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जेट के लेनदारों को तगड़ी चपत

Last Updated- December 12, 2022 | 3:10 AM IST

जेट एयरवेज के वित्तीय ऋणदाताओं को अपने फंसे कर्ज का करीब 95 फीसदी नुकसान उठाना होगा। कंपनी के सफल बोलीदाता जालान-कैलरॉक कंसोर्टियम ने 385 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव दिया है जबकि ऋणदाताओं ने कुल 7,807.74 करोड़ रुपये का दावा किया था।
इनमें से 185 करोड़ रुपये कंपनी का परिचालन शुरू होने के 180 दिन के अंदर चुकाए जाएंगे और 195 करोड़ रुपये के लिए दो साल बाद जीरो कूपन बॉन्ड जारी किए जाएंगे, जिनका अंकित मूल्य 1,000 रुपये होगा। कंसोर्टियम ने गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर के तौर पर 391 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी। इसने ऋणदाताओं को जेट एयरवेज में 9.5 फीसदी हिस्सा और लॉयल्टी कार्यक्रम जेट प्रिवलिज में 7.5 फीसदी हिस्सा देने की भी बात कही है। भारतीय ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया बोर्ड (आईबीबीआई) के आंकड़ों के अनुसार 2017 से एनसीएलटी में 363 से ज्यादा मामले भेजे एग थे, जिनमें से बैंकों को औसतन 80 फीसदी से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा। डेक्कन क्रोनिकल (94 फीसदी), जिऑन स्टील (99 फीसदी) और लैंको इन्फ्रा (88 फीसदी) जैसी कंपनियों के मामले में ऋणदाताओं को सबसे ज्यादा चपत लगी है।
एक बैंक के अधिकारी ने कहा, ‘विमानन जैसे सेवा क्षेत्र की कंपनियां कम परिसंपत्ति के साथ परिचालन करती हैं और उनके ज्यादातर विमान पट्टे पर होते हैं। ऐसी स्थिति में परिसमापन से और भी कम वसूली होने का जोखिम रहता है और कंपनी भी उबर नहीं पाती है।’ जेट एयरवेज ने अप्रैल 2019 में अपना परिचालन बंद कर दिया था और पिछले साल अक्टूबर में मुरारी लाल जालान और कैलरॉक कैपिटल के समाधान प्रस्ताव को ऋणदाताओं की समिति ने 98 फीसदी मतों के साथ मंजूरी दी थी।

First Published - June 30, 2021 | 11:53 PM IST

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