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आईपीओ की तैयारी कर रहे स्टार्टअप्स ने सेबी से मांगी संस्थापकों को ESOP देने की छूट

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कई स्टार्टअप्स ने कहा कि फंडिंग से हिस्सेदारी घटने के बाद संस्थापकों को प्रोत्साहन देने के लिए ESOP ज़रूरी है, सेबी से लिस्टिंग के बाद ESOP देने की इजाज़त मांगी गई

Last Updated- May 08, 2025 | 11:37 PM IST
Startup

प्री-आईपीओ यानी आईपीओ की तैयारी कर रहे स्टार्टअप (जिनमें संस्थापक हिस्सेदारी काफी घट गई है) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से संस्थापकों के लिए ईसॉप जारी करने में स्वायत्तता दिए जाने का अनुरोध कर रहे हैं।

मामले से अवगत लोगों ने बताया कि आईपीओ की योजना बना रहे एक फिनटेक स्टार्टअप ने अप्रैल में सेबी को पत्र लिखकर संस्थापकों को ईसॉप जारी करने में छूट मांगी थी, विशेष रूप से लिस्टिंग के बाद जारी करने के लिए। \

मौजूदा समय में सेबी के नियमों में प्रमोटरों को ईसॉप जारी करने पर रोक है। हालांकि, हाल में एक प्रस्ताव में, नियामक ने संस्थापकों (प्रमोटरों या प्रमोटर समूह के भाग के रूप में वर्गीकृत) को मसौदा आईपीओ दस्तावेज दाखिल करने से एक वर्ष पहले तक दिए गए ईसॉप लाभ को बनाए रखने या इस्तेमाल करने की अनुमति देने का सुझाव दिया है।

हालांकि, गैर-सूचीबद्ध होने पर स्टार्टअप्स को ईसॉप्स पर कुछ छूट प्राप्त है, लेकिन अधिकांश मामलों में, संस्थापकों को कंपनी में उनके नियंत्रण और अधिकारों को ध्यान में रखते हुए आईपीओ के लिए मसौदा दस्तावेज दाखिल करने से पहले ‘प्रमोटर्स’ के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि कई फंडिंग राउंड से अक्सर संस्थापक की हिस्सेदारी घटकर न्यूनतम स्तरों पर रह जाती है, जिस वजह से कंपनी के विकास को ध्यान में रखते हुए उनके लिए ईसॉप जरूरी विकल्प बन गया है।
इंडसलॉ में पार्टनर कौशिक मुखर्जी ने कहा, ‘संस्थापकों के लिए प्री-आईपीओ ईसॉप्स की अनुमति देना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन लिस्टिंग के बाद प्रोत्साहन पर भी विचार किया जाना चाहिए।

संस्थापक व्यवसाय को आगे बढ़ाते हैं और उनकी निरंतर प्रेरणा शेयरधारकों और कंपनी, दोनों के लिए मददगार होती है।’सूत्रों ने बताया कि आईपीओ की योजना बना रहे फिनटेक स्टार्टअप ने हाल में संस्थापकों को लिस्टिंग के बाद ईसॉप जारी करने में छूट के लिए सेबी के समक्ष याचिका दायर की है।

हालांकि विश्लेषक इसे लेकर आशंकित हैं कि सेबी संबंधित सख्ती कम करेगा। जेएसए एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स की पार्टनर अर्चना तिवारी ने बताया, ‘लिस्टिंग के बाद शेयर का मूल्य बाजार से संचालित होता है और संस्थापकों को मिलने वाले इंसेंटिव प्रमुख कॉरपोरेट प्रशासन मानकों के अनुरूप होने चाहिए।’

एयू कॉरपोरेट एडवाइजरी ऐंड लीगल सर्विसेज के संस्थापक अक्षत खेतान ने कहा कि सेबी समानता और निवेशक सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।

 

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First Published - May 8, 2025 | 11:37 PM IST

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