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पिछड़ गईं एफएमसीजी कंपनियां

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Last Updated- December 12, 2022 | 8:17 AM IST

बीएसई एफएमसीजी इंडेक्स का हालिया प्रदर्शन बताता है कि इक्विटी निवेशकों का नजरिया भारत में उपभोग में होने वाली बढ़त को लेकर तेजी का नहीं है। हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी, नेस्ले, ब्रिटानिया, डाबर, कोलगेट पामोलिव और टाटा कंज्यूमर जैसी अग्रणी एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों को ट्रैक करने वाला बीएसई एफएमसीजी इंडेक्स बड़े अंतर से बाजार से पिछड़ गया है।
एफएमसीजी इंडेक्स पिछले साल दिसंबर के मध्य से स्थिर बना हुआ है और एक्सचेंजों पर बजट के बाद आई तेजी में शायद ही भागीदारी की है। बजट के बाद से यह इंडेक्स 2.4 फीसदी चढ़ा है जबकि सेंसेक्स में 11.4 फीसदी की उछाल आई है। इसकी तुलना में बेंचमार्क सेंसेक्स पिछले दो महीने में करीब 12 फीसदी चढ़ा है, जिसमें साइक्लिकल और हाई बीटा वाले क्षेत्रों मसलन बैंक, एनबीएफसी, ऑटोमोटिव, धातु और पूंजीगत सामान क्षेत्र के शेयरों में आई अच्छी तेजी का योगदान रहा है।
उधर, एफएमसीजी इंडेक्स कोविड-19 के बाद के शुरुआती दिनों में आई तेजी में अग्रणी प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहा है। पिछले साल मार्च और सितंबर के बीच इस इंडेक्स ने व्यापक बाजार के मुकाबले उम्दा प्रदर्शन किया है।
हालिया कमजोर प्रदर्शन ने हालांकि इस क्षेत्र को पीछे ला दिया। पिछले 12 महीने में एफएमसीजी इंडेक्स महज 8.5 फीसदी चढ़ा है जबकि इस अवधि में सेंसेक्स में 25 फीसदी की तेजी दर्ज हुई है। बाजार पूंजीकरण के लिहाज से सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर बजट के बाद से एक फीसदी टूटा है और पिछले दो महीने में इसमें 5.6 फीसदी की गिरावट आई है। ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज तेजी के शुरुआती दिनों में अच्छा प्रदर्शन करने वालों में थी, लेकिन बजट के बाद से यह 2.3 फीसदी टूटा है और पिछले दो महीने में इसमें 8.3 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह नेस्ले इंडिया का शेयर 20 दिसंबर के बाद से 6 फीसदी नीचे आया है। इसकी तुलना में आईटीसी, डाबर और नेस्ले में बजट के बाद तेजी आई है।
विश्लेषक इसकी वजह बाजार के चक्र को बताते हैं। नारनोलिया सिक्योरिटीज के सीआईओ शैलेंद्र कुमार ने कहा, पिछले तीन साल से ज्यादातर बड़े निवेशकों का एफएमसीजी कंपनियों में काफी निवेश था, इसकी वजह अन्य क्षेत्र की आय की रफ्तार को लेकर सुरक्षा का मामला था। इसके परिणामस्वरूप एफएमसीजी शेयरों में ज्यादा खरीदारी हुई थी। अब यह कम हो गया है कक्योंकि महामारी के कारण साइक्लिकल मसलन बैंक, ऑटो व मेटल का प्रदर्शन बेहतर हुआ।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि गैर-एफएमसीजी क्षेत्रों ने भी एफएमसीजी कंपनियों के मुकाबले आय में बेहतर बढ़ोतरी दर्ज की है। उदाहरण के लिए अब तक तीसरी तिमाही के नतीजे घोषित करने वाली निफ्टी की 40 कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 31 फीसदी बढ़ा है। इसकी तुलना में एफएमसीजी कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ दिसंबर तिमाही में सालाना आधार पर 12 फीसदी बढ़ा है।
एफएमसीजी कंपनियों का परिचालन मार्जिन दिसंबर तिमाही में 25.6 फीसदी की रिकॉर्ड ऊंचाई पर था, जो सालाना आधार पर कच्चे माल की लागत व कर्मचारी लागत में आई कमी के कारण देखने को मिला। सालाना आधार पर मार्जिन 160 आधार अंक ज्यादा रहा।
एफएमसीजी कंपनियों की संयुक्त बिक्री सालाना आधार पर इस दौरान 2.8 फीसदी बढ़ी, जो दूसरी तिमाही की सालाना रफ्तार 4.8 फीसदी के मुकाबले कम है।  
विश्लेषकों ने कहा कि बढ़ती इनपुट लागत को समायोजित करने के लिए इन कंपनियों के राजस्व में तेज बढ़त दर्ज करनी होगी।

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First Published - February 14, 2021 | 9:22 PM IST

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