facebookmetapixel
Advertisement
देशव्यापी बैंक हड़ताल में शामिल हुए लाखों कर्मचारी, चेक क्लियरेंस और नकद लेन-देन सेवा हुई प्रभावितशेयर बाजार में लगातार 5वें हफ्ते भी हाहाकार, कच्चे तेल की आग और FII की बिकवाली से सेंसेक्स-निफ्टी पस्तटोल प्लाजा के चक्कर से मिलेगी मुक्ति! बोले गडकरी: बैरियर फ्री टोलिंग से ₹10,000 करोड़ बढ़ेगा राजमार्ग संग्रहदिल्ली में सजा ‘ब्रिक्स बाजार’, एक छत के नीचे दिखा 18 देशों की कला, हस्तशिल्प और संस्कृति का अनूठा संगम‘राजनीतिक झटकों से बचाएगा स्थानीय मुद्रा में व्यापार’, ब्रिक्स में बोले ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियानयूपी में 6,566 करोड़ का निवेश करेंगी तीन वैश्विक पैकेजिंग कंपनियां, मेरठ-उन्नाव में लगेंगी यूनिट‘दुनिया में रुकावटें तो भारत बना रहा आर्थिक पुल’, ब्रिक्स बिजनेस फोरम में बोले PM मोदी: व्यापार बाधाएं खत्म करें देश‘AI दोधारी तलवार, सुरक्षा उपायों के बिना बेकाबू होने का खतरा’, निर्मला सीतारमण ने जताई चिंता‘टैरिफ व संरक्षणवाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा’, ब्रिक्स देशों ने कहा: ये WTO नियमों के खिलाफनई दिल्ली में ब्रिक्स-भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी, 37 स्वदेशी डीप-टेक स्टार्टअप कर रहे निवेशकों से पर चर्चा

Lynk Global लगाएगी आसमान में सेल टॉवर, हर जगह मिलेगा नेटवर्क

Advertisement

यह उपभोक्ताओं के लिए दो अलग-अलग फोन रखने की जरूरत को खत्म करता है - एक सामान्य मोबाइल सेवाओं के लिए और दूसरी उपग्रह आधारित सेवाओं के लिए, जो फिलहाल काफी महंगी है।

Last Updated- April 16, 2023 | 8:35 PM IST
Lynk Global
BS

अमेरिकी मोबाइल प्रौद्योगिकी कंपनी लिंक ग्लोबल (Lynk Global) ने भारतीय दूरसंचार कंपनियों के साथ साझेदारी करने के लिए एक रिपोर्ट दी है, जो दुनिया के पहले पेटेंट युक्त, सीधे वाणिज्यिक उपग्रह से प्रमा​णित और मानक मोबाइल फोन प्रणाली की पेशकश के लिए है। पिछले साल अमेरिका में संघीय संचार आयोग ने इस नई प्रौद्योगिक के तहत लिंक को अब तक का पहला लाइसेंस प्रदान किया था।

लिंक का कहना है कि जिस किसी के पास सामान्य मोबाइल फोन हो, वह अब बिना किसी बाधा या रुकावट के हर जगह संपर्क कायम रख सकता है, जिसमें ‘डार्क स्पॉट’ वाले स्थान भी शामिल हैं अथवा जहां जमीनी मोबाइल नेटवर्क पर कोई कवरेज न हो। कंपनी इन भागों में कवरेज उपलब्ध कराने के लिए छोटे उपग्रह स्थापित कर रही है, जिसे यह ‘आकाश में सेल टॉवर’ कहती है।

यह उपभोक्ताओं के लिए दो अलग-अलग फोन रखने की जरूरत को खत्म करता है – एक सामान्य मोबाइल सेवाओं के लिए और दूसरी उपग्रह आधारित सेवाओं के लिए, जो फिलहाल काफी महंगी है। हालांकि उन्हें और ज्यादा किफायती तथा हल्का-फुल्का बनाने के लिए काम चल रहा है।

यह प्रौद्योगिकी दुनिया भर में उन एक अरब से अधिक लोगों को संपर्क करने के लिए कम लागत वाला तरीका भी प्रदान करेगी, जो मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करते हैं क्योंकि उनके इलाकों में कोई कनेक्टिविटी नहीं होती।

रिलायंस जियो के सामने प्रस्तुत की गई अपनी रिपोर्ट में लिंक ने कारोबारी प्रारूप के बारे में बताया। पहला, मोबाइल नेटवर्क परिचालक को पूंजीगत व्यय और परिचालन व्यय में और खर्च नहीं करना पड़ेगा। दूसरा, लिंक अपने ग्राहकों द्वारा उत्पन्न ट्रैफिक से राजस्व हिस्सेदारी प्राप्त करते हुए पैसा कमाएगी।

मिसाल के तौर पर ग्राहकों के लिए इनबाउंड रोमिंग के वास्ते लिंक रिलायंस जियो का स्पेक्ट्रम साझा करेगी क्योंकि भारत में उसके पास अपना खुद का कोई स्पेक्ट्रम नहीं है।

यह भी पढ़ें : Tata Steel की वित्तीय पैकेज पर ब्रिटेन सरकार से वार्ता अब भी जारी: सीईओ टी वी नरेंद्रन

दूरसंचार कंपनियों का कहना है कि प्रौद्योगिकी की कदमताल पहले से ही काफी तेज है। ऐपल जैसी कंपनियां पहले से ही घोषणा कर चुकी हैं कि आईफोन 14 उपग्रह और स्थलीय सेवाओं की पेशकश करेगा।

लिंक दुनिया भर में तकरीबन 12 मोबाइल नेटवर्क परिचालकों के साथ यह सेवा शुरू करने क लिए अनुबंधों को अंतिम रूप दे रही है। कुछ दिन पहले ही इसने वोडाफोन घाना को सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए टेलीसेल के साथ एक करार किया है, जो 3.1 करोड़ निवासियों के लिए 100 फीसदी मोबाइल कवरेज सुनि​श्चित करेगी।

लेकिन भारतीय दूरसंचार कंपनियों का कहना है कि यहां लिंक की पेशकश से स्पेक्ट्रम संबंधी नियामकीय उलझन के कुछ मसले सामने आएंगे, जिनका सामाधान करने की जरूरत है।

Advertisement
First Published - April 16, 2023 | 8:35 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement