facebookmetapixel
Netflix के भारत में 10 साल: कैसे स्ट्रीमिंग ने भारतीय मनोरंजन उद्योग की पूरी तस्वीर बदल दीEditorial: ट्रंप की नई टैरिफ धमकी से भारत-अमेरिका व्यापार रिश्तों पर गहराया संकटट्रंप को धन्यवाद कि उनकी वजह से वापस आए सुधार‘VB-G Ram Ji’ कानून के बचाव में उतरेंगे केंद्रीय मंत्री और BJP के नेता, विपक्ष के अभियान को देंगे जवाबApple की बड़ी छलांग: भारत से आईफोन निर्यात पहली बार ₹2 लाख करोड़ के पार, PLI स्कीम का असरऑफिस से फैक्ट्री तक कर्मचारियों को पहुंचाने पर उबर का फोकस, कंपनी को दिख रहा यहां बड़ा अवसरबड़े दावे, सीमित नतीजे: AI के दौर में भी कई GCC सिर्फ कॉस्ट सेंटर बनकर रह गए, वैल्यू क्रिएशन से कोसों दूरदोपहिया उद्योग को 2026 में 9 फीसदी तक की ग्रोथ की उम्मीद, GST कटौती के चलते मांग बढ़ने के आसार2032 तक 3-नैनोमीटर चिप बनाएगा भारत, सेमीकंडक्टर महाशक्ति बनने की हमारी तैयारी: वैष्णवरिकॉर्ड निवेश और मजबूत रिटर्न: सोना-चांदी की तेजी से 2025 में भी मल्टी-ऐसेट फंडों ने दिखाया जलवा

सेल ने अपना ऋण बोझ घटाया

Last Updated- December 10, 2022 | 2:14 AM IST

सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) पिछले आठ महीनों के दौरान अपने शुद्ध ऋण को शीर्ष स्तर से कम करने में सफल रही है। कंपनी ने आज कहा कि 30 अप्रैल, 2020 तक उसका शुद्ध ऋण बोझ 52,290 करोड़ रुपये था जिसे घटाकर 31 दिसंबर, 2020 तक 44,308 करोड़ रुपये कर लिया गया है। इस प्रकार कंपनी ने 7,982 करोड़ रुपये का ऋण बोझ हल्का किया है। कंपनी ने कहा है कि वह ऋण बोझ घटाने के लिए अपनी कोशिश जारी रखेगी।
अप्रैल में सेल ने अपने संयंत्र एवं यूनिट प्रमुखों को पत्र लिखकर कंपनी की वित्तीय स्थिति के बारे में चिंता जताई थी। कोविड-19 वैश्विक महामारी की रोकथाम के लिए लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के समय इन्वेंटरी की स्तर 20 लाख टन था और अतिरिक्त 8 लाख टन उत्पादन प्रक्रिया के तहत था। जबकि कंपनी की उधारी 52,000 करोड़ रुपये को पार कर गई थी।
इस्पात के उपयोगकर्ता उद्योगों को लॉकडाउन के कारण तगड़ा झटका लगा था जिसका असर इस्पात उद्योग पर भी दिखा। हालांकि लॉकडाउन के खत्म होने के साथ ही इस्पात उद्योग ने तेजी से सुधार दर्ज किया।
लॉकडाउन के बाद घरेलू मांग में तेजी आई और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई। यही कारण है कि घरेलू बाजार में भी इस्पात की कीमतों में 1 जनवरी 2021 तक सालाना आधार पर 48 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि सेल को अपना ऋण बोझ घटाने में केवल बाजार परिस्थितियों में सुधार से ही मदद नहीं मिली बल्कि इसमें तमाम कारकों ने योगदान किया। कंपनी को उत्पादन में वृद्धि, लागत घटाने के उपायों और गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों को भुनाने से राजस्व में वृद्धि जैसे तमाम कारकों से ऋण बोझ घटाने में मदद मिली।
सेल ने आज कहा कि उसने 31 दिसंबर, 2020 को समाप्त तिमाही के दौरान हॉट मेटल, कच्चे इस्पात और बिक्री योग्य इस्पात का बेहतरीन तिमाही उत्पादन किया। वित्त वर्ष 2021 की तीसरी तिमाही में कच्चे इस्पात का उत्पादन एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 9 फीसदी बढ़कर 43.7 लाख टन हो गया। जबकि हॉट मेटल का उत्पादन इस दौरान सालाना आधार पर 12 फीसदी बढ़कर 48 लाख टन हो गया।
वित्त वर्ष 2021 की तीसरी तिमाही के दौरान कंपनी की कुल बिक्री (घरेलू एवं निर्यात सहित) 5.6 फीसदी बढ़कर 43.2 लाख टन हो गई। तिमाही के दौरान मकानों के लिए बिक्री बढ़कर 40.5 लाख टन हो गई जो वित्त वर्ष 2020 की तीसरी तिमाही में 37.3 लाख टन रही थी। इसके अलावा सेल ने चालू वित्त वर्ष के दौरान अपनी विभिन्न खानों से करीब 21.6 लाख टन फ्रेश फाइन की बिक्री भी नीलामी के जरिये की। इस दौरान करीब 3 लाख टन डंप फाइन एवं अवशेष की भी सफलतापूर्वक नीलामी की गई।
सेल ने कहा कि इससे कुछ हद तक बाजार में लौह अयस्क की कमी दूर हुई। संयोग से, साल की शुरुआत में ओडिशा में नीलामी की गई कई खानों से उत्पादन शुरू नहीं हो पाया जिससे बाजार में लौह अयस्क की उपलब्धता कम हो गई थी।

First Published - January 8, 2021 | 11:42 PM IST

संबंधित पोस्ट