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आरोग्य संजीवनी में बीमा की सीमा हटी

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Last Updated- December 15, 2022 | 5:09 AM IST

मानक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के दायरे में विस्तार करने के लिए प्रत्येक सामान्य बीमाकर्ताओं और स्वास्थ्य बीमाकर्ताओं को आरोग्य संजीवनी नाम से योजना उतारने की सिफारिश की गई थी। बीमा नियामक ने बीमा कंपनियों को बीमित राशि तय करने की स्वच्छंदता दे दी है। इसके बाद अब कंपनियां बीमाकर्ताओं को पॉलिसीधारकों के समक्ष पहले से निर्धारित बीमित राशि की सीमा से कम और अधिक की पेशकश करने के लिए कह सकती हैं।  
नियामक ने अब कहा है कि बीमाकर्ता पॉलिसी के लिए 1 लाख रुपये से कम और 5 लाख रुपये की ऊपरी सीमा से अधिक की बीमित राशि की पेशकश कर सकते हैं। नियामक ने इस साल जनवरी में मानक स्वास्थ्य उत्पाद के लिए जो दिशानिर्देश जारी किए थे उसमें बीमित राशि की न्यूनतम सीमा 1 लाख रुपये और अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये तय की गई थी। बीमा नियामक ने कहा, ‘आम जनता को और अधिक सुविधा देने के लिए बीमाकर्ताओं को न्यूतम बीमित राशि 1 लाख रुपये से कम और अधिकतम राशि 5 लाख रुपये से अधिक की पेशकश करने की अनुमति दी जाती है। बीमित रकम का निर्धारण बीमाकर्ताओं के जोखिम अंकन नीति के अधीन होगी। बीमित रकम का विकल्प केवल 50,000 रुपये के गुणज में ही होगा।’
बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी तपन सिंघल ने कहा, ‘ग्राहकों के पास चुनाव का जितना अधिक विकल्प होता है उतने ही अच्छे तरीके से वे अपनी जरूरत के मुताबिक कवर का चुनाव कर पाते हैं। इस कदम से बीमाकर्ताओं के पास बीमित राशि के लिए व्यापक दायरा मौजूदा होगा जिसकी शुरुआत 50,000 रुपये से होगी और उसकी अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये तक ही सीमित नहीं होगी। इसके अलावा, चूंकि यह ‘यूज ऐंड फाइल’ की स्थिति में है जिससे यह बदलाव शीघ्र ही लागू हो जाएगा।’ 
पॉलिसीबाजारडॉटकॉम के स्वास्थ्य विभाग में कारोबारी प्रमुख अमित छाबड़ा ने कहा, ‘जब पॉलिसी लाई गई थी, तब इसके साथ एक समस्या इसकी बीमित राशि की अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये का होना था। उत्पाद को लेकर मिलने वाली प्रतिक्रियाओं में से यह एक थी।’
उन्होंने कहा कि आरोग्य संजीवनी के ग्राहकों से हमें मुख्य तौर पर तीन प्रतिक्रिया मिली है। इनमें से पहला है बीमित राशि जिसका समाधान कर दिया गया है, दूसरा मुद्दा है 5 फीसदी का अनिवार्य सह भुगतान जो बहुत सारे ग्राहकों को पसंद नहीं आ रहा है और तीसरा कमरे के किराये की सीमा है। 
इस पॉलिसी को उतारने का उद्देश्य बीमा के दायरे से बाहर रह गए लोगों में बीमा पहुंचना था, लेकिन इसे लेकर कोई खास उत्साह नहीं दिखा।

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First Published - July 8, 2020 | 12:03 AM IST

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