रूस की गैजप्रोम द्वारा गेल इंडिया की तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की जरूरतों में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान दिए जाने के बावजूद इस बात के आसार हैं कि गेल इंडिया संभावित आपूर्ति व्यवधानों और प्रतिबंधों से अछूती रहेगी। विशेषज्ञों और सूत्रों ने इस बात का संकेत दिया है। यूरोपीय अर्थव्यवस्था अपनी गैस जरूरतों के लगभग 57 प्रतिशत भाग के लिए रूसी आपूर्ति पर निर्भर रहती हैं, जिसे उद्योग के विशेषज्ञ अमेरिका से ली जाने वाली अपनी एलएनजी की बिक्री यूरोपीय बाजार में करने के लिए एक कारोबारी अवसर के रूप में देख रहे हैं।
इस संबंध में कंपनी के एक अधिकारी ने सवालों का जवाब नहीं दिया। सूत्रों ने कहा कि भले ही प्रतिबंधों से गैस क्षेत्र पर असर पड़े, लेकिन गेल इंडिया पर इसका कोई असर होने की आशंका नहीं है, क्योंकि सिंगापुर में रूस की दिग्गज कंपनी गैजप्रोम की तीसरे स्तर की सहायक कंपनी – गैजप्रोम मार्केटिंग ऐंड ट्रेडिंग सिंगापुर (जीएमऐंडटीएस) के साथ इसका दीर्घकालिक समझौता है। गेल के पूर्व चेयरमैन और प्रबंध निदेशक बीसी त्रिपाठी ने कहा ‘गेल यूरोप में काफी बिक्री कर ही है। कंपनी के सामने अमेरिका से आयात करने के बाद यूरोपीय बाजार में और अधिक एलएनजी बेचने का विकल्प होगा। जब तक अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर असर नहीं पड़ता, तब तक इस बात की संभावना नहीं है कि कोई असर पड़ेगा।’
गेल तकरीबन 89 एमएमएससीएमडी रिगैसीफाइड एलएनजी का प्रबंधन करती है। इस वित्तय वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान प्राकृतिक गैस के विपणन से कंपनी का परिचालन लाभ उछलकर 1,750 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले की अवधि में इसे 74 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
हाजिर दामों में इजाफा होने के आसार हैं, क्योंकि वैश्विक प्राकृतिक गैस उत्पादन में रूस का योगदान लगभग 17 प्रतिशत और गैस निर्यात में लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा रहता है।