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फार्मा : सहायक बुनियादी ढांचा बड़ी चुनौती

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यूएसएफडीए जांच पूरी होने के बाद किसी कंपनी के प्रबंधन को फॉर्म 483 जारी करता है।

Last Updated- July 05, 2023 | 10:52 PM IST
Pharma industry

अमेरिकी दवा नियामक द्वारा वर्ष 2022 में जारी करीब 45 प्रतिशत आपत्तियां लिखित प्रक्रियाओं के अभाव, संयंत्र रखरखाव और एंसिलियरी इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी हुई थीं। मैकिंसे (McKinsey) के अनुसार अमेरिकी खाद्य एवं दवा प्रशासन (usfda) द्वारा जारी फॉर्म 483 के विश्लेषण में यह बात सामने आई है।

विश्लेषण से पता चला है कि फॉर्म 483 से संबंधित आपत्तियों का स्वरूप हाल के वर्षों में बदला है। प्रयोगशाला नियंत्रण और मुख्य निर्माण प्रक्रिया जैसे मुद्दों पर आपत्तियों में गिरावट आई है। इसका मतलब है कि भारतीय संयंत्रों में मुख्य निर्माण प्रक्रियाएं स्थिर और नियंत्रित हैं। अब नियामकीय जोर सहायक कार्यों और ढांचे पर है।

यूएसएफडीए जांच पूरी होने के बाद किसी कंपनी के प्रबंधन को फॉर्म 483 जारी करता है।

मैकिंजी ऐंड कंपनी के सीनियर पार्टनर विकास भदौरिया ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि वर्ष 2022 में संयंत्रों द्वारा दर्ज की गईं 45 प्रतिशत आपत्तियां लिखित प्रक्रियाओं की गैर-उपलब्धता, संयंत्र के मैंटेनेंस और एंसिलियरी इन्फ्रास्ट्रक्चर से संबंधित थीं।

उन्होंने कहा, ‘यूएसएफडीए द्वारा जारी आपत्तियों में मूल कारणों की जांच का भी 15 प्रतिशत योगदान रहा। जहां 2018 में, प्रयोगशाला नियंत्रण और मुख्य निर्माण प्रक्रियाओं जैसी चुनौतियों का कुल जारी आपत्तियों में 20 प्रतिशत से ज्यादा योगदान था, जो 2022 में घटकर महज 12 प्रतिशत रह गया।’

भदौरिया ने कहा कि डेटा रिलायबिलिटी और गुड डॉक्यूमेंटेशन प्रैक्टिस पर आपत्तियां 2022 में 5 प्रतिशत थीं। उन्होंने कहा, ‘यह 2018 की पिछली भागीदारी के मुकाबले करीब 50 प्रतिशत कम है।’

मैकिंसे ने यूएसएफडीए द्वारा जारी निगरानी के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। उद्योग के दिग्गजों का कहना है कि यूएसएफडीए यह सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रहा है कि विद्युत अभाव के मामले में पाइपों की सफाई, मशीन चलाने या बंद करने जैसी प्रक्रियाओं के लिए लिखित दिशा-निर्देश हों।

वर्ष 2022 में यूएसएफडीए द्वारा स्वीकृत कुल एब्रिविएटेड न्यू ड्रग एप्लीकेशंस (एएनडीए) में भारत का 48 प्रतिशत योगदान है। 530 संयंत्रों के साथ देश को अमेरिका से बाहर यूएसएफडीए स्वीकृत संयंत्रों की संख्या में पहला स्थान हासिल है। अमेरिका भारत से करीब 7.3 अरब डॉलर के दवा उत्पादों का आयात करता है।

इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (आईपीए) में वरिष्ठ तकनीकी सलाहकार (गुणवत्ता एवं नियामकीय) राजीव देसाई ने कहा कि अमेरिकी बाजार में मजबूत व्यवसाय वाली कंपनियों पर उन्होंने ज्यादा ध्यान दिया है। इसलिए गुणवत्ता अनुपालन सुनिश्चित करना उनकी मुख्य प्राथमिकता होनी चाहिए।

भारत में प्रमुख 24 दवा कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले आईपीए द्वारा आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि वर्ष 2023 के दौरान 52 निरीक्षणों में से 49 वीएआई (वॉलंटरी एक्शन इंडिकेटेड) या एनएआई (नो एक्शन इंडिकेटेड) दर्जे की वजह से किए गए।

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First Published - July 5, 2023 | 10:51 PM IST

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