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रिटेल स्पेस की मांग बढ़ने के आसार

अगले छह महीनों में औसत किराए में हो सकती है 15 फीसदी की वृद्धि

Last Updated- February 22, 2023 | 9:45 PM IST
The condition of retail has changed a lot in ten years
Shutter Stock

वैश्विक महामारी के प्रभाव खत्म होने, उपभोक्ता धारणा में सुधार, खपत बढ़ने और तमाम ब्रांडों द्वारा ओमनी चैनल मॉडल को अपनाए जाने के बीच खुदरा व्रिकेताओं को वृद्धि की रफ्तार बरकरार रहने की उम्मीद है।

खुदरा विक्रेताओं के संगठन रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, 2032 तक खुदरा बाजार का आकार 2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। साल 2022 में खुदरा बिक्री करीब 19 फीसदी की वृद्धि के साथ वैश्विक महामारी-पूर्व स्तर को पार कर गई और ई-कॉमर्स में वृद्धि के साथ इसमें आगे और तेजी दिख सकती है।

मॉल डेवलपरों का मानना है उपभोक्ताओं के विवेकाधीन खर्च में वृद्धि और खुदरा क्षेत्र की वृद्धि की रफ्तार बनी रहेगी। मॉल प्रबंधन कंपनी पीपीजेड के मुख्य कार्याधिकारी नजीब कुनिल ने कहा, ‘खुदरा क्षेत्र में सुधार की रफ्तार सबसे तेज रही और ग्राफ ऊपर की ओर बढ़ रहा है। हम जिन मॉलों का संचालन कर रहे हैं उसके विभिन्न स्टोरों में मात्रात्मक वृद्धि में उल्लेखनीय तेजी दिख रही है।

दिल्ली के एक प्रमुख मॉल में महज एक श्रेणी- कैफे में दिसंबर 2022 के दौरान एक करोड़ रुपये से अधिक की खपत दर्ज की गई, जिससे 2022 के बाद मात्रात्मक बिक्री पर उल्लेखनीय प्रभाव का संकेत मिलता है।’

खुदरा मांग में वृद्धि

एनारॉक-आरएआई रिपोर्ट से पता चलता है कि वृद्धि से उत्साहित डेवलपर्स अगले 4-5 वर्षों में शीर्ष 7 शहरों में लगभग 2.5 करोड़ वर्ग फुट नए मॉल स्पेस को जोड़ने की योजना बना रहे हैं। एनसीआर और हैदराबाद कुल नई आगामी आपूर्ति का लगभग 46 फीसदी हिस्सा है, इसके बाद 19 फीसदी पर बेंगलूरु का स्थान है।

रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) के मुख्य कार्याधिकारी कुमार राजगोपालन ने कहा, ‘वर्तमान में, शीर्ष शहरों में एनसीआर, एमएमआर और बेंगलूरु के कुल स्टॉक का 62 फीसदी के साथ देश भर में 5.1 करोड़ वर्ग फुट से अधिक मॉल स्टॉक है।’

साथ ही मझोले शहरों में हाई-एंड ब्रांड्स का खर्च महामारी से पहले की अवधि की तुलना में 50 फीसदी से अधिक हो गया है। रिपोर्ट में पाया गया है कि बड़े शहरों की तुलना में बड़े भूमि पार्सल और कम किराए की उपलब्धता भी कई ब्रांडों को आकर्षित करने में सहायक रही है।

उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तव में, मझोले और छोटे शहरों में खरीदारों के व्यवहार और रुचि में बदलाव आया है, जहां खरीदारी को छुट्टी के साथ जोड़ा जाता है। मनोरंजन ने मॉल डेवलपर्स और ब्रांडों को इन अप्रयुक्त बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए प्रेरित किया था।

एनारॉक रिटेल के मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक अनुज केजरीवाल कहते हैं, ‘अधिकांश ब्रांडों, खुदरा विक्रेताओं और मॉल डेवलपर्स द्वारा उपभोक्ता भावनाओं और खपत के लिए रुचि के इस पुनरुद्धार पर तुरंत कार्रवाई की गई। बड़े पैमाने पर रिवर्स माइग्रेशन और इन शहरों में रोजगार केंद्र खुलने के कारण मझोले और छोटे शहरों को भी काफी प्रसिद्धि मिली।’

बढ़ता किराया

उपभोक्ताओं की खर्च करने की शक्ति में वृद्धि के कारण, खुदरा लीजिंग की मांग में वृद्धि हुई, जिससे औसत किराए में भी वृद्धि हुई। मॉल डेवेलपर्स का कहना है कि कुल मिलाकर बढ़ता किराया हाई-एंड शॉपिंग स्पेस की बढ़ती मांग को दर्शाता है।

त्रेहान आईरिस के कार्यकारी निदेशक अमन त्रेहान कहते हैं, ‘उद्योग के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के शीर्ष आठ शहरों में हाई-स्ट्रीट स्थानों पर किराए 2022 में 50 फीसदी तक बढ़ गए हैं, जबकि शॉपिंग मॉल में सालाना औसत किराए में 10 फीसदी की वृद्धि देखी गई है।’

एनारॉक-आरएआई रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मॉल के किराए में लगभग 15 फीसदी की वृद्धि हुई है जो महामारी के पूर्व के स्तर से अधिक है। बेंगलूरु ने किराए में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की, लगभग 27 फीसदी, इसके बाद कोलकाता का स्थान रहा।

कुनिल ने कहा कि हालांकि प्रतिशत परिवर्तन बहुत अधिक नहीं है क्योंकि कोविड अवधि के दौरान किराए में काफी कमी आई है, फिर भी वे पूर्व-कोविड स्तर की तुलना में 20 फीसदी अधिक हैं। डेवलपर्स की राय है कि अगले 6 महीनों में औसत किराया लगभग 15 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि अधिक खुदरा ब्रांड प्रमुख स्थानों में उपस्थिति स्थापित करना चाहते हैं।

ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन रिटेल

उद्योग के अनुमान के मुताबिक, भारत में ऑनलाइन खुदरा बाजार कुल संगठित खुदरा बाजार का लगभग 25 फीसदी है, लेकिन 2030 तक लगभग 37 फीसदी होने की संभावना है। ऑनलाइन खुदरा की बढ़ती पैठ के बावजूद, इसमें समग्र व्यापार का बहुत कम हिस्सा है।

उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी के बाद, ई-कॉमर्स की स्थापना के बावजूद, ऑफलाइन रिटेल स्पेस को भौतिक और डिजिटल के उच्च स्तर के एकीकरण के रूप में बड़े झटके का सामना नहीं करना पड़ा।

त्रेहन को भी यह लगता है कि ई-कॉमर्स ने ऑफलाइन रिटेल को प्रभावित नहीं किया है क्योंकि भारत प्रमुख रूप से एक ऑफलाइन खुदरा बाजार है और विक्रेता बदलते बाजार की गतिशीलता को अपना रहे हैं और एक ओमनी चैनल वातावरण में शिफ्ट हो रहे हैं जहां ग्राहक विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन और ऑफलाइन चैनलों के माध्यम से खरीदारी कर सकते हैं। वह कहते हैं, ‘इस प्रकार, यह हमारे लिए एक जीत की स्थिति है।’

First Published - February 22, 2023 | 9:14 PM IST

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