उपभोक्ता सामान बनाने वाली हरिद्वार की कंपनी पतंजलि ने गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र से आज 175 करोड़ रुपये जुटाए। पिछले कुछ वर्षों में एफएमसीजी की श्रेणियों में तेजी से विस्तार करने वाली कंपनी इस रकम का इस्तेमाल पूंजीगत खर्च में करेगी और कार्यशील पूंजी की जरूरतें भी इससे पूरी की जाएगी। समूह ने यह घोषणा की।
रकम जुटाने के लिए पतंजलि ने तीन सार्वजनिक बैंकों के साथ गठजोड़ किया था। कंपनी ने पंजाब नैशनल बैंक के जरिये 90 करोड़ रुपये, आईडीबीआई बैंक के जरिये 60 करोड़ रुपये और यूको बैंक के जरिये 25 करोड़ रुपये जुटाए। कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक, एनसीडी इश्यू को पेश करने के पांच मिनट के भीतर पूरा आवेदन मिल गया। इस एनसीडी पर 9.25 फीसदी ब्याज दिया जा रहा है और अवधि तीन साल की है। इसकी परिपक्वता की तारीख 18 मई, 2024 है। यह दूसरा मौका है जब पतंजलि ने ऋणपत्र के जरिये रकम जुटाई है। पिछले साल मई में कंपनी ने अपनी कार्यशील पूंजी की जरूरतों और आपूर्ति शृंखला के नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 250 करोड़ रुपये जुटाए थे।
आज समूह के प्रवक्ता ने यह भी ऐलान किया कि समूह का एकीकृत राजस्व 2020-21 के लिए सालाना आधार पर 13.4 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 26,400 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जिसमें रुचि सोया की बिक्री से मिली रकम शामिल है। साथ ही कंपनी का एबिटा 34.5 फीसदी बढ़कर वित्त वर्ष में 2,135 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
यह स्पष्ट नहीं है कि रुचि सोया से कुल कितना राजस्व मिला, लेकिन बीएसई के पास उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल-दिसंबर के दौरान रुचि सोया ने 11,523 करोड़ रुपये की बिक्री की। संयोग से 2019-20 में पतंजली आयुर्वेद का राजस्व 9,023 करोड़ रुपये रहा, जो 2018-19 के 8,330 करोड़ रुपये के मुकाबले 8.3 फीसदी ज्यादा है।
निजी स्वामित्व वाला समूह विगत में बाह्य उधारी से दूर रहा है, लेकिन अब बैंक लोन व सार्वजनिक उधारी बढ़ा रही है, जैसा कि उसके कर्ज के स्तर से पता चलता है। 2019 के आखिर में पतंजलि ने रुचि सोया से सोयाबीन प्लांट का अधिग्रहण 4,350 करोड़ रुपये में किया। रकम चुकाने के लिए समूह ने एसबीआई, पीएनबी, यूनियन बैंक, सिंडिकेट बैंक व इलाहाबाद बैंक से करीब 3,000 करोड़ ररुपये उधार लिए।
सौदे के बाद बीएसई पर दोबारा सूचीबद्धता के बाद रुचि सोया का शेयर कई गुना चढ़ा है लेकिन पतंजलि खुले बाजार में शेयर बिक्री से रकम जुटाने में सक्षम नहीं हो पाई है क्योंकि निायमकीय पाबंदी लगी हुई है। अभी प्रवर्तक समूह के पास कंपनी की 98.9 फीसदी हिस्सेदारी पांच प्रवर्तक इकाइयों पतंजलि आयुर्वेद, दिव्या योग मंदिर ट्रस्ट, पतंजलि परिवहन और पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास के जरिए है।
जीएसटी लागू होने के बाद साल 2017 में उसका परिचालन प्रभावित हुआ। पतंजलि बढ़त के निचले चक्र से उबरने में कामयाब नहींं रही। केयर रेटिंग्स के मुताबिक, यह गिरावट मुख्य रूप से जीएसटी ीक व्यवस्था समय पर न अपनाने और बुनियादी ढांचा व आपूर्ति शृंखला विकसित न करने के कारण आई। इसके परिणामस्वरूप कंपनी का राजस्व वित्त वर्ष 2018 में 10 फीसदी फिसल गया।
तीव्र विस्तार पर तीन साल तक लगाम के बाद पतंजलि का प्रबंधन अब रुचि सोया का ब्रांड वैल्यू के लिवरेज और कई नई श्रेणियों में उतरने की योजना बना रहा है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
गिरती बिक्री को थामने के लिए पतंजलि ने कई तरीके अपनाए। साल 2017 तक ब्रांडेड आउटलेट पर ज्यादा आश्रित फर्म ने अन्य स्टोरों के साथ जुड़कर बाजार में गहराई से जाना शुरू कर दिया। अपनी बिक्री व वितरण को मजबूत करने के लिए पतंजलि ने 11,000 फील्ड कर्मी नियुक्ति किया। साथ ही कंपनी की योजना अपने वितरकों की संख्या भी बढ़ाने की है।