facebookmetapixel
2025 में भारत के शीर्ष 20 स्टार्टअप ने फंडिंग में बनाई बढ़त, पर छोटे स्टार्टअप को करना पड़ा संघर्षReliance Q3FY26 results: आय अनुमान से बेहतर, मुनाफा उम्मीद से कम; जियो ने दिखाई मजबूतीभारत-जापान ने शुरू किया AI संवाद, दोनों देशों के तकनीक और सुरक्षा सहयोग को मिलेगी नई रफ्तारभारत अमेरिका से कर रहा बातचीत, चाबहार बंदरगाह को प्रतिबंध से मिलेगी छूट: विदेश मंत्रालयIndia-EU FTA होगा अब तक का सबसे अहम समझौता, 27 जनवरी को वार्ता पूरी होने की उम्मीदStartup India के 10 साल: भारत का स्टार्टअप तंत्र अब भी खपत आधारित बना हुआ, आंकड़ों ने खोली सच्चाई‘स्टार्टअप इंडिया मिशन ने बदली भारत की तस्वीर’, प्रधानमंत्री मोदी बोले: यह एक बड़ी क्रांति हैसरकार की बड़ी कार्रवाई: 242 सट्टेबाजी और गेमिंग वेबसाइट ब्लॉकआंध्र प्रदेश बनेगा ग्रीन एनर्जी का ‘सऊदी अरब’, काकीनाडा में बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा अमोनिया कॉम्प्लेक्सBMC Election: भाजपा के सामने सब पस्त, तीन दशक बाद शिवसेना का गढ़ ढहा

विनिवेश और आईपीओ को हरी झंडी!

Last Updated- December 07, 2022 | 1:03 PM IST

सरकार को करार मिलने और वामदलों का विरोध खत्म होने से सरकार को उम्मीद है कि अब आर्थिक सुधारों की गाड़ी पटरी पर दौड़ने लगेगी।


सरकारी तेल कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) और पनबिजली कंपनी एनएचपीसी की अरसे से लंबित आईपीओ इस साल के अक्टूबर तक आने की संभावना है। इन कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात की जानकारी दी।

शेयरों को पब्लिक में बेचने के बाद इन कंपनियों को अपनी इक्विटी पूंजी का विस्तार करने में मदद मिलगी। इन पूंजी के जरिए कंपनी अपनी आगामी विस्तार को अमलीजामा पहना सकती है। इक्विटी बेचने के  अलावा, सरकार इस बात की भी उम्मीद कर रही है कि अतिरिक्त 2000 करोड रुपये की उगाही के लिए ओआईएल के 10 प्रतिशत हिस्से को इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को वितरित कर दिए जाएं।

इसके अतिरिक्त 800 करोड रुपये की उगाही के लिए एनएचपीसी में भी 5 प्रतिशत की हिस्सेदारी का विभाजन कर दूसरी कंपनियों में शामिल किया जा सकता है। वैसे यह किन कंपनियों को दिया जाएगा, उसके नाम का खुलासा नहीं हो पाया है। एनएचपीसी के 5 प्रतिशत हिस्सेदारी किसे दी जाएगी, उसके स्पष्ट होने का समय तो अभी नही है, जबकि शेयरों को बेचकर जो पैसा इकट्ठा किया जाएगा, वह तो कंपनी को ही मिलेगा। आगे ऐसे भी कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार पैसे उगाहने के लिए विनिवेश की प्रक्रिया भी अपना सकती है।

एक अधिकारी ने बताया कि ये सारा माजरा पैसे से जुडा हुआ है। कंपनी और सरकार, दोनों को पैसे की दरकार है। सरकार यह भी चाह रही है कि इन कंपनियों में सार्वजनिक कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ाई जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा पैसे का जुगाड़ किया जाए, लेकिन वामदलों के विरोध के कारण ऐसा संभव नही हो पाया था। अब जब सरकार ने बगैर वामदलों के समर्थन की अपनी बहुमत लोकसभा में साबित कर दी है, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इन कंपनियों में निवेश और आईपीओ के रास्ते खुल जाएंगे। 

एक अधिकारी ने बताया कि इन कंपनियों के छह स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति की जा चुकी है। उम्मीद है कि इस सप्ताह के अंत तक इस संबंध में पत्र भी प्रेषित कर दिए जाएंगे। अब इसके बाद सेबी के पास जाएंगे और अक्टूबर तक आईपीओ आ जाएगा।

ओआईएल और एनएचपीसी के आईपीओ अक्टूबर तक लाने की योजना
वामदलों से पाला छूटने के बाद विनिवेश योजना को भी मिलेगा बल
शेयरों की बिक्री से मिली पूंजी से कंपनियां विस्तार कार्यक्रमों को देंगी अंजाम

First Published - July 24, 2008 | 12:08 AM IST

संबंधित पोस्ट