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केंद्र सरकार ने चीनी निर्यात पर लगाई मुहर, मोलासेस टैक्स खत्म होने से चीनी मिलों को मिलेगी राहत

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केंद्र सरकार द्वारा 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति और मोलासेस पर टैक्स खत्म करने का फैसला लिया गया है जिससे गन्ना किसानों के भुगतान में तेजी की उम्मीद है

Last Updated- November 08, 2025 | 8:57 PM IST
Sugar
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अगले चीनी सीजन 2025-26 में करीब 15 लाख टन चीनी निर्यात करने की इजाजत दी जाएगी। साथ ही, गुड़ की छाछ यानी मोलासेस पर लगने वाला 50 फीसदी निर्यात टैक्स भी हटा दिया गया है। इससे चीनी मिलों को बेहतर दाम मिलेंगे। किसानों को जल्दी पेमेंट हो सकेगा। ये कदम किसानों की मदद के लिए उठाया गया है। खासकर कर्नाटक में चल रहे गन्ना किसानों के आंदोलन के बीच ये खबर आई है।

खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को चिट्ठी लिखी। इसमें उन्होंने ये सारी बातें बताईं। जनवरी 2025 में जब चीनी के मिल भाव गिर रहे थे, तब केंद्र ने 10 लाख टन चीनी निर्यात की परमिशन दी थी। इससे देश में अतिरिक्त चीनी का स्टॉक मैनेज हो गया। कर्नाटक में चीनी के भाव तुरंत बढ़ गए। पहले 3370 रुपये प्रति क्विंटल थे, जो 3700 से 3930 रुपये तक पहुंच गए। अब 2025-26 सीजन के लिए भी 15 लाख टन निर्यात की मंजूरी दी गई है। मोलासेस पर टैक्स खत्म करने से मिलों को और फायदा होगा।

किसानों की मांग और मिलों की उम्मीद

चीनी उद्योग के सूत्र बता रहे हैं कि खाद्य मंत्रालय ने सैद्धांतिक रूप से 15 लाख टन निर्यात को हां कह दिया है। लेकिन हाई-पावर ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स से अंतिम मंजूरी बाकी है। मिल वाले कम से कम 20 लाख टन निर्यात चाहते थे। इससे अतिरिक्त उत्पादन का बोझ कम होता। गन्ने के बकाया पेमेंट समय पर चुकते। एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “हमें उम्मीद है कि दिसंबर 2025 के बाद बाकी 5 से 10 लाख टन की इजाजत मिल जाएगी। वो 20 लाख टन की मांग कर रहे थे।”

प्रह्लाद जोशी ने चिट्ठी में लिखा कि केंद्र की कई किसान हितैषी नीतियों से गन्ने के बकाया पेमेंट की स्थिति सुधरी है। पूरे देश में और कर्नाटक में भी। 2014 से पहले किसान पेमेंट के लिए धरने करते थे। अब समय पर पैसे मिल रहे हैं। कर्नाटक में 2022-23 और 2023-24 सीजन के बकाया जीरो हैं। 2024-25 सीजन में सिर्फ 50 लाख रुपये बाकी हैं। ये आंकड़े 30 सितंबर 2025 तक के हैं।

Also Read: छत्तीसगढ़ के किसान और निर्यातकों को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान, फोर्टिफाइड राइस कर्नल का किया पहली बार निर्यात

कर्नाटक में आंदोलन और राज्य का फैसला

कर्नाटक में गन्ना किसान पिछले कुछ दिनों से सड़कों पर हैं। बेलगावी, बागलकोट, विजयपुरा और हावेरी जैसे उत्तर कर्नाटक के जिलों में प्रदर्शन हो रहे हैं। किसान 3550 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि केंद्र ने 2025-26 के लिए ऊंचा फेयर एंड रेम्यूनरेटिव प्राइस यानी एफआरपी तय किया है। लेकिन मिलें कम पैसे दे रही हैं। राज्य सरकार स्पेशल स्टेट एडवाइज्ड प्राइस यानी एसएपी घोषित करे। इससे नुकसान की भरपाई हो।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्र को चिट्ठी लिखी थी। इसमें कम एफआरपी का आरोप लगाया और साथ ही मुआवजे की मांग की गई थी। शुक्रवार को किसानों से मीटिंग की गी थी और 11.25 फीसदी रिकवरी वाले गन्ने के लिए 3300 रुपये प्रति टन भाव तय किया। साथ ही किसानों से आंदोलन खत्म करने की अपील की गई और सहयोग मांगा गया।

प्रह्लाद जोशी कर्नाटक से ही हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र हर सीजन के लिए एफआरपी तय करता है। ये कमीशन फॉर एग्रीकल्चरल कॉस्ट्स एंड प्राइसेस यानी सीएसीपी की सिफारिश पर होता है। सीएसीपी उत्पादन लागत, चीनी और उप-उत्पादों के बाजार भाव, रिकवरी रेट, किसानों का मार्जिन और दूसरी फसलों से कमाई जैसे कई फैक्टर देखता है।

2025-26 के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल एफआरपी मंजूर हुआ है। ये सभी राज्यों की उत्पादन लागत कवर करता है। लागत पर 105.2 फीसदी मार्जिन देता है। हर 0.1 फीसदी रिकवरी बढ़ने पर 3.46 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। कर्नाटक में औसत रिकवरी 10.5 फीसदी है तो एफआरपी 363 रुपये हो जाएगा।

पिछले दशक में एफआरपी में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। 2013-14 में 210 रुपये था। तब लागत पर सिर्फ 79.2 फीसदी मार्जिन मिलता था। भारत में केंद्र एफआरपी तय करता है। लेकिन उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड जैसे कुछ राज्य अपना एसएपी घोषित करते हैं। मिलें उसी भाव पर गन्ना खरीदती हैं।

उत्पादन में भारी उछाल की उम्मीद

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी इस्मा ने नई अनुमान जारी किया है। 2025-26 मार्केटिंग ईयर में चीनी उत्पादन 16 फीसदी बढ़कर 34.35 मिलियन टन हो जाएगा। ये सीजन सितंबर से शुरू हुआ है। मुख्य बढ़ोतरी महाराष्ट्र में होगी। पिछले 2024-25 में कुल उत्पादन 29.1 मिलियन टन था।

इस्मा के बयान में कहा गया कि इथेनॉल के लिए डायवर्जन के बाद नेट उत्पादन 30.95 मिलियन टन होगा। पिछले सीजन में 26.10 मिलियन टन था। इस बार 3.4 मिलियन टन चीनी इथेनॉल में जाएगी। पिछले साल 3.5 मिलियन टन गई थी। ये अनुमान कुछ दिन पहले जारी हुए हैं।

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First Published - November 8, 2025 | 8:57 PM IST

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