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सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में बढ़ेगी बीमा राशि? वित्त मंत्रालय से हितधारकों ने की बड़ी सिफारिश

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बढ़ती महंगाई को देखते हुए बैंकों और बीमा कंपनियों ने सरकार से पीएमजेजेबीवाई और पीएमएसबीवाई योजनाओं के तहत मिलने वाली बीमा राशि को बढ़ाने का आग्रह किया है

Last Updated- March 06, 2026 | 9:52 PM IST
Reserve Bank of India (RBI)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

बढ़ती महंगाई और कमजोर होते परिवारों की स्थिति को देखते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों सहित हितधारकों ने वित्त मंत्रालय से प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) और प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) जैसी प्रमुख सामाजिक सुरक्षा बीमा योजनाओं के तहत बीमा राशि बढ़ाने का आग्रह किया है।

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) द्वारा पिछले महीने बुलाई गई बैठक में भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई)) और ग्रामीण विकास मंत्रालय  सहित मंत्रालयों ने भी सरकार के ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयासों के तहत भाग लिया।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘यह स्पष्ट रूप से देखा गया है कि कवरेज का काफी विस्तार हुआ है, लेकिन माइक्रो-इंश्योरेंस उत्पादों के तहत बीमा राशि बढ़ाए जाने की जरूरत है, जिससे यह सार्थक बनी रहे।’

वित्त मंत्रालय को भेजे गए एक ईमेल का जवाब नहीं मिल सका।

बीएमएसबीवाई में 56.2 करोड़ पंजीकरण हुआ है, जबकि पीएमजेजेबीवाई में 26.3 करोड़ पंजीकरण हुए हैं। जन सुरक्षा पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पंजीकरण से योजनाएं और सुव्यवस्थित हुई हैं।  कृषि सेग्मेंट मं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) ने 5.5 करोड़ किसानों को कवरेज दिया है, जिसमें 5.3 करोड़ रबी सीजन के दौरान हैं। इससे फसल बीमा की पहुंच का पता चलता है।

वहीं आयुष्मान भारत आईडी 8 करोड़ पार पहुंच गई है, जिससे स्वास्थ्य बीमा में मजबूती आई है। हालांकि सूत्रों ने कहा कि प्रगति के बावजूद व्यापक बीमा समावेशन प्राप्त करने में पर्याप्त अंतर बना हुआ है।  

अधिकारी ने कहा, ‘विचार-विमर्श के दौरान प्राप्त सुझावों में कहा गया है कि जन जीवन बीमा योजना, सुरक्षा बीमा योजना, फसल बीमा और आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं समावेशन को बढ़ा रही हैं, लेकिन पैठ गहरा करने के लिए और अधिक करने की आवश्यकता है।’

एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘उद्देश्य केवल नामांकन संख्या नहीं है, बल्कि सार्थक वित्तीय सुरक्षा है। जैसे-जैसे हम 2047 की ओर बढ़ रहे हैं, बीमा कवरेज पर्याप्त, सुलभ और किफायती होना चाहिए।’

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First Published - March 6, 2026 | 9:52 PM IST

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