर्टों में कहा गया था कि इस कदम से शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और उद्योग को वायु तरंगों को हासिल करने की अनुमति मिल सकती है। वे पूर्व-मानकीकृत प्रक्रिया के साथ अध्ययन कर सकते हैं। हाल के दिनों में दूरसंचार कंपनियों ने निजी 5G नेटवर्क के लिए स्पेक्ट्रम के प्रशासनिक आवंटन की अनुमति देने वाले किसी भी कदम के खिलाफ अपने प्रयास तेज कर दिए हैं।

यह भी पढ़ें: श्रेय फर्मों के लिए वर्दे-एरिना के नए प्रस्ताव नहीं होंगे मंजूर

सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने इस बात पर जोर दिया है कि यह मौलिक रूप से समान अवसर प्रदान करने वाले सिद्धांतों के खिलाफ होगा। इसने कहा है कि यह भारत में उद्यमों को 5Gजी सेवाएं और समाधान प्रदान करने के लिए बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों को पिछले दरवाजे से प्रवेश का मौका प्रदान करता है। यह समान नियामकीय अनुपालन और दूरसंचार सेवा प्रदाता के अधीन शुल्क भुगतान के बिना होता है। इसने इस तरह के निजी नेटवर्क के दायरे को केवल मशीन-टु-मशीन (एम2एम) संचार और किसी संयंत्र के परिसर के भीतर प्लांट ऑटोमेशन तक सीमित करने की भी मांग की।

6G पर जोर

अधिकारियों ने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के तहत भारत इस दशक के अंत तक 6G नेटवर्क शुरू करने का लक्ष्य बना रहा है। 6G जिस तरह से उपग्रह संचार और भू-नेटवर्क के लिए एक संयोजक मंच के रूप में काम करने की उम्मीद है, इस बात के मद्देनजर दूरसंचार विभाग ने कहा कि भारत 6G मानकों की स्थापना में भाग लेने और तकनीकी नवोन्मेष आगे बढ़ाने का लक्ष्य बना रहा है।

नवंबर 2021 में सरकार ने भारत में 6G की कार्ययोजना के लिए एक परिदृश्य निर्मित करने के लिए दूरसंचार सचिव के राजारमन की अध्यक्षता में 22 सदस्यों वाले नवोन्मेष समूह का गठन किया था।

First Published - January 8, 2023 | 8:15 PM IST

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