facebookmetapixel
30% टूट चुका Realty Stock बदलेगा करवट, 8 ब्रोकरेज का दावा – ₹1,000 के जाएगा पार; कर्ज फ्री हुई कंपनीसिर्फ शेयरों में पैसा लगाया? HDFC MF की रिपोर्ट दे रही है चेतावनीIndia manufacturing PMI: जनवरी में आर्थिक गतिविधियों में सुधार, निर्माण और सर्विस दोनों सेक्टर मजबूतसोना, शेयर, बिटकॉइन: 2025 में कौन बना हीरो, कौन हुआ फेल, जानें हर बातट्रंप ने JP Morgan पर किया 5 अरब डॉलर का मुकदमा, राजनीतिक वजह से खाते बंद करने का आरोपShadowfax Technologies IPO का अलॉटमेंट आज होगा फाइनल, फटाफट चेक करें स्टेटसGold and Silver Price Today: सोना-चांदी में टूटे सारे रिकॉर्ड, सोने के भाव ₹1.59 लाख के पारSilver के बाद अब Copper की बारी? कमोडिटी मार्केट की अगली बड़ी कहानीAI विश्व शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे स्पेन के 80 विश्वविद्यालयों के रेक्टरभारत–कनाडा सहयोग को नई रफ्तार, शिक्षा और व्यापार पर बढ़ा फोकस

Amazon India: कम सैलरी में इतना काम कि घायल हो जा रहे कर्मचारी; 21% ही जॉब को मान रहे सेफ

UNI Global Union की यह स्टडी पिछले महीने दिल्ली-NCR क्षेत्र में हीटवेव के दौरान Amazon में खतरनाक वर्किंग कंडीशन की मीडिया रिपोर्टों के बाद आई है।

Last Updated- July 11, 2024 | 2:12 PM IST
Amazon

Amazon Jobs : नौकरी को लेकर असुरक्षा की भावना तो कर्मचारियों के दिमाग में चलती ही रहती है, लेकिन जितनी बड़ी और भरोसेमंद कंपनी होती है उतना ही कर्मचारी अपने जॉब को लेकर सेफ फील करते हैं। लेकिन, एमेजॉन (Amazon) में काम कर रहे कर्मचारियों का कुछ अलग ही कहना है। UNI ग्लोबल यूनियन की एक रिपोर्ट में खुलासा किया कि Amazon के केवल पांच में से एक वेयरहाउस कर्मचारी और डआाइवर भारत में काम करने के वातावरण (work environment) को सुरक्षित मानते हैं।

UNI Global Union की यह स्टडी पिछले महीने दिल्ली-NCR क्षेत्र में हीटवेव के दौरान Amazon में खतरनाक वर्किंग कंडीशन की मीडिया रिपोर्टों के बाद आई है।

ड्राइवर से लेकर गोदाम कर्मचारी तक नौकरी के डर में

यह रिपोर्ट Amazon India से जुड़े 1,838 पूर्व और वर्तमान गोदाम कर्मचारियों और ड्राइवरों के सर्वेक्षण प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। अमेजन इंडिया वर्कर्स एसोसिएशन (AIWA) के साथ साझेदारी में पब्लिश इस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘केवल 21.3 फीसदी गोदाम कर्मचारी और ड्राइवर Amazon में काम करने के वातावरण को सुरक्षित मानते हैं, जबकि लगभग 45 फीसदी गोदाम कर्मचारी और 47 फीसदी डिलीवरी ड्राइवर इसे असुरक्षित मानते हैं।’

इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि चार में से पांच गोदाम कर्मचारियों ने बताया कि Amazon द्वारा तय टारगेट को पूरा करना कठिन या बहुत कठिन है और लगभग 86 फीसदी गोदाम कर्मचारियों और 28 फीसदी ड्राइवरों ने कहा कि कंपनी उन्हें शौचालय के लिए पर्याप्त समय नहीं देती है।

इस बीच, रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सर्वेक्षण किए गए हर पांच में से एक डिलीवरी ड्राइवर ने बताया कि वे नौकरी के दौरान घायल हुए हैं।

कमाई के मोर्चे पर, रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया कि लगभग 46 फीसदी गोदाम कर्मचारी और 37 फीसदी डिलीवरी ड्राइवरों ने बताया कि उनका वेतन उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त ही नहीं है।

Amazon ने दावों को बताया गलत

हालांकि, Amazon ने इन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत, अप्रमाणित और अपने ही कर्मचारियों द्वारा सीधे बताई गई बातों के विरोधाभासी बताया है।

Amazon India के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ‘बताए जा रहे आंकड़े सबसे अच्छे रूप में संदिग्ध प्रतीत होते हैं, और सबसे खराब रूप में जानबूझकर एक विशेष नैरेटिव को पेश करने के लिए डिजाइन किए गए हैं जिसे कुछ समूह तथ्य के रूप में दावा करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके विपरीत, हमारे मानेसर फुलफिलमेंट सेंटर में हमारे सबसे हालिया आंतरिक सर्वेक्षण में 87 फीसदी कर्मचारियों ने कहा कि वे अपनी नौकरियों से संतुष्ट थे, 10 में से 8 ने Amazon में काम करने के लिए एक शानदार जगह के रूप में सिफारिश की।’ कंपनी ने कहा कि सर्वे रैंडम और गुमनाम रूप से आयोजित किया गया था।

UNI Global Union ने कैसे किया सर्वे

रिपोर्ट को UNI ग्लोबल यूनियन द्वारा तैयार किया गया था। सर्वे को Jarrow Insights द्वारा 2 फरवरी से 22 मार्च, 2024 तक 50 दिनों में किया गया था। इसमें Amazon के वर्कफोर्स के एक रिप्रेजेंटेटिव सैंपल को सुनिश्चित करने के लिए ऑन-साइट और डिजिटल दोनों तरीकों का उपयोग किया गया।

UNI ग्लोबल यूनियन ने पिछले साल संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम UK) सहित आठ देशों में एक समान अध्ययन किया था, जिसमें भी Amazon में अत्यधिक दबाव और हानिकारक वर्किंग कंडीशन की रिपोर्ट दी गई थी।

UNI ग्लोबल यूनियन ने एक बयान में कहा, ‘भारत से मिली जानकारी उन वैश्विक चेतावनियों का अलॉर्म है जो दुनिया भर के श्रमिक अमानवीय उत्पादकता मांगों (inhumane productivity demands) , अपर्याप्त सुरक्षा उपायों और खराब मुआवजे के बारे में बात कर रही हैं।’

First Published - July 11, 2024 | 11:02 AM IST

संबंधित पोस्ट