Indigo Share: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के चलते पश्चिम एशिया के कई हिस्सों का हवाई क्षेत्र बंद हो गया है। इसके चलते बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं और कई उड़ानों का मार्ग बदलना पड़ा है। पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र पहले से बंद होने के कारण इंडिगो की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इसका और ज्यादा असर पड़ा है। इस बीच इंडिगो के जनवरी-फरवरी 2026 के ऑपरेशंस के आंकड़े कंपनी के अनुमान और गाइडेंस के अनुरूप या थोड़ा बेहतर रहे हैं। ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल का का मानना है कि जैसे ही जियो-राजनीतिक तनाव कम होगा, कंपनी की उड़ानें सामान्य हो सकती हैं। मंगलवार के कारोबार में शुरुआती सेशन में इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) के शेयर में जबरदस्त रिकवरी दिखाई और 3 फीसदी से ज्यादा उछल गया।
ब्रोकरेज फर्म एमके (Emkay) का InterGlobe Aviation यानी इंडिगो पर पॉजिटिव रुख बना हुआ है। ब्रोकरेज ने एविएशन स्टॉक पर BUY रेटिंग दी है। साथ ही दिसंबर 2027 के लिए टारगेट प्राइस 6300 रुपये प्रति शेयर तय किया है। बीते कारोबारी सेशन यानी सोमवार को शेयर 4236 पर बंद हुआ था। इस तरह मौजूदा भाव से स्टॉक में आगे 49 फीसदी का तगड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच यह शेयर बीते दो हफ्तो में 10 फीसदी टूट चुका है।
ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि इंडिगो के जनवरी-फरवरी 2026 के ऑपरेशंस के आंकड़े कंपनी के अनुमान और गाइडेंस के अनुरूप या थोड़ा बेहतर रहे हैं। एनालिस्ट मानते हैं कि जैसे ही जियोपॉलिटिकल तनाव कम होगा, कंपनी की उड़ानें सामान्य हो सकती हैं।
फिलहाल पश्चिम एशिया में तनाव कब कम होगा, इसे लेकर स्पष्टता नहीं है। लेकिन वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए जल्द समाधान निकलने की उम्मीद जताई जा रही है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के चलते इंडिगो की कुल अंतरराष्ट्रीय क्षमता का करीब 30 फीसदी हिस्सा प्रभावित हुआ है। कंपनी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में से लगभग 45 फीसदी उड़ानें पश्चिम एशिया से जुड़ी हैं या उसी क्षेत्र से होकर गुजरती हैं।
कंपनी के अनुसार 28 फरवरी 2026 से 3 मार्च 2026 के बीच पश्चिम एशिया और कुछ लंबी दूरी के गंतव्यों के लिए 500 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इनमें इस्तांबुल, एथेंस, मैनचेस्टर और एम्स्टर्डम जैसे शहरों की उड़ानें शामिल हैं। संघर्ष जारी रहने के कारण 4 से 6 मार्च के बीच भी उड़ानें रद्द की गईं और रोजाना लगभग 130 से 140 उड़ानें रद्द हो रही हैं।
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इस बीच, तेल आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। जेट फ्यूल का मार्जिन भी तेजी से बढ़कर लगभग 40 से 50 डॉलर प्रति बैरल हो गया है, जबकि कुछ बाजारों में यह 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। अगर यही स्थिति बनी रहती है, तो अप्रैल 2026 में जेट फ्यूल की कीमतों में 40 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां इसका कितना बोझ एयरलाइंस पर डालेंगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
(डिस्क्लेमर: यहां शेयर में खरीदारी की सलाह ब्रोकरेज ने दी है। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)