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सेमीकंडक्टर में भारत का बड़ा दांव

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अगले 2-4 वर्षों में 30 अरब डॉलर का संभावित निवेश

Last Updated- September 06, 2024 | 10:50 PM IST
semiconductor Chip

वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में भारत बड़ी छलांग लगाने वाला है। अगर इस सप्ताह घोषित, स्वीकृत एवं चर्चा वाली सभी परियोजनाएं फलीभूत हुईं तो उद्योग के अनुमानों के अनुसार भारत में अगले दो से चार वर्षों के दौरान इस क्षेत्र में करीब 30 अरब डॉलर का निवेश होगा। इसमें से करीब 60 फीसदी परियोजनाओं को केंद्रीय कैबिनेट से हरी झंडी पहले ही मिल चुकी है।

यह सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नए संयंत्रों की स्थापना और पुराने संयंत्रों में क्षमता विस्तार पर किए गए 500 अरब डॉलर के नए निवेश का 5 से 6 फीसदी होगा। भारत के लिए यह एक बड़ी बात होगी क्योंकि वह करीब 17 वर्षों के कई असफल प्रयासों के बाद इस क्षेत्र में काफी देरी से दस्तक देने जा रहा है।

महाराष्ट्र सरकार ने इजरायल की प्रमुख फैब कंपनी टावर सेमीकंडक्टर के दो चरणों में 86,947 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव को गुरुवार को मंजूरी दी है। इसके तहत अदाणी के साथ मिलकर पनवेल में संयंत्र स्थापित करने की योजना है। हालांकि आईएसएम द्वारा केंद्र सरकार की सेमीकंडक्टर योजना के तहत मंजूरी एवं सब्सिडी के लिए इस परियोजना का मूल्यांकन अभी भी किया जा रहा है।

महज एक दिन पहले ही इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जर्मनी की प्रमुख फैब कंपनी इन्फीनियन के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की थी। कंपनी वैफर्स से लेकर सिलिकन कार्बाइड चिप्स तक के उत्पादन के लिए एक पावर सेमीकंडक्टर चिप संयंत्र स्थापित करने की संभावनाएं तलाश रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस परियोजना के लिए करीब 2 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।

इसी सप्ताह केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केनेस सेमीकॉन द्वारा 3,400 करोड़ रुपये के निवेश से ओएसएटी संयंत्र स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। यह कारखाना गुजरात के साणंद में स्थापित किया जाएगा जहां वैश्विक चिप विनिर्माताओं के साथ क्षमता पहले ही तय हो चुकी है।

जाहिर तौर पर वैष्णव ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। वह अगले 5 साल में 4 से 6 फैब संयंत्र और 6 से 10 कंपाउंड सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित करना चाहते हैं। इसके अलावा ओएसएटी/ एटीएमपी में अगले 5 साल के दौरान वैश्विक बाजार का 10 फीसदी और 10 वर्षों में 25 फीसदी हिस्सा हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार द्वारा चार परियोजनाओं को मंजूरी देने के बाद उसकी 75,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी योजना की रकम लगभग खत्म हो चुकी है। इन परियोजनाओं में माइक्रोन का ओएसएटी संयंत्र, टाटा का फैब एवं ओएसएटी कारखाना, गुजरात में सीजी पावर का ओएसएटी कारखाना और अब केनेस की परियोजना शामिल हैं। इस सब्सिडी योजना के तहत फैब एवं ओएसएटी संयंत्र स्थापित करने पर 50 फीसदी लागत देने की पेशकश की गई थी।

अब यदि अदाणी-टावर और इन्फीनियन की संभावित परियोजनाओं को मंजूरी मिल जाती है तो उन्हें सब्सिडी प्रदान करने के लिए अतिरिक्त रकम की जरूरत होगी। हालांकि वैष्णव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इस तरह के रणनीतिक क्षेत्र के लिए रकम की कोई समस्या नहीं होगी।

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First Published - September 6, 2024 | 10:50 PM IST

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