facebookmetapixel
Advertisement
भाजपा शासित राज्य भी कर रहे नई मनरेगा का विरोध: कांग्रेसमन की बात: पीएम मोदी ने गिनाईं आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धियां, C-295 विमान और स्वदेशी क्रूज मिसाइल का किया उल्लेखभारत-सेशेल्स के बीच 19 समझौते, हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा साझेदारी को मिली मजबूतीITR Filing 2026: रिटर्न से पहले लेंगे सभी कागज जांच तो नहीं आएगी आयकर नोटिस की आंचEditorial: QCO नियमों में ढील पर्याप्त नहीं, गुणवत्ता ढांचे की व्यापक समीक्षा जरूरीMission SEHAT: पोषण सुरक्षा के लिए कृषि और स्वास्थ्य को जोड़ेगी नई पहल‘कॉमिक्स’ पत्रकारिता से यह कैसा डर? जो सैको की किताब हटाना ‘प्रकाशन जगत का मजाक’बाजार हलचल: मुंबई में वेदर डेरिवेटिव की नैया, ग्रे बाजार दे रहा सतर्कता का संकेतSIP का बढ़ता दम: ऐक्टिव इक्विटी म्युचुअल फंड AUM में हिस्सेदारी पहली बार 40% के पारVarun Beverages Share: असाही के साथ करार से बढ़ेगा बिजनेस, ब्रोकरेज ने जताई तेजी की उम्मीद

टीसीएस ने मिस्त्री को हटाने के लिए बोर्ड बैठक नहीं बुलाई

Advertisement
Last Updated- December 15, 2022 | 4:06 AM IST

सर्वोच्च न्यायालय को दिए अपने हलफनामे में मिस्त्री की कंपनियों ने कहा है कि टाटा संस की सूचीबद्घ सहायक इकाई टीसीएस के बोर्ड ने साइरस मिस्त्री को हटाने के लिए बोर्ड बैठक आयोजित नहीं की थी, बल्कि वह ऐसा करने के लिए टाटा संस के एक अधिकारी के निर्देश पर निर्भर रहा।
टीसीएस हालांकि मिस्त्री बनाम टाटा मामले के लिए पक्ष नहीं थी, लेकिन एनसीएलएटी के आदेश से परेशान होने का दावा करते हुए इस सॉफ्टवेयर निर्यातक ने सर्वोच्च न्यायालय में अनुरोध दर्ज कराया। इस तरह से टीसीएस का बोर्ड अब विभिन्न अनियमितताओं (पहले टीसीएस के चेयरमैन और फिर निदेशक के तौर पर मिस्त्री को हटाने) के लिए सर्वोच्च न्यायालय में जवाबदेह बन गया है।
दिसंबर 2019 में, जहां टाटा-मिस्त्री की कानूनी लड़ाई पर फैसला सुनाते हुए एनसीएलएटी ने मिस्त्री को टीसीएस के निदेशक के तौर पर बहाल किया था, वहीं टीसीएस इस आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में पहुंच गई थी।

Advertisement
First Published - July 29, 2020 | 11:53 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement