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रिलायंस की होगी लैंको अमरकंटक

Last Updated- December 11, 2022 | 3:58 PM IST

 मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज कोयला आधारित बिजली परियोजना लैंको अमरकंटक पावर के अधिग्रहण की दौड़ में सबसे आगे है। रिलायंस इसके लिए 1,960 करोड़ रुपये अग्रिम नकदी की पेशकश कर रही है। अगर लेनदार इस पेशकश को स्वीकार करते हैं  तो यह आईबीसी 2016 के तहत रिलायंस की तरफ से तीसरा बड़ा अधिग्रहण होगा। इससे पहले कंपनी रिलायंस टेलिकॉम की दूरसंचार टावर परिसंपत्तियां और टेक्सटाइल फर्म आलोक इंडस्ट्रीज का अधिग्रहण कर चुकी है।
हजीरा में 360 मेगावॉट क्षमता वाली कोयला आधारित बिजली संयंत्र का संचालन पहले से ही कर रही रिलायंस नई कोयला आधारित बिजली परियोजना में निवेश से बचती रही है ताकि अक्षय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित कर सके। लैंको अमरकंटक पावर ने शुरू में कोरबा, छत्तीसगढ़ में 1,337 एकड़ क्षेत्र में 3,240 मेगावॉट क्षमता के तापीय बिजली संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई थी। इस परियोजना का पहला चरण पहले से ही परिचालन में है।
ऐक्सिस बैंक ने जून 2018 में इसके खिलाफ एनसीएलटी का रख किया था जब उसने कर्ज के भुगतान में चूक शुरू की थी। बैंकों की तरफ से 14,604 करोड़ रुपये के दावे स्वीकार किए गए और 3,182 करोड़ रुपये सबसे बड़ा दावा पावर फाइनैंस कॉरपोरेशन ने पेश किया था। सरकारी स्वामित्व वाली फर्म आरईसी ने 3,000 करोड़ रुपये का दावा पेश किया।
मार्च 2020 में रिलायंस जियो की इकाई ने रिलायंस इन्फ्राटेक के अधिग्रहण के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई जब अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली फर्म ने 13,483 करोड़ रुपये के कर्ज भुगतान में चूक की। साल 2018 में आरआईएल और जेएम एआरसी ने आलोक का अधिग्रहण 5,000 करोड़ रुपये में किया। बाद में आरआईएल ने आलोक इंडस्ट्रीज में अतिरिक्त फंड का निवेश किया।
लैंको के अधिग्रहण पर आरआईएल ने टिप्पणी नहीं की।
आरआईएल के अलावा अदाणी समूह ने भी लेनदारों के सामने 1,800 करोड़ रुपये की पेशकश की थी। पीएफसी व आरईसी का लैंको अमरकंटक पर सबसे ज्यादा कर्ज है और इन दोनों ने भी 40 फीसदी इक्विटी लेने के लिए पेशकशकी थी और कहा था कि 3,400 करोड़ रुपये का भुगतान 20 साल में किया जाएगा। सीओसी अग्रणी पक्षकारों को और बेहतर पेशकश के ​लिए कह सकती है और फिर अंतिम फैसला ले सकती है। बैंकर ने यह जानकारी दी।
कोयला आधारित बिजली उत्पादन में आरआईएल की दिलचस्पी ने विश्लेषकों को चौंकाया है क्योंकि कंपनी अक्षय ऊजार् में 75,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है और इतनी ही रकम के और निवेश की प्रतिबद्ध‍ता जताई है जो उपलब्ध मौके पर निर्भर करेगा।
कोयला आधारित बिजली उत्पादन को पर्यावरण के प्रतिकूल माना जाता है लेकिन शाम के समय भारत में बिजली की बढ़ती मांग के कारण विश्लषकों का कहना है कि अकेले अक्षय ऊर्जा मांग पूरी करने में सक्षम नहीं होगी और कोयला आधारित बिजली परियोजना आवश्यक बन गई है। 

First Published - September 4, 2022 | 10:08 PM IST

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