facebookmetapixel
Advertisement
बांग्लादेश में नई सरकार का आगाज: तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे ओम बिरलाBudget 2026 पर PM का भरोसा: ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ वाली मजबूरी खत्म, यह ‘हम तैयार हैं’ वाला क्षण9 मार्च को लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर होगी चर्चाIndia AI Impact Summit 2026: दिल्ली में जुटेगा दुनिया का दिग्गज टेक नेतृत्व, $100 अरब के निवेश की उम्मीदAI इम्पैक्ट समिट 2026: नगाड़ों की गूंज व भारतीय परंपरा के साथ 35,000 मेहमानों का होगा भव्य स्वागतदिल्ली में AI का महाकुंभ: भारत मंडपम में AI इम्पैक्ट समिट सोमवार से, जुटेंगे 45 देशों के प्रतिनिधिकॉरपोरेट इंडिया की रिकॉर्ड छलांग: Q3 में लिस्टेड कंपनियों का मुनाफा 14.7% बढ़ा, 2 साल में सबसे तेजएशियाई विकास बैंक का सुझाव: केवल जरूरतमंदों को मिले सब्सिडी, भ्रष्टाचार रोकने के लिए ऑडिट जरूरीRBI की सख्ती से बढ़ेगी NBFC की लागत, कर्ज वसूली के नए नियमों से रिकवरी एजेंसियों पर पड़ेगा बोझनिवेशकों की पहली पसंद बना CD: कमर्शियल पेपर छोड़ सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट की ओर मुड़ा रुख

6 GHz के उपयोग पर अधिक अध्ययन की जरूरत

Advertisement

दिसंबर में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) ने लाइसेंस प्राप्त मोबाइल परिचालन के लिए 6.425 से 7.125 GHz अलग रखा था।

Last Updated- February 25, 2024 | 11:19 PM IST
6 GHz के उपयोग पर अधिक अध्ययन की जरूरत, More studies needed on use of 6 GHz

दूरसंचार परिचालकों ने हालांकि 5जी आधारित मोबाइल ब्रॉडबैंड संचार के लिए 6 गीगाहर्ट्ज बैंड को तत्काल मुक्त करने की मांग की है, लेकिन सरकार फिलहाल इस मामले पर कोई फैसला लेने को उत्सुक नहीं है। दूरसंचार विभाग के अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि इसके बजाय सरकार को अंतरराष्ट्रीय मोबाइल दूरसंचार (आईएमटी) या वाई-फाई उपयोग के लिए कीमती स्पेक्ट्रम बैंड आवंटित करने के असर का अध्ययन करने के लिए और अधिक वक्त की जरूरत है।

स्पेक्ट्रम के 6 गीगाहर्ट्ज बैंड में अप्रयुक्त स्पेक्ट्रम का सबसे बड़ा ब्लॉक शामिल है तथा 5जी कनेक्टिविटी और वाईफाई विस्तार के लिए इसकी महत्वपूर्ण क्षमता के कारण क्रमश: दूरसंचार कंपनियों और तकनीकी कंपनियों द्वारा इसके लिए मशक्कत की जा रही है। यह 5.925 गीगाहर्ट्ज से लेकर 7.125 गीगाहर्ट्ज तक फैली फ्रीक्वेंसी की विशिष्ट श्रृंखला है, जो एक मध्य-बैंड फ्रीक्वेंसी की रेंज होती है।

दिसंबर में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) ने लाइसेंस प्राप्त मोबाइल परिचालन के लिए 6.425 से 7.125 गीगाहर्ट्ज अलग रखा था। आईटीयू सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी और भारत भी इसका हिस्सा है।

रेडियो स्पेक्ट्रम के उपयोग पर अंतरराष्ट्रीय समझौतों की समीक्षा और संशोधन के लिए हर तीन से चार साल में आयोजित होने वाले 10वें विश्व रेडियो संचार सम्मेलन (डब्ल्यूआरसी-23) में यह निर्णय लिया गया था।

Advertisement
First Published - February 25, 2024 | 11:19 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement