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आईबीसी का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं कर रहीं कंपनियां: IBBI चेयरपर्सन रवि मित्तल

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आईबीबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि करीब 80 फीसदी कॉरपोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉलूशन प्रॉसेस (सीआईआरपी) ऐसे हैं, जिसमें चूक 1 करोड़ रुपये से कम है।

Last Updated- January 30, 2025 | 10:51 PM IST

भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के चेयरपर्सन रवि मित्तल ने गुरुवार को कहा कि भारत की कंपनियों को अभी ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवाला संहिता (आईबीसी) का इस्तेमाल सीखना है। उन्होंने कहा कि अगर कंपनियों को जो भी समस्याएं हो रही हैं नियामक बाधाओं के समाधान के लिए इनके अध्ययन को इच्छुक है।

एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए मित्तल ने कहा, ‘भारत में ज्यादातर मामलों में कर्जदाता दिवाला प्रक्रिया के लिए जाते हैं। बेहतर यह होता कि कंपनियां सामने आएं, क्योंकि वह ऐसे समय होगा, जब मूल्य ह्रास सबसे कम होता है।’
विकसित देशों के साथ दिवाला आंकड़ों की तुलना करते हुए आईबीबीआई के प्रमुख ने कहा कि अमेरिका में 66,000 इंसॉल्वेंसी आवेदनों में से करीब 63,000 आवेदन स्वेच्छा से कंपनियों ने खुद किए हैं। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि इंसॉल्वेंसी कोई प्रतिकूल प्रक्रिया नहीं है।

आईबीबीआई के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2024 तक 3,706 इंसॉल्वेंसी आवेदन की पहल वित्तीय कर्जदाताओं द्वारा, 3,812 ऑपरेशनल क्रेडिटर्स द्वारा और सिर्फ 480 आवेदन कॉरपोरेट कर्जदार (कंपनियों) द्वारा खुद किए गए हैं।

आईबीबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि करीब 80 फीसदी कॉरपोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉलूशन प्रॉसेस (सीआईआरपी) ऐसे हैं, जिसमें चूक 1 करोड़ रुपये से कम है। इसमें आवेदन की पहल ऑपरेशनल कर्जदाताओं द्वारा की गई है। आईबीबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि कॉरपोरेट कर्जदारों या कंपनियों द्वारा सीआईआरपी पहल की हिस्सेदारी समय के साथ कम हुई है। मित्तल ने कहा कि 11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के मामलों का आईबीसी से समाधान प्रवेश स्तर से पहले ही मामले वापस लेने से हुआ है, जिससे पता चलता है कि आईबीसी ने कर्जदार व कर्जदाता के संबंधों में बदलाव किया है।

उन्होंने कहा, ‘कानून का भय होना, उसका इस्तेमाल किए जाने से बेहतर है। आज लोग चूक करना नहीं चाहते।’ मित्तल ने कहा कि पिछले 8 वर्षों में आईबीसी ने कंपनियों को बाहर निकलने का सबसे अच्छा तंत्र दिया है और कर्जदाताओं को 3.6 लाख करोड़ रुपये लौटाए हैं, जिससे बैंक अधिक ऋण देने में सक्षम हुए हैं।

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First Published - January 30, 2025 | 10:51 PM IST

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