facebookmetapixel
वेनेजुएला संकट: भारत के व्यापार व तेल आयात पर भू-राजनीतिक उथल-पुथल से फिलहाल कोई असर नहींसोमनाथ मंदिर: 1026 से 2026 तक 1000 वर्षों की अटूट आस्था और गौरव की गाथाT20 World Cup: भारत क्रिकेट खेलने नहीं आएगी बांग्लादेश की टीम, ICC से बाहर मैच कराने की मांगसमान अवसर का मैदान: VI को मिलने वाली मदद सिर्फ उसी तक सीमित नहीं होनी चाहिए1985–95 क्यों आज भी भारत का सबसे निर्णायक दशक माना जाता हैमनरेगा भ्रष्टाचार का पर्याय बना, विकसित भारत-जी राम-जी मजदूरों के लिए बेहतर: शिवराज सिंह चौहानLNG मार्केट 2025 में उम्मीदों से रहा पीछे! चीन ने भरी उड़ान पर भारत में खुदरा बाजार अब भी सुस्त क्यों?उत्पाद शुल्क बढ़ते ही ITC पर ब्रोकरेज का हमला, शेयर डाउनग्रेड और कमाई अनुमान में भारी कटौतीमझोले और भारी वाहनों की बिक्री में लौटी रफ्तार, वर्षों की मंदी के बाद M&HCV सेक्टर में तेजीदक्षिण भारत के आसमान में नई उड़ान: अल हिंद से लेकर एयर केरल तक कई नई एयरलाइंस कतार में

तेज नकदी और बेहतर रिटर्न, भूखंडों पर दांव लगा रहे हैं बड़े डेवलपर्स

यह रणनीतिक बदलाव बेंगलूरु, चेन्नई, हैदराबाद, गुरुग्राम, मुंबई महानगरीय क्षेत्र (एमएमआर) के बाहरी इलाकों के साथ-साथ मझोले बाजारों में दिख रहा है।

Last Updated- December 23, 2025 | 8:39 AM IST
Plot
Representational Image

भारत के प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर भूखंडों पर अपना दांव बढ़ा रहे हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर कभी असंगठित खिलाड़ियों का दबदबा था मगर अब ब्रांडेड पेशकशों, तेज नकदी प्रवाह और खरीदारों की बदलती प्राथमिकताओं से इसका स्वरूप बदल रहा है।

यह रणनीतिक बदलाव बेंगलूरु, चेन्नई, हैदराबाद, गुरुग्राम, मुंबई महानगरीय क्षेत्र (एमएमआर) के बाहरी इलाकों के साथ-साथ मझोले बाजारों में दिख रहा है। डीएलएफ, गोदरेज प्रॉपर्टीज, ब्रिगेड, प्रेस्टीज, पूर्वांकर, महिंद्रा लाइफस्पेस, रुस्तमजी और अन्य डेवलपर्स बड़े भूखंड की पेशकश कर रहे हैं।
द वेल्थ कंपनी में भारत भूमि फंड के फंड मैनेजर भव्य बागरेचा के मुताबिक यह बदलाव संरचनात्मक है। उन्होंने कहा, ‘भूखंड की ओर रुख मुख्य रूप से नकदी प्रवाह की गति बढ़ाने की रणनीति है।’ भूखंड परियोजनाएं आमतौर पर 24 से 36 महीनों में पूरी हो जाती है, इसलिए डेवलपर्स 4 से 6 वर्ष तक चले वाली बड़ी ऊंची इमारतों वाली परियोजनाओं के मुकाबले भूखंड को जल्द भुना सकते हैं। उल्लेखनीय है कि भारत भूमि फंड भूखंड परियोजनाओं में भी निवेश करती है।

वित्तीय आंकड़े भी इस आकर्षण को दर्शाते हैं। डेवलपरों के लिए भूखंड के वास्ते आंतरिक रिटर्न दर (आईआरआर) 20 से 30 फीसदी है, जबकि नियोजित पूंजी पर रिटर्न (आरओसीई) भी 18 से 28 फीसदी के करीब है।

एनारॉक समूह के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी (लैंड सर्विसेज) मयंक सक्सेना बताते हैं कि दूसरी ओर, मध्यम और प्रीमियम अपार्टमेंट के लिए आईआरआर 10 से 20 फीसदी और आरओसीई 10 से 15 फीसदी के बीच है। विशेषज्ञों ने बताया कि यह मॉडल डेवलपर्स के लिए पहले ही सफल हो चुका है। प्रमुख डेवलपरों ने रिकॉर्ड बिक्री के बारे में बताया है, जो खरीदारों की बदलती पसंद को दर्शाता है।

