वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की एक अंतर-मंत्रालय समिति के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) और भारत बायोटेक का दौरा करने के बाद दोनों कंपनियां कोविड-19 के अपने टीकों क्रमश: कोविशील्ड और कोवैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने में जुटी हुई हैं। समिति के एक सदस्य ने कहा, ‘घरेलू टीकों की मांग बढ़ रही है, इसलिए विनिर्माताओं से जल्द क्षमता बढ़ाने के लिए लीक से हटकर कुछ तरीके अपनाने को कहा गया है।’
उन्होंने कहा कि इन तरीकों में मौजूदा क्षमता का कोविड-19 टीकों के उत्पादन में इस्तेमाल या विदेश में विनिर्माण कराने के समझौते आदि शामिल हो सकते हैं। दोनों टीका विनिर्माता कंपनियों ने उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार से धन मांगा है। इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एसआईआई दो उत्पादन लाइनों की कुछ क्षमता का कोविड-19 टीका उत्पादन में इस्तेमाल करने के बारे में विचार कर रही है। इन दो लाइनों पर नए उत्पादों का उत्पादन होना था। कुछ महीनों पहले कंपनी के पुणे संयंत्र में आग के दौरान तीसरी लाइन प्रभावित हुई थी। इसमें उन टीकों का उत्पादन होना था, जो विनिर्माण के लिए कुछ समय में आने वाले थे। हालांकि कोविशील्ड उत्पादन लाइन आग से प्रभावित नहीं हुई थी। अब कंपनी हर महीने टीके की करीब छह करोड़ खुराक का उत्पादन कर रही है। कंपनी के पास नोवावैक्स के टीके कोवोवैक्स के विनिर्माण के लिए अलग लाइन है। समिति में शामिल सरकारी अधिकारियों ने पुणे के परिसर का दौरा कर हालात का जायजा लिया था। एसआईआई ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
हालांकि सूत्रों ने कहा, ‘ये लगातार चलने वाली चर्चाएं हैं, लेकिन अभी कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। अभी कुछ भी निर्णय नहीं हुआ है।’ भारत बायोटेक हैदराबाद संयंत्र में कोवैक्सीन का उत्पादन दोगुना करने पर सक्रियता से काम कर रही है। यह काम मई के आसपास पूरा होने के आसार हैं। इसी तरह बेंगलूरु के संयंत्र का भी विस्तार किया जा रहा है। सूत्रों ने दावा किया कि यह विस्तार पूरा होने के बाद क्षमता पांच गुना तक बढ़ सकती है। बेंगलूरु संयंत्र का विस्तार चालू कैलेंडर वर्ष की तीसरी तिमाही तक पूरा होने के आसार हैं। यह कंपनी इस समय हर महीने 40 लाख खुराकों का उत्पादन कर रही है।
इसने महाराष्ट्र सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी हाफकिन बायोफार्मास्यूटिकल्स के साथ शुरुआती बातचीत प्रारंभ की है। एक सूूत्र ने पुष्टि की कि, ‘शुरुआती दौर की बातचीत मार्च के पहले सप्ताह में हुई।’
हाफकिन ने टीका विनिर्माण का बीएसएल-3 संयंत्र स्थापित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार से 154 करोड़ रुपये और केंद्र सरकार से 87 करोड़ रुपये की धनराशि मांगी है। टीका उत्पादन दो चरणों में होगा। पहले चरण में दवा पदार्थ की आपूर्ति के बाद खुराक को भरने एवं बिक्री के लिए तैयार करने का होगा।
दूसरे चरण में संपूर्ण विनिर्माण लाइन स्थापित की जाएगी। इसके लिए भारत बायोटेक या कोविड-19 टीके के अन्य किसी विनिर्माता की तरफ से तकनीकी हस्तांतरण की आवश्यकता होगी। हाफकिन ने शुरुआत में हर साल 12.6 करोड़ खुराक और फिर इसे बढ़ाकर 22.8 करोड़ खुराक करने का लक्ष्य तय किया है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि इस समय भारत में पर्याप्त स्टॉक है। अधिकारी ने कहा, ‘हालांकि टीका विनिर्माताओं को अन्य करार करने से पहले भारत सरकार के ऑर्डर को पूरा करने को प्राथमिकता देनी होगी।’