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विमानन कंपनियों का कम होगा घाटा

Last Updated- December 11, 2022 | 9:56 PM IST

कोविड वैश्विक महामारी की तीसरी लहर ने एक बार फिर हवाई यात्रा पर ब्रेक लगा दी है लेकिन घरेलू विमानन कंपनियों को अक्टूबर से दिसंबर तिमाही के दौरान घाटे में कमी आने की उम्मीद है। तिमाही के दौरान हवाई यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी और प्रतिफल भी दमदार रहा था।
सूचीबद्ध विमानन कंपनी इंडिगो और स्पाइसजेट ने एकीकृत तौर पर वित्त वर्ष 2022 की पहली छमाही के दौरान कोविड-19 के प्रभाव और विमान ईंधन (एटीएफ) की लागत में तेजी के कारण 5,901 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया। दूसरी तिमाही में इंडिगो ने 1,435 करोड़ रुपये और स्पाइसजेट ने 562 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया था। तीसरी तिमाही में इन दोनों विमानन कंपनियों के कारोबार में सुधार दिखा।
घरेलू ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही वैश्विक महामारी की शुरुआत के बाद अब तक की बेहतरीन तिमाही रही क्योंकि इस दौरान घरेलू बाजार में तेजी से सुधार दिखा।
दिसंबर में औसत दैनिक उड़ान 89 फीसदी और हवाई यातायात 85 फीसदी पर कोविड पूर्ण स्तर के करीब रहा। महीने के दौरान प्रति उड़ान यात्रियों की संख्या 112 से बढ़कर 128 हो गई। हालांकि विमान ईंधन लागत में क्रमिक आधार पर 12 फीसदी की वृद्धि हुई जिससे परिचालन एवं प्रतिफल परिदृश्य में सुधार से हुए फायदे को झटका लगा।
प्रभुदास लीलाधर ने उम्मीद जताई है कि तीसरी तिमाही के दौरान इंडिगो 470 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज कर सकती है जबकि स्पाइसजेट को 547 करोड़ रुपये का घाटा हो सकता है।
नागर विमानन मंत्रालय ने अक्टूबर में घरेलू क्षमता पर प्रतिबंध को हटा लिया था और विमानन कंपनियों को उनकी निर्धारित उड़ानों में 100 फीसदी क्षमता के साथ परिचालन करने की अनुमति दी थी। निर्धारित अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानों पर प्रतिबंध को बढ़ा दिया गया था। लेकिन हवाई परिवहन बबल समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का परिचालन जारी है।
सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च का मानना है कि तीसरी तिमाही के दौरान इंडिगो के प्रतिफल में क्रमिक आधार पर 4 फीसदी की वृद्धि होगी जबकि स्पाइसजेट के मामले में यह आंकड़ा 7.6 फीसदी रहेगा। कार्गो कारोबार से भी विमानन कंपनियों को राजस्व बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च के अनुसार, जुलाई से सितंबर की अवधि में शीर्ष 25 मार्गों पर सात दिनों के फॉरवार्ड बुकिंग विंडो के तहत किराये में क्रमिक आधार पर 5.3 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि दो महीने की बुकिंग विंडो के तहत किराये में 7.4 फीसदी की वृद्धि हुई। उसने कहा कि प्रतिफल में वास्तविक अंतर मुख्य तौर पर इन बुकिंग विंडो के तहत हुई टिकटों की बुकिंग के अनुपात में तिमाही बदलाव से संचालित होगा। ब्रोकरेज का मानना है कि इंडिगो और स्पाइसजेट को क्रमश: 380 करोड़ रुपये और 444 करोड़ रुपये का घाटा होगा।
एचएसबीसी ग्लोबल रिसर्च के अनुसार, दो नई विमानन कंपनियों (आकाश और जेट एयरवेज 2.0) के लॉन्च होने और टाटा समूह द्वारा एयर इंडिया के अधिग्रहण के मद्देनजर आगे चलकर प्रतिफल परिदृश्य प्रमुख मुद्दा रहेगा।

First Published - January 18, 2022 | 11:27 PM IST

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