महामारी के दौरान मजबूत कोविड-19 पोर्टफोलियो में बढ़त बनाने के बाद सिप्ला अब नवाचार के संदर्भ में अपनी वृद्घि के नए चरण की तैयारी कर रही है और नए क्षेत्रों में उपस्थिति बढ़ा रही है। मुंबई की यह कंपनी पिछले आठ महीनों से एमआरएनए टेक्नोलॉजी कंपनियों में निवेश के लिए उनके साथ बातचीत करती रही है।
सिप्ला के प्रबंध निदेशक एवं वैश्विक मुख्य कार्याधिकारी उमंग वोहरा ने कहा, ‘हमने पिछले आठ महीनों में एमआरएनए तकनीकी मालिकों के साथ बातचीत की है। हम उस मोड़ पर हैं जब हम कुछ एमआरएनए कंपनियों में निवेश कर सकते हैं। अच्छा तरीका है ऐसी टेक्नोलॉजी कंपनियों में निवेश करना और फिर इनका घरेलू तौर पर विकास करना।’
उन्होंने कहा कि महामारी ने हमें सिखाया कि यदि आपके पास अपनी स्वयं की निर्माण सुविधा है तो आप अपने उद्देश्य को कारगर तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं। वोहरा का कहना है, ‘चूंकि हम वैक्सीन निर्माण में वैश्विक दिग्गजों में शुमार हैं, इसलिए भारत अब एमआरएनए जैसी नए जमाने की प्रौद्योगिकियों में अपने स्वयं के घरेलू उद्योग में भी सक्षम होगा।’
सिप्ला की कार्यकारी वाइस-चेयरमैन समीना हामिद ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा कि वाणिज्यिक विकास इंजनों की जरूरत पूरी करने के लिए आपको शोध एवं विकास (आरऐंडडी) में निवेश करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हम अपना ज्यादा ध्यान विकास इंजनों के निर्माण, बड़े बाजारों में अपनी वाणिज्यिक क्षमताओं के विस्तार पर देंगे। उस वृद्घि को पूरा करने के लिए नवाचार में पर्याप्त निवेश किया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि सिप्ला छोटे मोलीक्यूल से लेकर इंजेक्टीबल, बायोसिमिलर और एमआरएनए में भी नवाचार पर ध्यान बढ़ाना चाहेगी।
पिछले साल मई में, ल्यूपिन के प्रबंध निदेशक नीलेश गुप्ता ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया था कि वह भी यहां एमआरएनए में संभावनाएं तलाशने पर जोर देंगे।
मांग बढऩे पर कोविड-19 के बड़े स्टॉक का इस्तेमाल करेगी सिप्ला: सिप्ला ने वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में एकमुश्त 200 करोड़ रुपये की कोविड-19 इन्वेंट्री दर्ज की और रॉश से एंटीबॉडी कॉकटेल की दवाएं, कुछ रेमडेसिविर दवाएं, मोलनुपिराविर आदि भी उसके स्टॉक में शामिल हैं। कोविड-19 पोर्टफोलियो का कोविड की चरम स्थिति के दौरान सिप्ला के कारोबार में 5-6 प्रतिशत योगदान था।