facebookmetapixel
Advertisement
भारत की तेल जरूरतें क्यों पूरी नहीं कर पा रहा ईरानी क्रूड ऑयल? चीन की ओर मुड़े जहाजलाइन लगाने की जरूरत नहीं, घर पहुंचेगा गैस सिलेंडर: सीएम योगी आदित्यनाथऑल टाइम हाई के करीब Oil Stock पर ब्रोकरेज सुपर बुलिश, कहा- खरीद लें, 65% और चढ़ने का रखता है दमBharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिक

Gautam Adani और उनके भाई राजेश को बॉम्बे हाई कोर्ट से क्लीन चिट, 388 करोड़ रुपये का केस हुआ खारिज

Advertisement

2012 में SFIO द्वारा दायर चार्जशीट में अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) और अदाणी ग्रुप पर स्टॉकब्रोकर केतन पारेख के साथ मिलकर शेयर प्राइस मैनिपुलेशन का आरोप लगाया गया था।

Last Updated- March 17, 2025 | 2:35 PM IST
Gautam Adani and Rajesh Adani
AEL के चेयरमैन गौतम अदाणी और मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश अदाणी को SFIO केस से बरी कर दिया।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) के चेयरमैन गौतम अदाणी और मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश अदाणी को SFIO केस से बरी कर दिया। इस मामले में उन पर AEL के शेयर प्राइस में हेरफेर का आरोप था।

Bar and Bench की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस राजेश एन लाढ़ा ने सेशंस कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें अदाणी और AEL को मामले से मुक्त करने से इनकार कर दिया गया था। इस केस में ₹388 करोड़ के मार्केट रेगुलेशन वॉयलेशन के आरोप थे।

अदाणी ग्रुप और AEL ने सेशंस कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनके पक्ष में सीनियर एडवोकेट अमित देसाई और विक्रम ननकानी ने दलील दी कि इस मामले में आगे की कार्यवाही का कोई आधार नहीं है।

2012 में SFIO द्वारा दायर चार्जशीट में अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) और अदाणी ग्रुप पर स्टॉकब्रोकर केतन पारेख के साथ मिलकर शेयर प्राइस मैनिपुलेशन का आरोप लगाया गया था। यह मामला भारत के सबसे बड़े स्टॉक मार्केट घोटाले (1999-2000) से जुड़ा है।

2014 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अदाणी ग्रुप और AEL को आरोपों से बरी कर दिया था। हालांकि, नवंबर 2019 में मुंबई की सेशंस कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया। कोर्ट ने SFIO की जांच को प्राइमा फेसी” (prima facie) सही मानते हुए कहा कि अदाणी ग्रुप के प्रमोटर्स ने कथित रूप से ₹388.11 करोड़ और केतन पारेख ने ₹151.40 करोड़ का अवैध लाभ कमाया था।

यह भी पढ़ें: Adani Group की बड़ी तैयारी! 2026 के लिए बनाया महाप्लान, ₹1.1 लाख करोड़ का निवेश, जानें पूरी रणनीति

मुंबई सेशंस कोर्ट के जज D E Kothalikar ने पहले अदाणी ग्रुप के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार माना था। इसके बाद, दिसंबर 2019 में हाई कोर्ट ने सेशंस कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी, जिसे बार-बार बढ़ाया गया और आखिरकार सोमवार को अंतिम फैसला सुनाया गया।

फरवरी 2023 में, हाई कोर्ट ने SFIO (Serious Fraud Investigation Office) से देरी को लेकर सवाल किया। SFIO, जो कि केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत आता है, को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने पूछा कि 10 फरवरी 2022 के बाद से कोई सुनवाई क्यों नहीं हुई, जब अंतरिम रोक बढ़ाई गई थी। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या इस मामले में कोई कार्रवाई न करने का कारण “बाहरी परिस्थितियां” हैं।

गौरतलब है कि इसी दौरान, अदाणी ग्रुप अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के चलते विवादों में था। रिपोर्ट में अदाणी ग्रुप पर “स्टॉक मैनिपुलेशन और अकाउंटिंग फ्रॉड” का आरोप लगाया गया था, जिससे ग्रुप की साख पर सवाल उठे थे।

Advertisement
First Published - March 17, 2025 | 2:13 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement