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90,000 करोड़ रुपये रहा अमूल का राजस्व

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गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (जीसीएमएमएफ) का राजस्व 66,000 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2025 में करीब 12 फीसदी अधिक रहा है।

Last Updated- April 23, 2025 | 11:17 PM IST
पीएम मोदी करेंगे Amul की बनास डेयरी का उद्घाटन, लाखों लोगों को मिलेगा रोजगार, Varanasi Dairy Plant: PM Modi will inaugurate Amul's Banas Dairy, lakhs of people will get employment
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत के सबसे बड़े डेरी ब्रांड अमूल ने बीते वित्त वर्ष में सभी श्रेणियों में दो अंकों में वृद्धि हासिल की है। कंपनी की आय वित्त वर्ष 2025 में 90,000 करोड़ रुपये हो गई जो एक साल पहले के वित्त वर्ष 2024 में 80,000 करोड़ रुपये थी। अमूल के प्रबंध निदेशक जयेन मेहता ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘अब हम अगले वित्त वर्ष 2026 में एक लाख करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य कर रहे हैं क्योंकि सभी श्रेणियों में हमें दमदार वृद्धि बरकरार रहने की उम्मीद है।’ उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की शुरुआत भी मजबूत रही है क्योंकि आइसक्रीम और मिल्कशेक जैसे गर्मी के उत्पादों की जबरदस्त मांग है।

मेहता ने कहा कि गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (जीसीएमएमएफ) का राजस्व 66,000 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2025 में करीब 12 फीसदी अधिक रहा है। देश भर में अमूल के उत्पाद बेचने वाले गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ के कारोबार में इस गिरावट का बड़ा कारण वलसाड, राजकोट, गोधरा, सूरत, वडोदरा और आणंद की डेरी खुद से दूध और दुग्ध उत्पाद अमूल ब्रांड के तहत ही बेचती हैं मगर यह अमूल के कारोबार में नहीं दिखता है। इसके अलावा अमूल के कुल कारोबार में मवेशी चारा कारोबार दर्शाया जाता है जो गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ के कारोबार का हिस्सा नहीं है।

अमूल की पहचान अपनी डेरी के लिए है, लेकिन धीरे-धीरे अब वह खाद्य कंपनी बनने की ओर अग्रसर है और उसने ऑर्गेनिक दाल, आटा, बासमती चावल, मसाले सहित कई उत्पाद उतार दिए हैं। बीते वित्त वर्ष में अमूल ने अपने ताजे दूध के साथ अमेरिकी बाजार में प्रवेश किया था और इसके लिए कंपनी ने मिशिगन मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (एमएमपीए) के साथ साझेदारी की थी। इस साझेदारी के तहत मिशिगन मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन दूध संग्रह और प्रसंस्करण करेगी और गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ देश में उसकी मार्केटिंग और अमूल के लिए ब्रांडिंग करेगी।

वित्त वर्ष 1974 में इस सहकारी संगठन की शुरुआत हुई थी और अब यह 50 से अधिक देशों में अपने उत्पादों का निर्यात करती है। गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ 9 जुलाई, 1973 को अस्तित्व में आया था, जब वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में छह डेरी सहकारी समितियां एक साथ आईं और कुरियन को भारत का मिल्कमैन कहा जाने लगा। कुरियन ने अमूल ब्रांड के तहत दूध और दुग्ध उत्पादों के विपणन का विचार रखा था। फिलहाल, गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ के पास गुजरात के 18,600 गावों में 36 करोड़ से अधिक किसानों के साथ 18 सदस्य संघ हैं।

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First Published - April 23, 2025 | 11:17 PM IST

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