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रियल्टी क्षेत्र को भा रहा है ‘ग्रीन बिल्डिंग’ का कॉन्सेप्ट

Last Updated- December 07, 2022 | 1:02 PM IST

भारतीय रियल्टी क्षेत्र में ग्रीन बिल्डिंग की अवधारणा तेजी से बढ़ रही है। इस नए चलन के तहत निर्माण कंपनियां अधिक से अधिक कार्बन क्रेडिट पाने के लिए अपनी परियोजनाओं को पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर जोर दे रही हैं।


सीआईआई-सोहराबजी ग्रीन बिल्डिंग सेंटर की इकाई आईजीबीसी के चेयरमैन प्रेम जैन के मुताबिक, ‘निर्माण कंपनी हीरानंदानी अपनी आगामी टाउनशिप में मॉल, घरों और अन्य भवनों को कार्बन क्रेडिट को ध्यान में रख कर तैयार कर रही है।’ इस सेंटर को भारत में ग्रीन बिल्डिंग की अवधारणा को बढ़ावा दिए जाने का श्रेय जाता है।

सैवी इन्फ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड के निदेशक समीर सिन्हा ने बताया कि अहमदाबाद में डेवलपर इसी तरह का कदम उठाने की योजना बना रहे हैं। इनमें से कई डेवलपर अपनी परियोजनाओं को इकट्ठा करने और कार्बन क्रेडिट हासिल करने के लिए आगे आए हैं। इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (आईजीबीसी) के अनुमानों के मुताबिक अगले कुछ वर्षों में भारत एक अरब वर्ग फुट के हरित क्षेत्र से लैस होगा।

जैन ने कहा, ‘2002 में भारत में यह फुटप्रिंट महज 20,000 वर्ग फुट था, लेकिन आज पूरे देश में लीड रेटेड 14.7 करोड़ वर्ग फुट ग्रीन बिल्डिंग्स हैं और 2010 तक यह एक अरब वर्ग फुट हो जाने की संभावना है।’ लीडरशिप इन एनर्जी ऐंड एनवायरनमेंटल डिजाइन (लीड) एक ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग प्रणाली है जिसे वैश्विक तौर पर मान्यता हासिल है।

वैसे विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) हरियाली से लैस हो रहे हैं। हैदराबाद में सत्यम समूह का मयतास एसईजेड ऐसा करने वाला पहला एसईजेड होगा। इसी तरह फरीदाबाद में आईटीआईटीईएस एसईजेड ग्रीनस्पेसेज विश्व की सर्वाधिक ऊर्जा किफायत वाला इमारत होगी। जैन के मुताबिक, ‘यह इमारत 2011 में बनेगी और हमने संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा इसके उद्धाटन की मंजूरी हासिल कर ली है।’ उन्होंने कहा कि 13 नोबल विजेता हस्तियां इस परियोजना की सलाहकार हैं। ग्रीन एसईजेड को अधिक किफायती बनाना आसान है।

First Published - July 23, 2008 | 11:41 PM IST

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