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DGCA के आदेश पर Air India ने अपने सभी बोइंग विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच की जांच की पूरी

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एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने बोइंग 787 और 737 विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच की जांच पूरी कर डीजीसीए के निर्देशों का समय पर पालन किया।

Last Updated- July 22, 2025 | 10:09 PM IST
Air India
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

एयर इंडिया और उसकी किफायती विमानन सेवा एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपने बेड़े में मौजूद सभी बोइंग 787 और 737 विमानों पर लगे फ्यूल कंट्रोल स्विच के लॉकिंग मैकेनिज्म का एहतियाती निरीक्षण पूरा कर लिया है। यह निरीक्षण 14 जुलाई को नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा जारी किए गए एक निर्देश के तहत किया गया है।

डीजीसीए का यह निर्देश विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की जांच रिपोर्ट के बाद 12 जुलाई को आया था। ब्यूरो ने यह रिपोर्ट एयर इंडिया की उड़ान एआई171 की 12 जून को हुई दुर्घटना की जांच के बाद दी। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में पाया गया कि अहमदाबाद से उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद ही बोइंग 787 विमान के दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद हो गए थे, जिसके कारण दोनों इंजन भी बंद हो गए।

कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर से पता चला कि एक पायलट ने दूसरे पायलट से पूछा कि फ्यूल कंट्रोल स्विच क्यों बंद कर दिया। इस पर दूसरे पायलट ने जवाब दिया कि उसने नहीं किया। इसके कुछ सेकंड बाद ही विमान हवाई अड्डे के पास एक इमारत से टकरा गया। इससे पहले पायलट ने मेडे कॉल की थी।

एयर इंडिया ने आज जारी एक बयान में कहा, ‘एयर इंडिया ने अपने बेड़े में मौजूद सभी बोइंग 787 और बोइंग 737 विमानों पर फ्यूल कंट्रोल स्विच की लॉकिंग मैकेनिज्म का एहतियाती निरीक्षण पूरा कर लिया है।’ एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी जांच पूरी कर ली है क्योंकि उसके बेड़े में भी बोइंग 737 विमान हैं। बयान में कहा गया है, ‘इसके साथ ही दोनों विमानन कंपनियों ने 14 जुलाई, 2025 को डीजीसीए द्वारा जारी निर्देशों का पालन कर लिया है।’

विमानन कंपनी ने कहा, ‘लॉकिंग मैकेनिज्म में कोई समस्या नहीं पाई गई।’ उसने यह भी कहा कि 12 जुलाई को स्वैच्छिक जांच शुरू कर दी गई थी और डीजीसीए द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच पूरी हो गई है। कंपनी ने इसकी औपचारिक सूचना नियामक को दे दी है।

फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि एआई171 में फ्यूल कंट्रोल स्विच क्यों बंद हो गया था, लेकिन इस घटना के कारण डीजीसीए ने 14 जुलाई को अनिवार्य निरीक्षण का आदेश जारी किया था। डीजीसीए के आदेश में अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) के 2018 के स्पेशल एयरवर्दीनेस इन्फॉर्मेशन बुलेटिन (एसएआईबी) का हवाला दिया गया था। उसमें आशंका जताई गई थी कि 737 और 787 सहित कुछ बोइंग विमानों में हनीवेल द्वारा निर्मित फ्यूल कंट्रोल स्विच इस तरह लगाए जा सकते हैं जिससे उनका लॉकिंग मैकेनिज्म काम नहीं करेगा। 

मगर एफएए ने एआई171 दुर्घटना के बाद कोई नया निर्देश जारी नहीं किया और 2018 का वह बुलेटिन केवल परामर्श था। ब्रिटेन ​सिविल एविएशन अथॉरिटी (सीएए) ने भी कहा है कि बोइंग को कुछ भी करने की जरूरत नहीं है।

इस बीच सिंगापुर एयरलाइंस और एतिहाद एयरवेज जैसी कुछ विदेशी विमानन कंपनियों ने अपनी मर्जी से एहतियातन जांच की।

डीजीसीए के 14 जुलाई के आदेश से प्रभावित बोइंग विमानों चलाने वाली भारतीय कंपनियों को 21 जुलाई तक जांच पूरी करने के बाद रिपोर्ट जमा कराना आवश्यक था। बोइंग 777 को इस आदेश से छूट दी गई है क्योंकि उसमें हनीवेल के स्विच का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

डीजीसीए का आदेश पांच भारतीय विमानन कंपनियों- एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, इंडिगो, स्पाइसजेट और अकासा एयर- में उड़ रहे बोइंग विमानों पर लागू है।

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First Published - July 22, 2025 | 10:05 PM IST

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