बागरेचा ने कहा, ‘ऐतिहासिक रूप से भूखंड बाजार असंगठित था और यहां काफी मुकदमेबाजी होती थी और टाइटल भी स्पष्ट नहीं रहते थे। संस्थागत डेवलपरों ने ब्रांडेड भूखंड की पेशकश के साथ इसका समाधान किया है। अब खरीदार भी साफ-सुथरी बगैर मुकदमेबाजी वाले भूखंडों के लिए 20 से 30 फीसदी अधिक रकम तक देने को तैयार हैं।’

स्थापित डेवलपर्स ब्रांड विश्वसनीयता के जरिये खुद को अलग बताते हैं। रुस्तमजी समूह के सेल्स ऐंड मार्केटिंग के प्रेसिडेंट डॉ. राकेश सेठिया ने कहा, ‘यह बिल्कुल स्पष्ट है कि आज ग्राहक संगठित और विश्वसनीय डेवलपर्स को तरजीह देते हैं। वे मंजूरी में पारदर्शिता, अंदर की अच्छी सड़कें, उपयोगिताएं, सुरक्षा और आश्वासन चाहते हैं कि भूखंड साफ-सुथरी और आगे भी विकास के लिए तैयार है।’

इस क्षेत्र में पदार्पण करने वाले शुरुआती डेवलपर्स में से एक डीएलएफ ने बताया कि उसके प्रमुख बाजार में स्वतंत्र फ्लोर और भूखंड की मांग लगातार बढ़ रही है। डीएलएफ होम डेवलपर्स लिमिडे के संयुक्त प्रबंध निदेशक और मुख्य व्यवसाय अधिकारी आकाश ओहरी ने कहा, ‘गोपनीयता, विशिष्टता, जीवन जीने के अधिक व्यक्तिगत तरीके की बढ़ती इच्छा के तौर पर स्वतंत्र फ्लोर और भूखंड की प्राथमिकता बढ़ी है।’

महिंद्रा लाइफस्पेस डेवलपर्स के मुख्य व्यवसाय अधिकारी (आवासीय) विमलेंद्र सिंह ने कहा, ‘भूखंड में महिंद्रा लाइफस्पेस का प्रवेश ग्राहकों की बढ़ती पसंद और अलग-अलग आवासीय प्रारूपों की पेशकश पर हमारा ध्यान देने पर आधारित था। यह सेगमेंट हमारे मुख्य आवासीय पोर्टफोलियो का पूरक है, जिससे हम लचीलेपन, विशिष्टता और दीर्घकालिक परिसंपत्ति मूल्य चाहने वाले ग्राहकों की सेवा कर पाते हैं।’

रेरा से इस क्षेत्र को औपचारिक रूप दिए जाने के बाद पूर्वांकर ने 2021 में इस श्रेणी में प्रवेश किया। कंपनी के मुख्य कार्य अधिकारी (दक्षिण) मल्लन्ना सासालू ने कहा, ‘हमें पता था कि यह श्रेणी उन संगठित डेवलपर्स के लिए खुलेगी जो पारदर्शिता, सख्त नियोजन और कानूनी आश्वासन दे सकते हैं।’
इसके अलावा भी कई कारण है, जिन्होंने भूखंडों की मांग में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इनमें मुख्य तौर पर निवेशक, अनिवासी भारतीय और कोविड के बाद दूसरे मकान खरीदने वाले लोग शामिल हैं। प्रॉपइक्विटी के मुताबिक, पिछले साढ़े तीन वर्षों में 10 बड़े और मझोले शहरों में डेवलपरों ने 2.44 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 4.7 लाख आवासीय भूखंड पेश किए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि खरीदारों को बने बनाए मकानों के मुकाबले भूखंड अधिक किफायती और दीर्घकालिक रिटर्न के लिए बेहतर लगते हैं। स्थापित डेवलपर्स के भूखंड कानूनी जोखिमों को कम करते हैं और कागजी कार्रवाई को सरल बनाते हैं।

First Published - December 23, 2025 | 8:39 AM IST

संबंधित पोस्ट