facebookmetapixel
भारत ने अमेरिका के बयान को किया खारिज, कहा: PM मोदी ने ट्रंप से 2025 में आठ बार फोन पर बातचीत कीकेंद्र सरकार ग्रोक चैटबॉट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर कर रही विचार, IT मंत्रालय कर रहा समीक्षाQ3 में मुनाफा कम मगर आय वृद्धि को दम: कॉरपोरेट इंडिया की मिली-जुली तस्वीरED छापे के खिलाफ ममता बनर्जी ने निकाली 10KM लंबी रैली, भाजपा और अमित शाह पर लगाए गंभीर आरोपउत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल की मंडियों में आलू की कीमतें तेजी से गिरीं, किसानों को नहीं मिल रही लागतटैरिफ तनाव से बाजार धड़ाम: सेंसेक्स-निफ्टी में तीन महीने की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावटESOP प्रस्तावों पर Groww कर रही विरोध का सामना, गवर्नेंस पर उठे सवालमौसम, मजदूर व लागत की मार: दार्जिलिंग चाय पर गहराया संकट, 2025 में पैदावार और घटने के स्पष्ट संकेतबैंकों में पड़ी लावारिस जमा राशि पर सरकार सख्त, 14 जनवरी से दावे निपटान की रफ्तार का होगा आकलनUnion Budget 2026 से बड़ी उम्मीद, खपत बढ़ाने और MSMEs को रफ्तार देने पर हो जोर: निर्मल के. मिंडा

मझगांव डॉक 2,000 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी में

Last Updated- December 15, 2022 | 12:53 AM IST

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने न्हावा शेवा बंदरगाह के समीप 37 एकड़ भूमि को आगामी वर्षों के दौरान विकसित करने की योजना बनाई है। इसके जरिये कंपनी तीसरे पक्ष से ऑर्डर हासिल करने की कोशिश करेगी जो फिलहाल शून्य है।
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंधन निदेशक नारायण प्रसाद ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘हम एक सलाहकार को काम पर रखने की प्रकिया में हैं जो इस परियोजना के लिए आवश्यक रकम के साथ-साथ पूरी जांच-परख करते हुए रूपरेखा तैयार करेंगे। हालांकि पूरी रकम की एकमुश्त जरूरत नहीं पड़ेगी और इसलिए हम इस नई परियोजना के लिए तैयार होंगे।’
प्रसाद आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के लिए वर्चुअल तरीके से आयोजित प्रेस वार्ता में बोल रहे थे। कंपनी का आईपीओ 29 सितंबर को खुलेगा और इसके तहत 103 शेयरों का और उसके बाद 103 शेयरों के गुणक में लॉट रखे गए हैं।
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स मुंबई में अपने प्रतिष्ठान के रखरखाव पर सालाना करीब 100 करोड़ रुपये खर्च करती है। प्रसाद ने कहा, ‘हम इस प्रतिष्ठान पर मर्चेंट जहाजों का रखरखाव अथवा मरम्मत करते रहेंगे और न्हावा शेवा बंदरगाह के पास में ही होने के कारण हम उसका फायदा उठाने की भी कोशिश करेंगे।’
प्रारंभिक अध्ययन के अनुसार, यह परियोजना करीब 5-7 वर्षों में पूरी हो जाएगी और इसकी लागत करीब 2,000 करोड़ रुपये होगी। वर्तमान में कंपनी के पास 15,470 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक है जो पूरी तरह से भारतीय नौसेना से मिले हैं। इन सभी ऑर्डर को अगले छह से सात वर्षों के दौरान पूरा करना है।

First Published - September 26, 2020 | 1:07 AM IST

संबंधित पोस्ट