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Indian Railways ने रेल हादसों को रोकने के लिए उठाया बड़ा कदम, Loco Pilot को दी जाएगी खास ट्रेनिंग

रेलवे बोर्ड ने सुझाव दिया है कि CLI हर छह महीने में एक दिन का गहन परामर्श लोको पायलट और उनके सहायकों के लिए आयोजित करें, जिसमें ऑटोमेटिक सिग्नल की ट्रनिंग दी जाए।

Last Updated- July 16, 2024 | 9:18 AM IST
Train Accident
Representative Image

रेलवे बोर्ड ने सभी मंडलों से कहा है कि ‘लोको पायलट’ (Loco Pilot) की ट्रेनिंग में यूनिफॉर्मिटी लाएं, खासकर ऑटोमेटिक सिग्नल क्षेत्र में। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल की ट्रेन दुर्घटनाओं के बाद यह जरूरी हो गया है, क्योंकि जांच में सिग्नल की विफलता को भी एक कारण पाया गया है।

बोर्ड ने जारी किया सर्कुलर
रेलवे बोर्ड ने 13 जुलाई को जारी एक सर्कुलर में कहा, “विभिन्न रेलवे मंडल ऑटोमेटिक सिग्नल क्षेत्र में कामकाज के सिलसिले में ‘रनिंग स्टाफ’ के लिए अलग-अलग प्रशिक्षण व्यवस्था का पालन कर रहे हैं। मानकीकरण के लिए रेलवे मंडलों को संलग्न प्रशिक्षण व्यवस्था का पालन करने की सलाह दी जाती है।”

काउंसलिंग में इन मुद्दों पर दिया जाए ध्यान
रेलवे बोर्ड ने सुझाव दिया है कि चीफ लोको इंस्पेक्टर (CLI) हर छह महीने में एक दिन का गहन परामर्श लोको पायलट और उनके सहायकों के लिए आयोजित करें, जिसमें स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली के बारे में जानकारी दी जाए। इसके बाद एक योग्यता परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए, जिसमें बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) होंगे।

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बोर्ड के अनुसार, गहन परामर्श के दौरान निम्नलिखित मुद्दों पर जोर दिया जाना चाहिए: ‘स्वचालित सिग्नलिंग क्षेत्र में काम करने की प्रणाली’, ‘स्वचालित सेक्शन में असामान्य कामकाज के दौरान जारी किए गए सभी संबंधित फॉर्म और निर्धारित गति सीमाएं’, और ‘ट्रेनिंग के दौरान की गई गलतियों पर आधारित एनीमेटेड वीडियो बनाए जाएंगे’।

हर छह महीने में हो काउंसलिंग
रेलवे बोर्ड ने यह भी निर्देश दिया है कि जब भी नई स्वचालित सिग्नलिंग क्षेत्र के परिचय की सूचना मिले, तो चीफ लोको इंस्पेक्टर (CLI) सभी लोको पायलट्स (LPs) और सहायक लोको पायलट्स (ALPs) के लिए दो दिन का ट्रेनिंग सेशन आयोजित करेंगे और उन्हें स्वचालित सेक्शन में काम करने के लिए एक दक्षता प्रमाणपत्र जारी करेंगे।

रेलवे बोर्ड ने यह भी निर्देश दिया है कि नई स्वचालित क्षेत्र के चालू होने के बाद पहले साल के दौरान हर दो महीने में सभी लोको पायलट्स (LPs) और सहायक लोको पायलट्स (ALPs) की गहन काउंसलिंग सुनिश्चित की जाए। इसके बाद, हर छह महीने में यह काउंसलिंग की जाएगी।

इसके अलावा, बोर्ड ने Zonal Railway Training Institute (ZRTI) में चीफ लोको इंस्पेक्टर (CLIs) के लिए हर तीन साल में तीन दिन का ट्रेनिंग कार्यक्रम भी सुझाया है।

IRISET में तीन दिन का प्रशिक्षण

रेलवे बोर्ड ने बताया कि भारतीय रेल सिग्नल इंजीनियरिंग और दूरसंचार संस्थान (IRISET) में चीफ लोको इंस्पेक्टर (CLI) के लिए मौजूदा दो दिन के प्रशिक्षण मॉड्यूल को अब तीन दिन का कर दिया गया है, ताकि ऑटोमेटिक सिग्नलिंग पर अधिक व्यापक ट्रेनिंग दी जा सके।

MCQ टेस्ट की सुविधा

बोर्ड ने यह भी कहा कि ‘चालक दल’ ऐप और कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम पर प्रमाणपत्र देने के लिए MCQ टेस्ट की सुविधा पहले ही प्रदान की जा चुकी है। इस ऐप का उपयोग चालक दल और CLI द्वारा किया जा सकता है।

स्व-मूल्यांकन के लिए सुविधा

बोर्ड के अनुसार, CLI एक दिन के गहन प्रशिक्षण के बाद कर्मचारियों का परीक्षण करने के लिए इस सुविधा का उपयोग कर सकते हैं। चालक दल भी हर दो महीने में स्वयं का परीक्षण कर सकते हैं, जिससे CLI को उनकी कमजोरियों का मूल्यांकन करने में मदद मिलेगी।

First Published - July 16, 2024 | 9:18 AM IST

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